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मंत्री विक्रमादित्य का नेता प्रतिपक्ष जयराम पर पलटवार, कहा – केंद्र से आई मदद को लेकर श्वेत पत्र जारी करे

मंत्री विक्रमादित्य का नेता प्रतिपक्ष जयराम पर पलटवार, कहा - केंद्र से आई मदद को लेकर श्वेत पत्र जारी करे
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प्रजासत्ता ब्यूरो|
हिमाचल के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और नेता प्रतिपक्ष और पूर्व सीएम जयराम ठाकुर के बीच वार पलटवार का सिलसिला लगातार जारी है। इस बात विक्रमादित्य सिंह ने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर बिना मतलब की बयानबाजी न करने और आपदा की घड़ी में केंद्र से ज्यादा बजट लाने में सरकार का सहयोग करेने की सलाह दी है। उन्होंने जयराम पर तंज कसते हुए कहा कि जब वह धूमल सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री थे, तब उनकी क्या कार्य प्रणाली रही, इसे लेकर उनका मुंह न खुलवाए।

सचिवालय स्थित अपने कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि जयराम ठाकुर लगातार केंद्रीय सहायता मिलने का राग अलाप रहे हैं। उनका कहना है कि केंद्र सरकार ने राज्य को सामान्य तौर पर प्राप्त होने वाली बजट धनराशि के अतिरिक्त कुछ नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने उसके अतिरिक्त राज्य की मदद की है तो पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को श्वेत पत्र लाकर बताना चाहिए कि केंद्र सरकार ने राहत कार्यों के लिए क्या दिया है।

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वहीँ पिछले कल जयराम ठाकुर ने द्वारा BJP नेताओं की JCB को काम नहीं दिया जाने पर विक्रमादित्य सिंह ने आज पलटवार करते हुए कहा कि मुफ्त में काम करने के इच्छुक BJP नेताओं की जेसीबी से जुड़े सवाल पर कहा कि नेता प्रतिपक्ष शाम पांच बजे तक ऐसी JCB की सूची उन्हें दे दें। सभी को काम दे दिया जाएगा। उनकी जेसीबी से बंद सड़कों को खोलने में सहायता मिलेगी।

मंत्री ने कहा कि हिमाचल में राष्ट्रीय आपदा घोषित न करना दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे पहले गुजरात के भुज में जब भूकंप से तबाही हुई थी तो वहां राष्ट्रीय आपदा घोषित की गई। उत्तराखंड में भी 2014 में राष्ट्रीय आपदा घोषित की गई। हिमाचल में 350 लोगों की जान चली गई। 15 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति तबाह हो गई। सैकड़ों मवेशी इस आपदा में मृत हुए। फिर भी राष्ट्रीय आपदा घोषित नहीं की गई।

मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि शिमला शहर को आज डी-कंजस्ट करना जरूरी है। इसलिए सेटेलाईट टाउन विकसित करने की जरूरत है। जाठियादेवी में इस दिशा में काम शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सचिवालय को छोड़कर दूसरे दफ्तर प्रदेश से बाहर शिफ्ट करने की जरूरत है, ताकि शिमला पर बिल्डिंग के बोझ को कम किया जा सके।

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इसके अलावा उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश, फ्लैश फ्लड और लैंडस्लाइड से क्षतिग्रस्त सभी सड़कें 15 सितंबर तक खोलने की डेडलाइन फिक्स की गई है। मंत्री ने कहा कि इसे लेकर सभी अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए है।

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