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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने परिवहन विभाग की ई-परिवहन व्यवस्था का किया शुभारम्भ

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने परिवहन विभाग की ई-परिवहन व्यवस्था का किया शुभारम्भ
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प्रजासत्ता|
प्रदेश के लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस/पंजीकरण प्रमाण-पत्र एवं परमिट आदि की फेसलेस सुविधा प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज यहां राज्य परिवहन विभाग की ई-परिवहन व्यवस्था का शुभारम्भ किया।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर संबोधित करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों से तकनीक ने हमारे जीवन को परिवर्तित किया है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए वर्ष 2014 में डिजिटल इंडिया की परिकल्पना की थी। कोविड महामारी के दौरान तकनीक के उपयोग के कारण आवश्यक सेवाएं बिना किसी बाधा के सुनिश्चित हुई हैं। व्यापार में सुगमता में हिमाचल प्रदेश 16वें स्थान से सातवें स्थान पर पहुंच गया है जिसका पूरा श्रेय प्रदेश के अधिकारियों और कर्मचारियों को जाता है। प्रदेश सरकार ने पहले ई-विधानसभा, उसके उपरांत ई-बजट और अब ई-केबिनेट की शुरूआत की है। ई-परिवहन भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

जय राम ठाकुर ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार ने प्रदेश की बागडोर संभालते ही जन समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जनमंच कार्यक्रम आरम्भ किया। प्रदेश सरकार ने दूरभाष के माध्यम से लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन-1100 शुरू की है। सरकार ने कोविड महामारी के दौरान प्रदेश के बाहरी राज्यों में फंसे लगभग 2.50 लाख लोगों की सुरक्षित प्रदेश वापसी सुनिश्चित बनाने के लिए भी तकनीक का उपयोग कर हेल्पलाइन विकसित की, जिससे वे प्रदेश सरकार द्वारा नियुक्त किए गए नोडल अधिकारियों से आसानी से सम्पर्क कर पाएं।

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उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोगों को बेहतरीन सेवाएं प्रदान करने में ई-परिवहन सुविधा महत्वपूर्ण साबित हुई है। लोगों को इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए जागरुक करने पर विशेष बल दिया जाना चाहिए। इस प्रणाली की सफलता लोगों द्वारा इस सुविधा को सुगमता से अपनाने पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली के माध्यम से लोगों को विभिन्न नागरिक केंद्रित सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।

जय राम ठाकुर ने कहा कि देश व प्रदेश में वाहनों की तीव्रता से बढ़ रही संख्या ने यातायात पंजीकरण और यातायात प्रबन्धन प्रणाली पर एक बार पुनः विचार करने पर मजबूर कर दिया है। उन्होंने कहा कि एनआईसी द्वारा एकीकृत सड़क दुर्घटना डेटाबेस क्रियान्वित किया जाएगा। यह वेब आधारित सूचना प्रौद्योगिकी समाधान है जिससे विभिन्न एजेंसियां जैसे- पुलिस, परिवहन, लोक निर्माण विभाग को सड़कों व वाहन की स्थिति के आधार पर दुर्घटनाओं का ब्यौरा एकत्र करने में सहायता मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ई-परिवहन सेवा से लोगों को विभिन्न आॅनलाइन प्रमाण-पत्र और पंजीकरण के नवीनीकरण तथा ड्राइविंग लाइसेंस आदि जारी करने में सुविधा होगी। इससे लोगों को एक बटन पर कई अन्य सेवाएं भी उपलब्ध होंगी।

जय राम ठाकुर ने इस अवसर पर ई-परिवहन व्यवस्था प्रचार साहित्य को भी जारी किया।

शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि लोगों को राहत प्रदान करने के लिए परिवहन विभाग की यह एक ऐतिहासिक पहल है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम है। उन्होंने कहा कि पूर्ण राज्यत्व के स्वर्ण जयंती वर्ष में यह पहल सराहनीय है जिससे विभाग के कार्य में भी पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

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परिवहन एवं उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ने कहा कि शिमला और कांगड़ा जिले में दो पायलट परियोजनाएं शुरू की गई थीं जिनमें खामियों को सुधारने के उपरांत पूरे प्रदेश में इस प्रणाली को क्रियान्वित किया गया है। इससे प्रदेश के लोगों को बेहतर परिवहन सेवाएं सुनिश्चित करने में सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि राज्य परिवहन द्वारा प्रदेश के लोगों को सड़क सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए हाल ही में सड़क सुरक्षा माह का आयोजन किया गया।

प्रधान सचिव, परिवहन के.के पंत ने जानकारी दी कि प्रदेश में लगभग 18 लाख वाहन पंजीकृत किये गए हैं। प्रदेश सरकार का उद्देश्य राज्य के लोगों को बेहतर परिवहन सेवाएं प्रदान करना है।

निदेशक, परिवहन अनुपम कश्यप ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

सांसद एवं राज्य भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कश्यप, मुख्य सचिव अनिल खाची, पूर्व विधायक गोविन्द राम शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रधान निजी सचिव डाॅ. आरएन बत्ता, एचआरटीसी के प्रबन्ध निदेशक संदीप कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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