Shimla-Parwanoo Fourlane: हिमाचल प्रदेश में परवाणू से शिमला तक बन रही फोरलेन सड़क पर लगातार हो रहे हादसों को लेकर हिमाचल सरकार सोचने को मजबूर हो गई है। खासकर परवाणू से सोलन तक के पहले हिस्से में तीखे मोड़ों की वजह से वाहन पलट रहे हैं और दुर्घटनाएं बढ़ गई हैं। इन मोड़ों पर तेज रफ्तार से आने वाली गाड़ियां नियंत्रण खो देती हैं जिससे कई लोग अपनी जान भी गवा चुके हैं।
ऐसे में राज्य सरकार ने इस समस्या को गंभीरता से लिया है। सरकार ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को एक पत्र लिखकर कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। सरकार का मुख्य कहना है कि परवाणू-शिमला फोरलेन पर इन खतरनाक तीखे मोड़ों को पूरी तरह खत्म किया जाए। जहां जरूरी हो, वहां सड़क का नया निर्माण हो या फिर पुरानी सड़क को दोबारा बनाया जाए।
पत्र में बताया गया है कि फोरलेन ज्यादातर पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग पर ही बनाया गया है, सिर्फ सोलन बाईपास को छोड़कर। छोटी गाड़ियों के लिए अधिकतम स्पीड 60 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है, लेकिन इन तेज मोड़ों की वजह से इतनी रफ्तार में भी वाहन सुरक्षित नहीं चल पा रहे। कई बार NHAI को इस बारे में सूचित किया गया, पर अभी तक कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ।
इसके अलावा सरकार ने कुछ खास जगहों का जिक्र किया है जहां हादसे सबसे ज्यादा हो रहे हैं। जैसे कि परवाणू टिंबर ट्रेल के पास, जहां स्पीड ब्रेकर लगे होने के बावजूद कार और ट्रक पलट जाते हैं। जाबली-सनवारा के बीच इशर स्वीट्स के नजदीक तीखे मोड़ पर भी गाड़ियां दुर्घटनाग्रस्त हो रही हैं। इसके अलावा परवाणू सब्जी मंडी के आसपास के मोड़ पर भी वाहन पलटने की घटनाएं आम हैं। सोलन बस अड्डे से सब्जी मंडी तक के हिस्से में तेज गाड़ियां किनारे से टकरा रही हैं।
सरकार ने पत्र में साफ कहा है कि NHAI को परवाणू-शिमला फोरलेन पर इन सभी जोखिम वाली जगहों पर सड़क को दोबारा संरेखित (रि-अलाइनमेंट) करना चाहिए या वैकल्पिक रास्ते निकालने चाहिए। ऐसा करने से सड़क पर सुरक्षित यात्रा होगी और लोगों की जान-माल की रक्षा हो सकेगी।
बता दें कि परवाणू-शिमला फोरलेन में निर्माण की कमियों का मुद्दा हिमाचल विधानसभा में पहले भी कई बार उठ चुका है। कसौली के विधायक विनोद सुलानापूरी और पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने भी NHAI की कार्यप्रणाली और फोरलेन निर्माण और गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। इसके अलावा प्रियंका गांधी ने संसद में भी इस प्रोजेक्ट की खामियों को लेकर कई बातें रखी थीं। अब देखना यह है कि NHAI इन सुझावों पर कितनी जल्दी कार्रवाई करता है, ताकि इस महत्वपूर्ण सड़क पर हादसों का सिलसिला थम सके।

















