Himachal News Today: मंडी नगर निगम चुनाव के प्रचार अभियान के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में किए गए एक आह्वान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। बुधवार को मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी वस्तु, विशेषकर सोना खरीदने जैसी परंपराओं पर रोक लगाना बिल्कुल भी उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में नागरिकों की व्यक्तिगत पसंद और सांस्कृतिक मान्यताओं पर इस तरह का अंकुश लगाना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
सीएम सुक्खू ने सोने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सोना खरीदना हिमाचल प्रदेश और देश की लोक संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ विषय है। यह केवल एक धातु नहीं है, बल्कि विवाह-शादियों और अन्य मांगलिक समारोहों का एक अनिवार्य हिस्सा है। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने आर्थिक पक्ष को मजबूती से रखते हुए तर्क दिया कि स्वर्ण आभूषणों का कारोबार हजारों स्वर्णकारों और उनसे जुड़े लोगों के रोजगार का प्राथमिक माध्यम है। ऐसे में इस पर किसी भी तरह की पाबंदी सीधे तौर पर आम आदमी की आजीविका पर प्रहार होगी।
मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि “आजाद भारत में कौन किसे रोके, इस पर कुछ भी कहना सही नहीं है।” उन्होंने आगे जोड़ा कि प्रधानमंत्री मोदी ने किस उद्देश्य या मंशा से देश की जनता से यह आह्वान किया है, इसकी बेहतर जानकारी स्वयं प्रधानमंत्री ही दे सकते हैं। सुक्खू का यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच विभिन्न आर्थिक नीतियों को लेकर जुबानी जंग तेज है।
संसाधनों की कटौती और फिजूलखर्ची के मुद्दे पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने हिमाचल के राज्यपाल के काफिले में वाहनों की कटौती के निर्णय का स्वागत किया। हालांकि, उन्होंने गर्व से उल्लेख किया कि प्रदेश सरकार पहले से ही संसाधनों के सीमित उपयोग और फिजूलखर्ची को रोकने की नीति पर काम कर रही है। सुक्खू ने उदाहरण देते हुए कहा कि वे स्वयं एक छोटी इलेक्ट्रिक कार में सफर करते हैं, जिसका संचालन खर्च पेट्रोल वाहनों की तुलना में बहुत कम है। उन्होंने कहा कि मंत्रियों और अपने स्वयं के काफिलों में पहले ही भारी कटौती लागू कर दी है।
आर्थिक अनुशासन की दिशा में उठाए गए कड़े कदमों का विवरण देते हुए सीएम सुक्खू ने बताया कि मंत्रियों के वेतन में 30 प्रतिशत और विधायकों के वेतन में 20 प्रतिशत की अस्थाई कटौती की गई है। उन्होंने दावा किया कि सरकार के इन्हीं ठोस प्रयासों के कारण हिमाचल प्रदेश धीरे-धीरे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पिछले शासनकाल में हजारों करोड़ रुपये के ऐसे भवनों का निर्माण किया गया, जिनका आज कोई उपयोग नहीं हो रहा है, जिसे उन्होंने जनता के पैसे की बर्बादी करार दिया।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार को 1500 करोड़ रुपये के लंबित राहत पैकेज पर भी घेरा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने हिमाचल के लिए इस पैकेज की घोषणा की थी, लेकिन आज तक एक भी रुपया प्रदेश को नहीं मिला। उन्होंने भाजपा नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी सरकार अपना हक मांगना और लाना जानती है। सुक्खू ने विश्वास जताया कि आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए किए जा रहे प्रयासों के सार्थक परिणाम जल्द ही जनता के सामने होंगे।
वहीं, शिमला के कमला नेहरू अस्पताल (KNH) से गायनी वार्ड को शिफ्ट करने पर हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई रोक के विषय में मुख्यमंत्री ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि यह कोई विवादित विषय नहीं है। गायनी वार्ड को आईजीएमसी (IGMC) में स्थानांतरित करने का निर्णय डॉक्टरों की मांग पर लिया गया था ताकि वहां आधुनिक ‘रोबोटिक सर्जरी’ की सुविधा दी जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार अब हाईकोर्ट के आदेश का विस्तार से अध्ययन करेगी और उसके अनुसार आगामी कदम उठाएगी।
















