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Himachal News: कांगड़ा सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के अधिकारियों के खिलाफ होटल लोन घोटाले में एफआईआर दर्ज

Himachal News: कांगड़ा सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के अधिकारियों के खिलाफ होटल लोन घोटाले में एफआईआर दर्ज
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Himachal News: कांगड़ा सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (KCCB) के एक चर्चित होटल लोन मामले में बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक विनोद कुमार समेत आठ अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह एफआईआर ऊना जिले के थाना सदर में, मंडी जिले के गांव भूरा, डाकघर राजगढ़ निवासी युद्ध चंद बैंस की शिकायत पर पंजीकृत की गई है।

शिकायतकर्ता युद्ध चंद बैंस एक जाने-माने होटल व्यवसायी हैं, जिनके पास मंडी जिले में ‘होटल लेक पैलेस’ और मनाली में ‘हिमालयन स्नो विलेज’ सहित कई प्रतिष्ठित होटल्स हैं। उन्होंने वर्ष 2016 में कांगड़ा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक (केसीसीबी) से अपने होटल प्रोजेक्ट के लिए लगभग 12 करोड़ रुपये का टर्म लोन लिया था। इस लोन के बदले में उन्होंने अपने दोनों होटल्स की संपत्तियों को बैंक के पास गिरवी रखा था।

हालाँकि, शिकायतकर्ता का आरोप है कि लोन मंजूर होने के बावजूद बैंक ने समय पर पूरी रकम जारी नहीं की। धनराशि के वितरण में अनियमितताएँ और देरी हुई, जिसके कारण उनके होटल प्रोजेक्ट को काफी नुकसान उठाना पड़ा। इस प्रोजेक्ट का कुल अनुमानित मूल्य 240 करोड़ रुपये था।

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मुख्य आरोप यह है कि बैंक के अधिकारियों ने गिरवी रखी गई संपत्ति के मूल्यांकन रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की। शिकायत के अनुसार, कुछ महत्वपूर्ण पन्ने जानबूझकर गायब कर दिए गए और आवश्यक कार्यालयीन नोटिंग्स हटा दी गईं। ये सभी दस्तावेज बैंक की ही हिरासत में थे, इसलिए इनकी गुमशुदगी की जिम्मेदारी बैंक अधिकारियों पर ही आती है।

शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की दिशा-निर्देशों और कोविड-19 काल में लागू मोरेटोरियम के बावजूद, वर्ष 2021 में उनके लोन को गलत तरीके से गैर-निष्पादित आस्ति (एनपीए) घोषित कर दिया गया। इस कारण यह मामला हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय और ऋण वसूली अधिकरण (डीआरटी), चंडीगढ़ तक पहुँच गया।

जब शिकायतकर्ता ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत जानकारी माँगी, तो पता चला कि केसीसीबी की वसूली शाखा से उनकी लोन फाइल के कई महत्वपूर्ण पन्ने, खासकर रिजर्व प्राइस फिक्सेशन और मूल्यांकन से जुड़े दस्तावेज, गायब हैं। आरोप है कि यह सब जानबूझकर किया गया ताकि संपत्ति का मूल्य कम दिखाया जा सके और वसूली प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके।

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इस मामले में पुलिस ने पूर्व प्रबंध निदेशक विनोद कुमार, राकेश शर्मा (तत्कालीन महाप्रबंधक, वसूली), कुलदीप भारद्वाज (उप महाप्रबंधक, वसूली), वीनू शर्मा (सहायक महाप्रबंधक), सतीश कुमारी (सहायक महाप्रबंधक), सुरजीत राणा (सहायक महाप्रबंधक), दिनेश शर्मा (ग्रेड-तीन कर्मचारी) और बाबू राम (ग्रेड-चार कर्मचारी) के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

पुलिस अधीक्षक अमित यादव ने इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि जाँच शुरू कर दी गई है। जाँच के दौरान प्राथमिकी में लगाए गए सभी आरोपों, बैंक की लोन फाइल, मूल्यांकन रिपोर्ट, आरटीआई के जवाब, वसूली के रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की गहन जाँच की जाएगी।

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