Himachal Entry Tax Protest: हिमाचल प्रदेश में एंट्री टैक्स को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सोमवार को पंजाब और हरियाणा से लगती हिमाचल की सीमाओं पर किसान संगठनों, ट्रांसपोर्टरों, टैक्सी यूनियनों और व्यापारियों ने संयुक्त रूप से चक्का जाम शुरू कर दिया, जिससे कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित हो गया।
प्रदर्शनकारियों ने चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे पर हिमाचल सीमा के पास कीरतपुर-नेरचौक-मनाली फोरलेन को बंद कर दिया है। स्थिति ऐसी है कि फोरलेन पर टनल के आगे वाहनों को जाने की अनुमति नहीं दी जा रही और पुलिस लोगों को वैकल्पिक मार्गों से उनके गंतव्य तक भेज रही है।
संघर्ष समिति के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन के तहत सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक पंजाब और हरियाणा से लगती हिमाचल प्रदेश की सभी 55 से 56 सीमा चौकियों को बंद रखने का फैसला लिया गया है। इस दौरान राज्य में प्रवेश करने वाले वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित रही।
दरअसल, सुक्खू सरकार द्वारा बाहरी राज्यों की निजी कारों पर लगाया जाने वाला टैक्स 70 रुपये से बढ़ाकर 170 रुपये किया गया था। वहीं, भारी व्यावसायिक वाहनों जैसे ट्रक और बसों के लिए यह शुल्क 600 रुपये से बढ़ाकर 900 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया था। बाद में सरकार ने संशोधन करते हुए निजी वाहनों के लिए शुल्क 100 रुपये कर दिया, लेकिन इसके बावजूद विरोध जारी है।
प्रदर्शन के चलते हिमाचल आने वाले पर्यटकों और यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रशासन ने पहले ही लोगों को सलाह दी थी कि यदि वे 1 जून को पंजाब या हरियाणा के रास्ते शिमला, मनाली, धर्मशाला या डलहौजी जाने की योजना बना रहे हैं, तो सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच सीमा पार करने से बचें।
मंडी के सरकाघाट से चंडीगढ़ लौट रहे राज ठाकुर ने बताया कि बिलासपुर पुलिस ने उन्हें कीरतपुर-मनाली फोरलेन की पहली टनल से वापस लौटा दिया। इसके बाद उन्हें स्वारघाट होते हुए बद्दी-नालागढ़ मार्ग के जरिए चंडीगढ़ भेजा गया। उन्होंने बताया कि वैकल्पिक मार्गों पर भी लंबा जाम देखने को मिल रहा है।
उधर, बिलासपुर पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि एसएचओ और डीएसपी मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर रहे हैं। पुलिस प्रशासन ने लोगों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की अपील की है, जबकि प्रदर्शन समाप्त होने तक यातायात व्यवस्था सामान्य होने की संभावना नहीं है।

















