Himachal Weather Alert: हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर अत्यंत खतरनाक रूप धारण करने जा रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग और मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने प्रदेश में 29 जुलाई से 2 अगस्त तक लगातार भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान जताते हुए वार्निंग बुलेटिन जारी किया है। बता दें कि मौसम विभाग ने पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को सतर्क रहने की कड़ी सलाह दी है, क्योंकि अगले पांच दिन राज्य में किसी भी तरह की लापरवाही बेहद भारी पड़ सकती है।
मौसम विभाग द्वारा जारी जिलावार पूर्वानुमान के अनुसार, प्रदेश के चंबा, कांगड़ा और मंडी जिले इस मानसूनी स्पेल से सबसे अधिक प्रभावित रहने वाले हैं। इसके अलावा कुल्लू, शिमला, सिरमौर, किन्नौर और लाहौल-स्पीति के विभिन्न हिस्सों में भी मूसलाधार बारिश का दौर लगातार जारी रहने की संभावना जताई गई है। लगातार होने वाली इस वर्षा के कारण राज्य के कई हिस्सों में भूस्खलन, अचानक बाढ़ जलभराव और मुख्य मार्गों के बंद होने से यातायात बाधित होने का बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है।

रिपोर्ट के अनुसार मानसून के प्रकोप पर नजर डालें तो चंबा, कांगड़ा और मंडी में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है, जबकि कुल्लू, किन्नौर, लाहौल-स्पीति और सिरमौर में मध्यम वर्षा के आसार हैं। 30 जुलाई को चंबा, कांगड़ा और मंडी जिलों में स्थिति और गंभीर हो सकती है, जहां भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इसी दौरान कुल्लू, शिमला और सिरमौर में भारी बारिश तथा किन्नौर में मध्यम बारिश का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है।
मौसम का यह उग्र रूप 31 जुलाई को भी जारी रहेगा, जब चंबा और कांगड़ा जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट रहेगा। वहीं कुल्लू, मंडी और शिमला में भारी बारिश, जबकि किन्नौर और लाहौल-स्पीति में मध्यम वर्षा दर्ज की जा सकती है। 1 अगस्त को भी मौसम से कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। इस दिन कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। तत्पश्चात 2 अगस्त को चंबा, कांगड़ा, शिमला और सिरमौर में भारी बारिश का दौर बना रहेगा, जबकि कुल्लू, मंडी और किन्नौर में मध्यम बारिश की संभावना है।
मौसम विभाग के अनुसार लगातार हो रही बारिश के कारण हिमाचल के संवेदनशील क्षेत्रों में भूस्खलन और पहाड़ों से मलबा गिरने की घटनाएं तेजी से बढ़ सकती हैं। नदियों, खड्डों और प्राकृतिक नालों का जलस्तर अचानक बढ़ने से फ्लैश फ्लड का खतरा मंडरा रहा है। निचले इलाकों में जलभराव की समस्या पैदा हो सकती है, जिससे कमजोर भवनों और ढांचों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। फिसलन भरी सड़कों के कारण वाहन दुर्घटनाओं, लंबे ट्रैफिक जाम और सड़कें पूरी तरह बाधित होने का जोखिम बना हुआ है। इसके अतिरिक्त कृषि और बागवानी फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचने तथा आवश्यक सेवाओं एवं सामान्य जनजीवन के बुरी तरह प्रभावित होने की संभावना है।
हालात की गंभीरता को देखते हुए मौसम विभाग और राज्य प्रशासन ने विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। लोगों से अपील की गई है कि वे भूस्खलन और फ्लैश फ्लड के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में जाने से बचें तथा नदियों, खड्डों और नालों से सुरक्षित दूरी बनाकर रखें। जलभराव वाले स्थानों पर अनावश्यक आवाजाही न करने, यात्रा के दौरान ट्रैफिक नियमों व गति सीमा का पालन करने और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। सभी नागरिकों को सरकार और मौसम विभाग द्वारा समय-समय पर जारी अलर्ट पर लगातार नजर रखने को कहा गया है।
दूसरी ओर, बीते 24 घंटों के दौरान भी प्रदेश के कई हिस्सों में मूसलाधार वर्षा दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक, सबसे अधिक 130 मिलीमीटर बारिश कांगड़ा जिले के पालमपुर में रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा मंडी के जोगिंदरनगर में 110 मिलीमीटर, कांगड़ा एयरो स्टेशन पर 100 मिलीमीटर और धर्मशाला AWS में 80 मिलीमीटर वर्षा हुई।
शिमला के रामपुर बुशहर में 50 मिलीमीटर, कांगड़ा के गुलेर तथा चंबा के जोत और चुवाड़ी में 40-40 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। वहीं शिमला के सराहन और कुल्लू के मनाली में 30-30 मिलीमीटर, जबकि मंडी के कटौला, कांगड़ा के नगरोटा सूरियां, कुल्लू के भुंतर एयरो व धर्मशाला में 20-20 मिलीमीटर और कुल्लू के सिओबाग में 10 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है।


















