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रिहायशी इलाके के पास पोल्ट्री फार्म पर Himachal High Court सख्त, कहा-500 मीटर के दायरे में नहीं चला सकते

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Himachal High Court News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पोल्ट्री फार्म को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए साफ कहा है कि फार्म में पाले जाने वाले पक्षियों की संख्या के आधार पर जगह के नियम नहीं बदले जा सकते। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि छोटा हो या बड़ा, किसी भी पोल्ट्री फार्म को रिहायशी इलाके से 500 मीटर के दायरे में चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसी आधार पर कांगड़ा जिले में घरों से महज 50–60 मीटर की दूरी पर चल रहे एक पोल्ट्री फार्म को तुरंत बंद करने का आदेश दिया गया।

चमन लाल बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य, सचिव (पंचायती राज) और अन्य से जुड़े एक मामले कि सुनवाई में हाईकोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत लोगों को स्वच्छ, सुरक्षित और साफ वातावरण में रहने का अधिकार है। इस अधिकार से किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधि के लिए समझौता नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की आजीविका का अधिकार आसपास रहने वाले लोगों के जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार से बड़ा नहीं हो सकता।

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इस मामले की सुनवाई जस्टिस अजय मोहन गोयल ने की। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी आकार के पोल्ट्री फार्म को रिहायशी क्षेत्र से कम से कम 500 मीटर दूर होना चाहिए, ताकि बदबू या किसी तरह का खतरा लोगों को परेशान न करे।

मामले में याचिकाकर्ता एक पूर्व सैनिक है, जिसने रिट याचिका दायर कर पोल्ट्री फार्म के संचालन को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि फार्म रिहायशी घरों और पानी के स्रोतों के बेहद पास है, जिससे बदबू फैल रही है, स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है और पर्यावरण को नुकसान हो रहा है।

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वहीं, फार्म संचालक की ओर से दलील दी गई कि ग्राम पंचायत से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर फार्म स्थापित किया गया है और इसे नियमों के अनुसार चलाया जा रहा है। यह भी कहा गया कि एक समय में 5,000 से अधिक पक्षी नहीं रखे जाते। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि फार्म में करीब 6,000 मुर्गे मौजूद हैं और नजदीकी रिहायशी घर सामने से लगभग 50 मीटर तथा पीछे से 20–30 मीटर की दूरी पर हैं।

निरीक्षण रिपोर्ट में प्रदूषण नियंत्रण की व्यवस्था की कमी और मरे हुए पक्षियों को दफनाने के लिए गड्ढों के अभाव का भी उल्लेख किया गया। कोर्ट ने यह तर्क खारिज कर दिया कि जगह के नियम पक्षियों की संख्या पर निर्भर करते हैं। इन सभी तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए संबंधित अधिकारियों को पोल्ट्री फार्म बंद करने के आदेश दिए।

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