Himachal News: हिमाचल प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने पालमपुर के प्रमुख कारोबारी निशांत कुमार शर्मा को एक औपचारिक नोटिस जारी करते हुए सुरक्षा पर हुए कुल 68,60,502 रुपये के खर्च को सरकारी खाते में जमा करने के सख्त निर्देश दिए हैं। विभाग ने निशांत शर्मा को इस पूरी राशि का भुगतान करने के लिए 15 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की है।
बता दें कि यह राशि राज्य सरकार और हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा निशांत शर्मा तथा उनके परिवार की सुरक्षा में समय-समय पर तैनात किए गए पुलिसकर्मियों के वेतन एवं अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च की गई थी। जानकारी के अनुसार कारोबारी निशांत शर्मा और उनके परिवार को 16 नवंबर, 2023 से पुलिस सुरक्षा प्रदान की गई थी।

इस अवधि के दौरान हिमाचल प्रदेश पुलिस की अलग-अलग इकाइयों से सुरक्षा बलों के जवानों को उनकी सुरक्षा में तैनात किया जाता रहा। सुरक्षा व्यवस्था पर हुए इस भारी बजटीय खर्च और सुरक्षा को आगे जारी रखने के कानूनी पहलुओं पर विचार करने के लिए पांच अगस्त, 2026 को संयुक्त सुरक्षा समीक्षा समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी।
सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) की अध्यक्षता में संपन्न हुई संयुक्त सुरक्षा समीक्षा समिति की इस बैठक में पूरे मामले का गहन मूल्यांकन किया गया। समिति ने समीक्षा के बाद यह सर्वसम्मति से फैसला सुनाया कि निशांत शर्मा की सुरक्षा पर हुआ पूरा सरकारी खर्च स्वयं निशांत शर्मा से ही वसूला जाएगा। समिति के इसी निर्णय के आधार पर पुलिस मुख्यालय ने अब वसूली का औपचारिक नोटिस जारी कर 15 दिन की मोहलत दी है।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस मुख्यालय द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी में, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (राज्य सीआईडी) ने सुरक्षा में तैनात कर्मियों से संबंधित विभिन्न इकाइयों से विस्तृत खर्च का ब्योरा मांगा था। इसमें पुलिस अधीक्षक कांगड़ा (धर्मशाला) द्वारा उपलब्ध करवाए गए विवरण के अनुसार 37,96,589 रुपये का खर्च आया। वहीं, 1st भारतीय रिजर्व बटालियन (IRBn) सकोह (धर्मशाला) के कमांडेंट द्वारा सौंपे गए आंकड़े में 30,63,913 रुपये का खर्च दर्ज किया गया। इन दोनों खातों की कुल राशि 68,60,502 रुपये तय की गई है।
कारोबारी निशांत शर्मा की सुरक्षा से जुड़ा यह पूरा मामला वर्ष 2023 में काफी हाई-प्रोफाइल और चर्चित रहा था। निशांत शर्मा ने हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट को सीधे एक ईमेल भेजकर राज्य के तत्कालीक पुलिस महानिदेशक (DGP) और एसपी कांगड़ा से अपनी व अपने परिवार की जान को खतरा जताया था। इस पत्र पर संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने राज्य पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट तलब की थी। इसके उपरांत 16 नवंबर, 2023 को पुलिस थाना मैक्लोडगंज में दर्ज एफआईआर के बाद सुरक्षा और जांच का मामला हाई कोर्ट तक पहुंच गया था।
कानूनी प्रक्रिया के तहत दिसंबर 2023 में हाई कोर्ट ने तत्कालीन डीजीपी संजय कुंडू और कांगड़ा की तत्कालीन एसपी शालिनी अग्निहोत्री को उनके पदों से स्थानांतरित करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, बाद में जनवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने डीजीपी को पद से हटाने संबंधी हाई कोर्ट के निर्देशों को दरकिनार कर दिया था। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को आईजी स्तर के अधिकारियों की एसआईटी गठित करने तथा खतरे के निष्पक्ष आकलन के आधार पर सुरक्षा देने के आदेश दिए थे। लगभग पौने तीन साल तक चली इस सुरक्षा का कुल खर्च 68.60 लाख रुपये दर्ज किया गया है।


















