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Himachal Political Controversy: विमल नेगी मौत और पेखूबेला प्रोजेक्ट पर जयराम ने सुक्खू सरकार के खिलाफ किए गंभीर दावे

Himachal Political Controversy: विमल नेगी मौत और पेखूबेला प्रोजेक्ट पर जयराम ने सुक्खू सरकार के खिलाफ किए गंभीर दावे

Himachal Political Controversy: हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPPCL) के चीफ इंजीनियर विमल नेगी की संदिग्ध मौत (Vimal Negi Death Case) का मामला अब सियासी तूल पकड़ चुका है। हिमाचल हाईकोर्ट द्वारा विमल नेगी मौत मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद यह बात सामने निकल कर आ रही है कि प्रदेश अब भ्रष्टाचार, प्रशासनिक लापरवाही, और सियासी विवाद का प्रतीक बन चुका है।

दरअसल, रविवार को एक नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शिमला में एक पत्रकार वार्ता कर प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और प्रशासनिक अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने पेखूबेला सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार और विमल नेगी की मौत के बीच संबंध का दावा किया है। ठाकुर ने इस मामले में निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग की है, जबकि सुक्खू सरकार पर मामले को दबाने और सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप लगाया है।

पेखूबेला सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट में बड़े भ्रष्टाचार का आरोप

जयराम ठाकुर ने दावा किया कि विमल नेगी पर पेखूबेला सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट (Pekhubela Solar Power Project) के लिए कंपलीशन सर्टिफिकेट जारी करने का दबाव बनाया गया था। इस प्रोजेक्ट में देरी के कारण नियमों के अनुसार 10% लिक्विडेशन डैमेज के रूप में 22 करोड़ रुपये वसूलने थे। इसके बजाय, सरकार ने निर्माण कंपनी को 13 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। ठाकुर ने इसे भ्रष्टाचार का स्पष्ट उदाहरण बताया और कहा कि यह राशि जनता के हितों के खिलाफ दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए विमल नेगी की मौत को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की जा रही है।

पुलिस और प्रशासन पर खड़े किये सवाल

जयराम ठाकुर ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों के बीच अंतर्कलह खुलकर सामने आ चुकी है। डीजीपी द्वारा मांगी गई जांच रिपोर्ट शिमला के पुलिस अधीक्षक (एसपी) संजीव गांधी ने उपलब्ध नहीं कराई। इसके चलते डीजीपी को हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल करना पड़ा।

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जयराम ठाकुर ने यह भी दावा किया कि विमल नेगी के शव के पास मिली एक पेन ड्राइव को पहले रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया गया और बाद में उसे फॉर्मेट कर दिया गया। उन्होंने इसे सबूतों के साथ छेड़छाड़ का गंभीर मामला बताया और कहा कि यह बिना सरकारी हस्तक्षेप के संभव नहीं है। उन्होंने

हाईकोर्ट में अनुशासनहीनता पर दागे सवाल 

जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान शिमला के एसपी संजीव गांधी और डीजीपी के बीच मतभेद सामने आए। कोर्ट ने एसपी की अनुशासनहीनता पर फटकार लगाई और कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मतभेद कोर्ट में नहीं लाए जाने चाहिए।

ठाकुर ने इसे हिमाचल के इतिहास में अभूतपूर्व बताया और कहा कि सरकार ने एसपी को अत्यधिक शक्तियां दी हैं, जिसके चलते वे डीजीपी और कोर्ट के खिलाफ भी बोल रहे हैं। इसके अलावा, एडवोकेट जनरल अनूप रतन पर भी कोर्ट के फैसले के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए अवमानना का आरोप लगाया गया।

सीबीआई जांच की मांग करते हुए सीएम सुक्खू पर साधा निशाना

जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से इस मामले में नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा कि सुक्खू ने विधानसभा में दावा किया था कि विमल नेगी के परिवार को पुलिस जांच पर भरोसा है, लेकिन परिवार शुरू से ही सीबीआई जांच की मांग कर रहा है।

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ठाकुर ने इसे मुख्यमंत्री का झूठ करार दिया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए सीबीआई जांच (CBI investigation) से बच रही है। हाईकोर्ट ने 23 मई 2025 को इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी और निर्देश दिया कि हिमाचल कैडर के किसी भी अधिकारी को जांच में शामिल न किया जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

पेन ड्राइव विवाद में एएसआई पंकज निलंबन

जयराम ठाकुर ने कहा कि विमल नेगी के शव के पास मिली पेन ड्राइव के फॉर्मेट होने का मामला भी चर्चा में है। शिमला पुलिस के सहायक पुलिस निरीक्षक (एएसआई) पंकज को इस मामले में पेन ड्राइव छिपाने और फॉर्मेट करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है।

डीजीपी की हिमाचल हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में इसकी पुष्टि हुई है, जिसके बाद पुलिस विभाग ने विभागीय जांच शुरू की है। ठाकुर ने इस घटना को सबूत नष्ट करने का प्रयास बताया और कहा कि इसकी गहन जांच होनी चाहिए। और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

परिवार सुक्खू सरकार की जांच से नहीं था संतुष्ट  

नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि विमल नेगी के परिजन सरकार की ओर की जाने वाली जांच से  न्याय मिलने के लिए सहमत नहीं थे। इसलिए उनकी पत्नी किरण नेगी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई जांच की मांग की थी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस कई बार इस मामले में झूठे बयान दिए परिवार वाले जाँच से संतुष्ट है।

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उन्होंने आरोप लगाया कि विमल नेगी को पिछले छह महीनों से वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। उन्हें देर रात तक काम करने और गलत कामों के लिए दबाव डाला जाता था। 19 मार्च 2025 को परिवार और HPPCL कर्मचारियों ने शिमला में कार्यालय के बाहर शव के साथ प्रदर्शन किया और निष्पक्ष जांच की मांग की। कर्मचारियों ने भी प्रबंधन के खिलाफ पत्र लिखकर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा सत्र में कहा कि सरकार इस मामले में निष्पक्ष जांच कर रही है। एक अधिकारी को निलंबित किया गया है और दूसरे को छुट्टी पर भेजा गया है। उन्होंने विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि परिवार सरकार की जांच से संतुष्ट है। हालांकि, ठाकुर ने इसे गलत बताया और कहा कि परिवार लगातार सीबीआई जांच की मांग कर रहा है।

 

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