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Highest Krishna Temple: हिमाचल में है दुनिया का सबसे ऊंचा श्री कृष्ण मंदिर, जहां आस्था और रोमांच का होता है मिलन

Published on: 23 May 2025
Highest Krishna Temple: हिमाचल में श्री कृष्ण मंदिर का दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर, जहां आस्था और रोमांच का होता है मिलन

World Highest Krishna Temple: हिमाचल प्रदेश, भारत का वो खूबसूरत राज्य, जो हर तरह के यात्री के दिल में बस जाता है। चाहे आप प्रकृति के दीवाने हों, रोमांच के शौकीन हों या फिर आध्यात्मिक शांति की तलाश में हों, हिमाचल में हर किसी के लिए कुछ खास है।

अगर आपकी रुचि आस्था और रोमांच में है, तो किन्नौर जिले में स्थित श्री कृष्ण मंदिर आपके लिए एकदम परफेक्ट डेस्टिनेशन है। यह मंदिर, जिसे दुनिया का सबसे ऊंचा श्री कृष्ण मंदिर माना जाता है, समुद्र तल से 3,895 मीटर (12,780 फीट) की ऊंचाई पर निचार तहसील के युल्ला कांडा में बसा है।

यह मंदिर न सिर्फ आध्यात्मिक महत्व रखता है, बल्कि ट्रेकिंग और प्रकृति के बीच समय बिताने का शानदार मौका भी देता है। समुद्र तल से 3,895 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर दुनिया का सबसे ऊंचा श्री कृष्ण मंदिर है। आइए, इस पवित्र और खूबसूरत जगह के बारे में विस्तार से जानते हैं।

World Highest Krishna Temple: मंदिर से जुडी है ये आस्था 

युल्ला कांडा का श्री कृष्ण मंदिर एक पवित्र झील के बीच में स्थित है, जिसे स्थानीय लोग पांडवों से जोड़ते हैं। मान्यता है कि पांडवों ने अपने वनवास के दौरान इस झील का निर्माण किया था और इसे भगवान श्री कृष्ण को समर्पित किया। यह मंदिर अपनी ऊंचाई और अनूठी लोकेशन के कारण श्रद्धालुओं के बीच खासा लोकप्रिय है।

हर साल जन्माष्टमी के मौके पर यहां भव्य उत्सव होता है, जिसमें किन्नौर और हिमाचल के दूर-दराज के इलाकों से लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर का शांत और पवित्र वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक सुकून देता है, जबकि आसपास की प्राकृतिक सुंदरता मन को मोह लेती है।Highest Krishna Temple: हिमाचल में श्री कृष्ण मंदिर का दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर, जहां आस्था और रोमांच का होता है मिलन

World Highest Krishna Temple: आस्था के साथ ट्रेकिंग का रोमांच

इस मंदिर तक पहुंचने का सफर अपने आप में एक रोमांचक अनुभव है। यात्रा की शुरुआत युल्ला खास गांव से होती है, जो किन्नौर के रिकांग पिओ से करीब 35 किलोमीटर दूर है। यहां से मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 12 किलोमीटर का ट्रेक करना पड़ता है।

यह ट्रेक मध्यम कठिनाई का है, जो घने जंगलों, हरे-भरे घास के मैदानों और ऊंचे पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरता है। रास्ते में आपको हिमालय की खूबसूरती, बर्फीले पहाड़ और शांत वादियां देखने को मिलेंगी।

ट्रेकिंग के लिए सबसे अच्छा समय मई से अक्टूबर के बीच है, जब मौसम सुहावना रहता है और रास्ते खुले रहते हैं। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण यह ट्रेक मुश्किल हो सकता है।

अगर आप वैकल्पिक रास्ते चुनना चाहें, तो काशांग दर्रा या लिस्टिगरंग दर्रा से भी मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। ये रास्ते थोड़े चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन प्रकृति प्रेमियों और ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए यह एक अविस्मरणीय अनुभव होता है।

कैसे पहुंचें युल्ला कांडा?

सबसे पहले आपको सड़क, रेल मार्ग या हवाई मार्ग से शिमला पहुंचना होगा। शिमला से रिकांगपिओ (किन्नौर का मुख्यालय) के लिए बस या टैक्सी (लगभग 220 किमी) लें। रिकांगपिओ से उरनी गांव (12-15 किमी) और फिर उरनी से युल्ला खास गांव तक 3 किमी की चढ़ाई है। यहीं से ट्रेक शुरू होता है।

जन्माष्टमी का उत्सव

युल्ला कांडा का श्री कृष्ण मंदिर जन्माष्टमी के दौरान जीवंत हो उठता है। इस दौरान मंदिर को सजाया जाता है, और किन्नौर के साथ-साथ हिमाचल के अन्य हिस्सों से हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना और स्थानीय संस्कृति की झलक इस उत्सव को और खास बनाती है। मंदिर तक की यात्रा और उत्सव में शामिल होना न सिर्फ आध्यात्मिक अनुभव देता है, बल्कि स्थानीय किन्नौरी संस्कृति को करीब से जानने का मौका भी देता है।

युल्ला कांडा का श्री कृष्ण मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी जगह है जहां आस्था और प्रकृति का अनूठा संगम देखने को मिलता है। इस मंदिर तक की यात्रा आपको हिमालय की गोद में ले जाती है, जहां शांत वादियां, बर्फीले पहाड़ और पवित्र झील आपके मन को सुकून देती हैं। चाहे आप भगवान श्री कृष्ण के भक्त हों या ट्रेकिंग के शौकीन, यह जगह आपके लिए एक यादगार अनुभव होगी।

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