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हर दिन सिर्फ 375 भक्तों को ही मिलेंगे भोलेनाथ के दर्शन, किन्नौर कैलाश यात्रा की तारीख तय, जानें नई गाइडलाइंस

Kinnaur Kailash Tracking Registration: हिमाचल प्रदेश की सबसे दुर्गम और पवित्र धार्मिक यात्राओं में शामिल किन्नौर कैलाश यात्रा आगामी 1 जुलाई से शुरू होने जा रही है, जिसको लेकर प्रशासन ने पंजीकरण और सुरक्षा से जुड़े नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
Published on: 13 June 2026
Kinnaur Kailash Yatra 2026 Date And Guidelines: हर दिन सिर्फ 375 भक्तों को ही मिलेंगे भोलेनाथ के दर्शन, किन्नौर कैलाश यात्रा की तारीख तय, जानें नई गाइडलाइंस

Kinnaur Kailash Yatra 2026: हिमाचल प्रदेश की सबसे दुर्गम और पवित्र तीर्थ यात्राओं में से एक ‘किन्नौर कैलाश यात्रा’ को लेकर पिछले कई दिनों से चल रही अटकलों और संशय पर आखिरकार विराम लग गया है। समुद्रतल से लगभग 19,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित इस पावन धाम की यात्रा इस वर्ष 1 जुलाई से आधिकारिक तौर पर शुरू होने जा रही है।

शुक्रवार को सरकार और स्थानीय प्रशासन के बीच हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में इस यात्रा की तारीखों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, जिसके बाद अब शिव भक्तों में उत्साह की लहर है।आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, भगवान शिव के इस प्राकृतिक स्वरूप के दर्शन के लिए यह यात्रा 1 जुलाई से शुरू होकर 30 जुलाई तक संचालित की जाएगी।

दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यात्रा पर जाने वाले सभी श्रद्धालुओं का पंजीकरण पोवारी बेस कैंप में किया जाएगा। इस बेस कैंप पर श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य और शारीरिक क्षमता की बारीकी से जांच की जाएगी। चिकित्सा टीम द्वारा फिटनेस प्रमाण पत्र जारी किए जाने और पंजीकरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही किसी भी श्रद्धालु को आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी।

उच्च हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस बार प्रशासन ने प्रतिदिन जाने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या को भी सीमित कर दिया है। नए नियमों के तहत अब एक दिन में केवल 375 श्रद्धालुओं को ही किन्नौर कैलाश यात्रा पर जाने की इजाजत दी जाएगी। किन्नौर कैलाश यात्रा को सुचारू रूप से चलाने और विभिन्न व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने के लिए शुक्रवार को बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें इन सभी कड़े नियमों को लागू करने की मंजूरी दी गई।

इस बैठक में पर्यावरण और स्थानीय संस्कृति के संरक्षण पर भी विशेष बल दिया गया। बागवानी मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यात्रा मार्ग और पवित्र स्थल के आसपास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए। इसके साथ ही, स्थानीय परंपराओं को बनाए रखने के लिए इस बार देव सभाएं भी यात्रा की पूरी व्यवस्था पर नजर रख सकेंगी और इसकी निगरानी कर सकेंगी। जिला प्रशासन की ओर से देव सभाओं को निगरानी कार्य को सुगम बनाने के लिए आवश्यक सुविधाएं और सहयोग भी प्रदान किया जाएगा।

सुरक्षा के लिहाज से इस बार यात्रा में शामिल होने वाले गाइडों के लिए भी सख्त नियम बनाए गए हैं। अब किसी भी गाइड को यात्रा दल के साथ जाने से पहले प्रशासन के पास अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रशासन की ओर से उन्हें आधिकारिक पहचान पत्र जारी किए जाएंगे।

बैठक में यह साफ कर दिया गया है कि केवल आईडी कार्ड प्राप्त गाइड ही इस पूरी यात्रा अवधि के दौरान श्रद्धालुओं के साथ काम कर पाएंगे, जिससे अवैध रूप से ट्रैकिंग कराने वालों पर लगाम कसी जा सकेगी। बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि किन्नौर कैलाश यात्रा के प्रति देश-विदेश के श्रद्धालुओं की अत्यधिक आस्था है।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस धार्मिक यात्रा के सफल संचालन से स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार के साधन उपलब्ध होते हैं और क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलता है। जनहित और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए ही सरकार ने इस यात्रा को सुचारू रूप से जारी रखने का अहम फैसला लिया है। देव सभाओं द्वारा पहले जताई गई विभिन्न आपत्तियों को भी दूर करने के लिए एक विस्तृत एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) तैयार की गई है।

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