Una Accident: हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में एक बार फिर मानसूनी बारिश का कहर देखने को मिला है। उपमंडल अंब की ग्राम पंचायत टकारला में सोमवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। सादा दा चौ नाले में भारी बारिश के कारण अचानक जलस्तर बढ़ गया, जिसकी वजह से एक कार पानी के तेज बहाव में बह गई। हालांकि, कार में सवार एक ही परिवार के चार सदस्य समय रहते सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे, जिससे एक बड़ी जनहानि होने से बच गई।
घटना के संबंध में जानकारी देते हुए कार चालक विनोद कुमार ने बताया कि वह अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ पीजीआई चंडीगढ़ जा रहे थे। जब वे टकारला पहुंचे, तो उस समय नाले में पानी का स्तर कम दिखाई दे रहा था। स्थिति को देखते हुए उन्होंने कार को नाला पार कराने का प्रयास किया। हालांकि, नाले की सतह पर जमी गाद के कारण कार बीच रास्ते में ही फंस गई और आगे नहीं बढ़ सकी।

कार के फंसने के कुछ ही क्षणों के भीतर नाले में अचानक जलस्तर काफी बढ़ गया। पानी का बहाव इतना तेज था कि वह कार को अपने साथ बहाकर ले गया। कार कुछ दूरी पर जाकर नाले के बीच में मौजूद एक पेड़ से टकराकर रुक गई। खतरा बढ़ता देख विनोद कुमार ने सूझबूझ का परिचय दिया और तत्परता दिखाते हुए सबसे पहले दोनों बच्चों को कार की खिड़की से बाहर निकाला। बच्चों को कार की छत के रास्ते पेड़ का सहारा देकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। इसके बाद विनोद और उनकी पत्नी भी किसी तरह कार से बाहर निकलने में सफल रहे।
घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय लोग मौके पर एकत्र हो गए। ग्रामीणों ने तुरंत हाइड्रा मशीन की व्यवस्था की और काफी मशक्कत के बाद कार को नाले से बाहर निकाला। तब तक कार के भीतर भारी मात्रा में रेत और गाद भर चुकी थी। साथ ही इंजन में पानी घुस जाने के कारण वाहन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। चालक विनोद कुमार के अनुसार इस हादसे में उन्हें लगभग दो लाख रुपये के वित्तीय नुकसान का अनुमान है।
इस हादसे के बाद स्थानीय निवासियों में प्रशासन के प्रति गहरा असंतोष देखा जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से सादा दा चौ नाले पर जल्द से जल्द एक स्थायी पुल निर्माण की मांग की है। क्षेत्र के निवासियों रोहित कुमार, दविंदर कुमार, संजीव कुमार, नरेश कुमार, अश्वनी और मोहित कुमार ने बताया कि नाले पर वर्तमान में बना काजवे (स्लैब) हर बरसात में पानी में पूरी तरह डूब जाता है। इससे न केवल लोगों की आवाजाही बाधित होती है, बल्कि इस प्रकार के जानलेवा हादसों का खतरा भी बना रहता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह मार्ग केवल स्थानीय लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि करीब 10 पंचायतों की आबादी के लिए मुख्य संपर्क मार्ग है। इसके अलावा, धर्मशाला, कांगड़ा और देहरा की ओर आने-जाने वाले सैकड़ों वाहन चालकों के लिए भी यह रास्ता बेहद महत्वपूर्ण है। बरसात के मौसम में नाला उफान पर आने से पूरा संपर्क मार्ग टूट जाता है। इसके चलते लोगों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए लंबा वैकल्पिक रास्ता तय करना पड़ता है, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।


















