Himachal News: हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ ने सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से संबद्ध करने के सरकार के फैसले का स्वागत किया है। हालांकि संघ ने प्रवक्ताओं की नई परीक्षा करवाने के प्रस्ताव को उचित नहीं बताया है। संघ का कहना है कि स्कूल प्रवक्ता पहले ही कर्मचारी चयन आयोग और लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयनित होकर सेवा में आए हैं, ऐसे में सीबीएसई स्कूलों के लिए अलग से परीक्षा करवाने का कोई औचित्य नहीं बनता।
संघ ने सरकार से इस विषय में व्यावहारिक समाधान निकालने की मांग की है। संघ के राज्य अध्यक्ष अजय नेगी, राज्य महासचिव इंद्र सिंह ठाकुर, मुख्य संरक्षक लोकेंद्र नेगी, मुख्य मार्गदर्शक राजेश सैनी, चेयरमैन सुरेंद्र पुंडीर, कार्यकारी अध्यक्ष दीप सिंह खन्ना और वाइस चेयरमैन राकेश भारद्वाज ने जारी बयान में कहा कि नई परीक्षा की बजाय व्यवस्थित प्रशिक्षण कार्यक्रम बेहतर विकल्प हो सकता है। उनके अनुसार प्रशिक्षण के माध्यम से प्रवक्ता सीबीएसई प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू करने में पूरी तरह सक्षम हैं।
संघ ने मांग की है कि जिन विद्यालयों को सीबीएसई से जोड़ा जा रहा है, वहां वर्तमान में कार्यरत प्रवक्ताओं को प्राथमिकता के आधार पर समायोजित किया जाए। यदि कोई प्रवक्ता स्वेच्छा से सीबीएसई स्कूल में कार्य नहीं करना चाहता, तो अन्य प्रवक्ताओं से सहमति ली जा सकती है। लेकिन नई परीक्षा या अलग कैडर बनाने की प्रक्रिया न तो व्यावहारिक है और न ही न्यायसंगत।
इस मुद्दे पर जिला स्तर पर भी प्रवक्ता संघ को समर्थन मिला है। कुल्लू से राजपाल ठाकुर, बिलासपुर से नरेश ठाकुर, मंडी से देवेंद्र शर्मा, शिमला से देवेंद्र लाकटू, कांगड़ा से सिकंदर मिन्हास, सोलन से जय लाल, सिरमौर से डॉ. ईश्वर दास राही, ऊना से शशि सैनी, हमीरपुर से गौतम सिंह, किन्नौर से अजय नेगी, लाहुल स्पीति से विवेक भारद्वाज और चंबा से राजेश ठाकुर ने कहा कि किसी भी शिक्षा सुधार में शिक्षकों के अनुभव, सम्मान और समानता का ध्यान रखा जाना चाहिए।
क्या है सरकारी स्कूलों को CBSE से जोड़ने और प्रवक्ताओं की नई परीक्षा का मामला ?
दरअसल, हिमाचल प्रदेश सरकार शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठा रही है। सरकार ने पहले चरण में 100 से बढ़ाकर अब 125 के करीब सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूलों को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से संबद्ध करने का फैसला किया है।
नए शैक्षणिक सत्र (2026) से इन स्कूलों में CBSE का पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। इसका मकसद छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा देना है, ताकि वे JEE, NEET, NDA जैसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी कर सकें। साथ ही, सरकारी स्कूलों की छवि सुधारना और प्राइवेट CBSE स्कूलों की तरह सुविधाएं देना भी लक्ष्य है।
इन CBSE स्कूलों में पढ़ाने के लिए सरकार शिक्षकों और प्रवक्ताओं का अलग सब-कैडर बना रही है। सरकार का कहना है कि CBSE के मानकों को पूरा करने के लिए शिक्षकों की विषय में गहरी समझ और क्षमता चाहिए। इसलिए, इन स्कूलों में तैनाती के लिए लिखित परीक्षा और इंटरव्यू लिया जाएगा। परीक्षा पास करने वालों को ही इन स्कूलों में जगह मिलेगी।
कुछ मामलों में NET/SET पास होना या सेवा के वर्षों की शर्त भी रखी गई है। कैबिनेट ने इस सब-कैडर को मंजूरी दे दी है और नए शिक्षक पद भी बनाए गए हैं (जैसे अंग्रेजी और गणित के लिए स्पेशल टीचर)। हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ ने CBSE संबद्धता का स्वागत किया है, लेकिन नई परीक्षा और अलग कैडर का जोरदार विरोध किया है।
















