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ललिता वकील की वर्षों की मेहनत से हिमाचल की प्रथम पदमश्री महिला होने का सम्मान चंबा जिला के नाम हुआ

ललिता वकील को मिलेगा पद्मश्री अवॉर्ड

प्रजासत्ता।
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पदम पुरस्कारों की घोषणा होते ही जिला चंबा की समाजसेवी महिला ललिता वकील को यह सम्मान दिए जाने की जानकारी सामने आई। इसके साथ ही हिमाचल की प्रथम पदमश्री महिला होने का सम्मान चंबा के नाम हुआ है। यह हिमाचल और चंबा जिला के लिए गर्व की बात है। चंबा रुमाल को नई बुलंदियों पर पहुंचाने वाली ललिता वकील को इससे पहले भी दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया है। वह चंबा शहर के चोंतडा मोहल्ला की रहने वाली हैं।

बता दें कि चंबा के रुमाल को नई बुलंदियों पर पहुंचाने का श्रेय चंबा की ललिता वकील को ही जाता है। 50 वर्षों की मेहनत का ही नतीजा है कि उन्हें 2018 में नारी शक्ति पुरस्कार से नवाजा गया था।
ललिता को 1993 में तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा से राष्ट्रीय पुरस्कार नवाजा था। 2012 में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शिल्प गुरु सम्मान दिया। ये सम्मान पाने वाली ललिता इकलौती हिमाचली हस्तशिल्पी हैं। 2017 में महिला एवं बाल विकास विभाग के सौजन्य से मेनका गांधी ने अंतरराष्ट्रीय क्राफ्ट अवार्ड महिला गुरु के तौर पर दिया।

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ललिता वकील चंबा रुमाल की कला को आने वाली पीढ़ियों को भी रूबरू करवाने के लिए वह अपने घर में निशुल्क लड़कियों को कला की बारीकियां सिखाती हैं। उन्होंने पद्मश्री पुरस्कार के लिए ऑनलाइन आवेदन किया। चंबा का रुमाल अद्भुत कला और शानदार कशीदाकारी के कारण देश के अलावा विदेशी में भी लोकप्रिय है। चंबा रुमाल की कारीगरी मलमल, सिल्क और कॉटन के कपड़ों पर की जाती है। रुमाल पर कढ़ाई ऐसी होती है कि दोनों तरफ एक जैसी कढ़ाई बनकर उभरती है।

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