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मुख्यमंत्री ने एफसीए मामलों की स्वीकृतियों के लिए प्रभावी प्रणाली विकसित करने पर बल दिया

Published on: 28 January 2023
मुख्यमंत्री ने एफसीए मामलों की स्वीकृतियों के लिए प्रभावी प्रणाली विकसित करने पर बल दिया

-लोक निर्माण और अन्य निष्पादन एजेंसियां करेंगी वन विभाग से सम्बंधित सभी निर्माण कार्य
शिमला|
ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए) के तहत प्रदान की जाने वाली स्वीकृतियों के विलम्ब पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एफसीए मामलों में तेजी लाने के लिए एक प्रभावी प्रणाली विकसित करने पर विशेष बल दिया जाना चाहिए ताकि राज्य में विकासात्मक परियोजनाओं पर काम शीघ्र शुरू हो और वह निर्धारित समयावधि में पूर्ण की जा सकें।

ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शुक्रवार सायं यहां वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि चिकित्सा महाविद्यालयों, पर्यटन परियोजनाओं, शैक्षणिक संस्थानों, सड़कों और इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशनों के निर्माण सहित अन्य मामलों में एफसीए मंजूरी के लिए समय सीमा का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों को एफसीए की समयबद्ध मंजूरी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए ताकि विकासात्मक परियोजनाओं को निर्धारित समय पर पूरा किया जा सके, जिससे प्रदेश के अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार विकास और पर्यावरण संरक्षण में संतुलित दृष्टिकोण अपना कर राज्य में विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं का कार्यान्वयन सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा कि एफसीए मंजूरी में अनावश्यक विलम्ब नहीं होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को इस प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां एफसीए आवश्यक है, वहां सम्बन्धित विभाग एक नोडल अधिकारी नियुक्त करेगा, जबकि सम्बन्धित मण्डल के डीएफओ परियोजनाओं के विलम्ब से बचने के लिए समयबद्ध तरीके से सहयोग करना सुनिश्चित करेंगे।

प्रतिपूरक वनीकरण कोष प्रबन्धन और योजना प्राधिकरण कैम्पा की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री को अवगत करवाया गया कि 22 फरवरी, 2019 तक की हिमाचल प्रदेश की 1,660 करोड़ रुपए की हिस्सेदारी राष्ट्रीय प्राधिकरण के पब्लिक अकाऊंट से प्रदेश प्राधिकरण के पब्लिक अकाऊंट में हस्तातंरित की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कैम्पा के तहत ऊर्जा बचत क्षेत्र पर धनराशि व्यय की जानी चाहिए। उन्होंने राज्य प्राधिकरण को शासी निकाय की बैठक शीघ्र बुलाने के निर्देश दिए।

उन्होंने भविष्य में वन विभाग के सभी निर्माण कार्यों को लोक निर्माण विभाग तथा अन्य निष्पादन एजेंसियों के माध्यम से करवाने के निर्देश दिए।
पर्यावरण संरक्षण पर विशेष बल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन चिंता का विषय है इसलिए वन विभाग को पौधारोपण पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बैठक में अवगत करवाया गया कि वन विभाग ने प्रथम चरण में राज्य में 15 स्थान चिन्ह्ति किए हैं जहां 256.50 हेक्टेयर भूमि पर पौधरोपण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण स्थल की ऊंचाई के अनुसार किया जाए ताकि अधिक से अधिक पौधों की जीवित्ता दर बढ़े और उन्होंने भविष्य में पौधरोपण के लिए अधिक स्थान चिन्ह्ति करने के निर्देश देते हुए कहा कि वन विभाग पौधरोपण स्थलों की निरंतर निगरानी भी सुनिश्चित करे।

इस अवसर पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरूद्ध सिंह, प्रधान सचिव ओंकार शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव भरत खेड़ा, प्रधान सचिव देवेश कुमार, प्रधान सचिव विधि राजीव भारद्वाज, मुख्यमंत्री के ओएसडी गोपाल शर्मा, विशेष सचिव सीपी वर्मा, पीसीसी (हॉफ) अजय श्रीवास्तव, पीसीसीएफ (वन्य जीव) राजीव कुमार, मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैम्पा नागेश कुमार, एपीसीसीएफ (वित्त) एसके कापटा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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