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शिक्षकों की भर्ती को लेकर सीएम और मंत्री के बयानों में विरोधाभास, आखिर कौन फैला रहा भ्रम, मंत्री या मीडिया…?

शिक्षकों की भर्ती को लेकर सीएम और मंत्री के बयानों में विरोधभास, आखिर कौन फैला रहा भ्रम, मंत्री या मीडिया...?

प्रजासत्ता ब्यूरो|
बीते दिन उद्योग मंत्री के बयान के आधार मीडिया में अस्थाई तौर पर शिक्षकों की भर्ती की ख़बरें लगभग सभी मीडिया संस्थानों ने प्रकाशित की लेकिन गुरुवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की और से एक वीडियो जारी कर कहा गया कि प्रदेश में शिक्षकों की अस्थाई भर्ती नहीं की जाएगी। अखबारों और मीडिया के माध्यम से भ्रामक खबरें छापी गई हैं। प्रदेश सरकार जब भी शिक्षकों की भर्ती करेगी तो यह सिर्फ और सिर्फ लोक सेवा आयोग के माध्यम से ही की जाएगी।

उन्होंने कहा कि दुर्गम, दूरदराज के क्षेत्रों में अस्थायी भर्ती होंगे 3,104 जेबीटी, टीजीटी और शास्त्री शिक्षक बैकडोर से कोई भी भर्ती नहीं की जाएगी। प्रदेश सरकार ने कमेटी बनाई है और उससे शिक्षकों के खाली पदों की जानकारी मांगी गई है। प्रदेश सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रही है और आगे भी यह क्रम जारी रहेगा।

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लेकिन इस बयान के बाद मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर मीडिया को गलत खबर प्रकाशित करने के लिए जिम्मेवार ठहराया है। हालांकि उन्ही के मंत्री की तरफ से यह बयान मीडिया के समाने दिया गया कि अस्थाई तौर पर भर्ती होंगी और कुछ समय के लिए यह भर्ती होगी हालांकि उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि इसके लिए कैबिनेट में मंजूरी ली जाएगी। लेकिन उद्योग मंत्री के उस वीडियो में खुद कहा कि भर्ती शिक्षा निदेशक या उप शिक्षा निदेशक के मध्यम और जिलाधिकारी और अन्य की मौजूदगी में होगी। मीडिया के माध्यम से उन्ही के बयान पर ख़बरें प्रकाशित हुई।

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इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर सरकार की काफी आलोचना भी हुई है। हालांकि अब मुख्यमंत्री की तरफ से गलत खबर का ठिकरा मीडिया के सर पर फोड़ दिया है। आखिर बड़ा सवाल यही है कि मंत्री के बयानों के आधार पर खबरे बनाने वाली मीडिया भ्रम फैला रही है या भ्रमक जानकारी देकर सरकार के मंत्री। शिक्षकों की भर्ती को लेकर सीएम और मंत्री के बयानों में विरोधभास है। मीडिया की आलोचना से पहले यह तय क्यों नही किया जाता कि आखिर मीडिया में क्या बयान देना है। पहले मंत्री बोले अस्थाई तौर पर होगी भर्ती, जबाब में सीएम बोले, नही होगी कोई अस्थाई भर्ती, मीडिया फैला रही भ्रम…. जिस तरह से बीते दिनों से सरकार को तरफ से कई मुद्दों को लेकर निर्णय,और बयानबाजी हो रही है उससे लगता है कि सरकार की स्थिति हास्यास्पद हो गई है।

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