Yula Kanda Bhajan Kirtan Video Viral: दुनिया के सबसे ऊंचे भगवान श्रीकृष्ण मंदिर, यूला कांडा का एक वीडियो नए साल के पहले दिन से सोशल मीडिया पर खूब देखा जा रहा है। बता दें कि यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में लगभग 13,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।
इस वायरल वीडियो में मंदिर परिसर में कुछ युवाओं को लाउडस्पीकर और डीजे उपकरणों के साथ भजन कीर्तन करते देखा जा सकता है, जहाँ ‘मेरो प्यारो वृंदावन’ के भजन की गूंज सुनाई दे रही है। हालाँकि यह दृश्य कुछ दिन पुराना है, लेकिन इसकी चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। वीडियो में युवा माइनस 7 डिग्री तापमान में सामान्य कपड़ों में भजन गाते नज़र आ रहे हैं।
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इस आयोजन ने सोशल मीडिया पर एक बहस को जन्म दे दिया है। कई लोगों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि यह कार्यक्रम पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील इलाके और वन्यजीव अभयारण्य में ‘शोर प्रदूषण’ फैला रहा है।
एक यूजर ने लिखा, “पूरा क्षेत्र वन्यजीवों और जंगली जानवरों के लिए एक सुरक्षित स्थान है। इस शोर से उन्हें कितनी परेशानी हो रही होगी।” उनका तर्क है कि ऐसे इलाके में इतनी तेज आवाज़ का उपकरण इस्तेमाल करना उचित नहीं है।
वहीं दूसरी ओर, कई लोग इस आयोजन के पक्ष में भी हैं। उनका कहना है कि जब तक मंदिर परिसर में सफाई का ध्यान रखा जा रहा है और कचरा नहीं फैलाया जा रहा, तब तक भक्ति के इस ज़ोश में कुछ गलत नहीं है। एक समर्थक यूजर ने लिखा, “लोगों को इतनी समस्या क्यों है? मंदिर के अंदर ही तो कर रहे हैं।”
जैसे इस वीडियो पर लोग आपत्ति उठा रहे हैं तो वहीं कुछ लोग इस कार्यक्रम के समर्थन में हैं, इसीलिए सोशल मीडिया पर इस वायरल वीडियो को लेकर बहस छिड़ गई है। दरअसल, आपत्ति जताने वाले लोगों का कहना है कि इस कार्यक्रम से सुरक्षित वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में नॉइज पॉल्यूशन किया गया है।
गौरतलब है कि यूला कांडा मंदिर हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित है। यह दुनिया का सबसे ऊंचाई पर बना श्रीकृष्ण मंदिर माना जाता है। यह जगह रोरा घाटी में पड़ती है और ट्रेकिंग के लिए भी प्रसिद्ध है। मंदिर तक पहुंचने के लिए युल्ला खास गांव से करीब 12-15 किलोमीटर का पैदल ट्रेक करना पड़ता है। रास्ते में घने जंगल, घास के मैदान और हिमालय की चोटियां नजर आती हैं।
मान्यता है कि महाभारत काल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान इस झील और मंदिर का निर्माण करवाया था। युधिष्ठिर ने यहां भगवान कृष्ण का ध्यान किया और उन्हें दर्शन मिले। हर साल जन्माष्टमी पर यहां बड़ा मेला लगता है। दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। मंदिर कमेटी रहने-खाने की व्यवस्था करती है। मंदिर के साथ एक झील है जो सर्दियों में बर्फ की तरह जम जाती है।
















