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बेरोजगार अध्यापक संघ 5 सितंबर से ब्लॉक स्तर पर छेड़ेगा हस्ताक्षर अभियान

Published on: 31 August 2021
हिमाचल प्रदेश वेरोजगार अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष श्री निर्मल सिंह धीमान, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजय रत्न, मुख्य संगठन सचिव पुरुषोत्तम दत्त, वित्त सचिव संजीव कुमार, जिला अध्यक्षा ऊना रजनी वाला, जिलाध्यक्ष विलासपुर किशोरी लाल, प्रैस सचिव राज पाल, ललित कुमार, विनोद कुमार, युव राज ने अपने सांझा व्यान में कहा कि यदि एस. एम. सी शिक्षकों की पैरवी होती रही तो कांग्रेस और भाजपा को सदा के लिए सत्ता से वाहर का रास्ता देखना पड़ सकता है। इसके लिए बेरोजगार संघ 5 सितंबर से ब्लाक स्तर पर हस्ताक्षर अभियान छेड़ेगा। इस अभियान के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश का एक लाख बेरोजगार शपथ लेगा कि यदि एस. एम. सी शिक्षको को सरकार का संरक्षण मिलता रहा तो 2022 में कांग्रेस और भाजपा का समर्थन नहीं किया जाएगा। ज्ञात रहे कांग्रेस और भाजपा ने 2001 से 2018 तक 15000 शिक्षक वैकडोर से भर्ती किए जिससे लाखों बेरोजगारों का तथा लाखों विद्यार्थियों की जीवन वर्वाद हो गया है। हम सभ जानते हैं कि वैकडोर भर्ती से शिक्षा की गुणवत्ता भी गिरती है तथा संविधान की अवमानना भी होती है।सरकार का यह कहना सरासर गलत है कि 2555 एस. एम. सी शिक्षक केवल दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं। एक आर. टी. आई से खुलासा हुआ है कि 792 एस. एम. सी स्कूल लैक्चरर में से 582 गैर कबायली क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं। यही नहीं एस. एम. सी शिक्षक हर जिला में तैनात हैं। सरकार जनता को स्पष्ट करे कि सुप्रीम कोर्ट वड़ा है या सरकार। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 17 - 7-2012 को वनाई गई एस. एम. सी पालिसी के तहत की गई एस. एम. सी शिक्षकों की नियुक्तियों को जिस उद्देश्य पूर्ति के लिए की गईं थी उसे सही माना है।यदि उपरोक्त एस. एम. सी पालिसी ठीक है तो उसमें लगाई गई तमाम शर्तों का अनुसरण करना भी अनिवार्य है। इस एस. एम. सी पालिसी की शर्त नं 9 और 10 यह कहती है कि हर साल नया सैलैक्शन प्रासैस होगा और पहले से तैनात एस. एम. सी शिक्षक की सेवाओं को किसी भी सूरत में आगामी शैक्षणिक स्तर के लिए सेवा विस्तार नहीं दिया जा सकता तथा जैसे ही नियमित शिक्षक आएगा उसकी सेवाऐं अपने आप समाप्त हो जाऐंगी। 2013 से लेकर आज तक सरकार ने न तो हर साल सैलैक्शन प्रासैस किया और इसके विपरीत हर साल एक एक साल के लिए 2555 एस. एम. सी शिक्षकों की सेवा में लगातार विस्तार देती आ रही है। इसलिए संविधान को वचाने के लिए बेरोजगार संघ ने संघर्ष का रास्ता अपनाया है।

अनिल शर्मा|फतेहपुर
हिमाचल प्रदेश बेरोजगार अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष निर्मल सिंह धीमान, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजय रत्न, मुख्य संगठन सचिव पुरुषोत्तम दत्त, वित्त सचिव संजीव कुमार, जिला अध्यक्षा ऊना रजनी वाला, जिलाध्यक्ष विलासपुर किशोरी लाल, प्रैस सचिव राज पाल, ललित कुमार, विनोद कुमार, युव राज ने अपने सांझा व्यान में कहा कि यदि एस. एम. सी शिक्षकों की पैरवी होती रही तो कांग्रेस और भाजपा को सदा के लिए सत्ता से बाहर का रास्ता देखना पड़ सकता है। इसके लिए बेरोजगार संघ 5 सितंबर से ब्लाक स्तर पर हस्ताक्षर अभियान छेड़ेगा।

इस अभियान के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश का एक लाख बेरोजगार शपथ लेगा कि यदि एस. एम. सी शिक्षको को सरकार का संरक्षण मिलता रहा तो 2022 में कांग्रेस और भाजपा का समर्थन नहीं किया जाएगा। ज्ञात रहे कांग्रेस और भाजपा ने 2001 से 2018 तक 15000 शिक्षक वैकडोर से भर्ती किए जिससे लाखों बेरोजगारों का तथा लाखों विद्यार्थियों की जीवन वर्वाद हो गया है। हम सभ जानते हैं कि वैकडोर भर्ती से शिक्षा की गुणवत्ता भी गिरती है तथा संविधान की अवमानना भी होती है।

सरकार का यह कहना सरासर गलत है कि 2555 एस. एम. सी शिक्षक केवल दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं। एक आर. टी. आई से खुलासा हुआ है कि 792 एस. एम. सी स्कूल लैक्चरर में से 582 गैर कबायली क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं। यही नहीं एस. एम. सी शिक्षक हर जिला में तैनात हैं। सरकार जनता को स्पष्ट करे कि सुप्रीम कोर्ट वड़ा है या सरकार। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 17 – 7-2012 को वनाई गई एस. एम. सी पालिसी के तहत की गई एस. एम. सी शिक्षकों की नियुक्तियों को जिस उद्देश्य पूर्ति के लिए की गईं थी उसे सही माना है।यदि उपरोक्त एस. एम. सी पालिसी ठीक है तो उसमें लगाई गई तमाम शर्तों का अनुसरण करना भी अनिवार्य है।

इस एस. एम. सी पालिसी की शर्त नं 9 और 10 यह कहती है कि हर साल नया सैलैक्शन प्रासैस होगा और पहले से तैनात एस. एम. सी शिक्षक की सेवाओं को किसी भी सूरत में आगामी शैक्षणिक स्तर के लिए सेवा विस्तार नहीं दिया जा सकता तथा जैसे ही नियमित शिक्षक आएगा उसकी सेवाऐं अपने आप समाप्त हो जाऐंगी। 2013 से लेकर आज तक सरकार ने न तो हर साल सैलैक्शन प्रासैस किया और इसके विपरीत हर साल एक एक साल के लिए 2555 एस. एम. सी शिक्षकों की सेवा में लगातार विस्तार देती आ रही है। इसलिए संविधान को वचाने के लिए बेरोजगार संघ ने संघर्ष का रास्ता अपनाया है।

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