Congress MNREGA Bachao Sangram: कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर ग्रामीण भारत की जीवनरेखा समझी जाने वाली मनरेगा को खत्म करने का गंभीर आरोप लगाते हुए देशव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। पार्टी ने शनिवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ की घोषणा की, जो 8 जनवरी से शुरू होकर 25 फरवरी तक चलेगा।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और जयराम रमेश ने कहा कि यह अभियान पंचायतों से लेकर जिलों तक फैलेगा और नए ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम’ को वापस लेने की मांग करेगा। वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि नया कानून मनरेगा को पूरी तरह समाप्त करने की साजिश है। कोविड जैसे संकटों में मनरेगा ने ग्रामीण गरीबों को सहारा दिया, लेकिन अब केंद्र सबकुछ खुद तय करेगा, जिससे गांवों की जनता प्रभावित होगी।
उन्होंने कहा कि काम के दिनों को 100 से 125 करने का दावा खोखला है, क्योंकि केंद्र का फंडिंग हिस्सा 90% से घटाकर 60% कर दिया गया। जयराम रमेश ने इसे ‘विनाश भारत’ करार देते हुए कहा कि योजना का केंद्रीकरण ही इसकी एकमात्र गारंटी है। पार्टी नए कानून को कोर्ट में चुनौती देगी और विपक्षी दलों व सामाजिक संगठनों को साथ जोड़ेगी।
पार्टी का कहना है कि उसके इस ‘संग्राम’ का मकसद यह है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) फिर से बहाल हो और नए कानून को वापस लिया जाए पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मनरेगा के स्थान पर बनाए गए विकसित ‘भारत-जी राम जी अधिनियम’ के तहत सिर्फ ‘विनाश भारत’ और योजना के केंद्रीकरण की गारंटी दी गई है।
उन्होंने कहा कि ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ दिल्ली केंद्रित नहीं, बल्कि पंचायत, प्रखंड और जिला केंद्रित है। उन्होंने यह भी कहा कि नए कानून को न्यायालय में चुनौती दी जाएगी। बीते 27 दिसंबर को पार्टी की सर्वोच्च नीति निर्धारक इकाई कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में मनरेगा के पक्ष में अभियान शुरू करने का फैसला लिया गया था। वेणुगोपाल ने कहा, ‘कार्य समिति की बैठक में फैसला किया गया था कि मनरेगा बचाओ संग्राम शुरू किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि नया कानून इस तरह से बनाया गया है ताकि मनरेगा को खत्म किया जा सके।
रमेश ने दावा किया कि यह संग्राम तीन काले कृषि कानूनों जैसे आंदोलन की तरह सफल होगा और सरकार को कानून वापस लेना पड़ेगा। बीते 18 दिसंबर को विपक्ष के हंगामे के बीच संसद ने ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक 2025’ पारित किया था, जो राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अधिनियम बन चुका है। यह 20 साल पुरानी मनरेगा की जगह लेगा।
कांग्रेस का कहना है कि मनरेगा सिर्फ योजना नहीं, बल्कि काम का संवैधानिक अधिकार है। नए कानून से पंचायती राज कमजोर होगा और ग्रामीण महिलाओं, दलितों व आदिवासियों पर सबसे बड़ा असर पड़ेगा। क्या यह आंदोलन सरकार को झुकने पर मजबूर करेगा? आने वाले दिन बताएंगे।
“Congress MNREGA Bachao Sangram “अभियान का पूरा प्लान:
– 8 जनवरी: सभी प्रदेशों में बड़ी तैयारी बैठकें, बड़े नेताओं व प्रभारियों की मौजूदगी।
– 10 जनवरी: जिलों में प्रेस कॉन्फ्रेंस, पंचायती राज खत्म करने की ‘साजिश’ उजागर।
– 11 जनवरी: गांधी या आंबेडकर प्रतिमा के सामने एक दिवसीय उपवास।
– 12-29 जनवरी: हर पंचायत में चौपाल और जागरूकता कार्यक्रम।
– कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे और राहुल गांधी की ओर से ग्राम प्रधानों को व्यक्तिगत पत्र।
– 30 जनवरी: वार्ड व ब्लॉक स्तर पर कार्यक्रम।
– 31 जनवरी-6 फरवरी**: जिला कलेक्टर दफ्तरों के बाहर धरना।
– 7-15 फरवरी: विधानसभाओं और राज्यपाल भवनों का घेराव, सभी जनप्रतिधि शामिल।
– 16-25 फरवरी: देश के चार जोनों में बड़ी रैलियां।













