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Airport Full Body Scanner India: एयरपोर्ट सुरक्षा में बड़ा बदलाव, अब दिल्ली-मुंबई समेत 8 हवाई अड्डों पर अब फुल बॉडी स्कैनर से होगी जांच

BCAS guidelines airports: ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) ने 8 प्रमुख हवाई अड्डों पर फुल बॉडी स्कैनर लगाने की अनुमति दी, यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए बनाए जाएंगे विशेष 'एफबीएस कॉरिडोर'।
Published on: 13 April 2026
Airport Full Body Scanner India: एयरपोर्ट सुरक्षा में बड़ा बदलाव, अब दिल्ली-मुंबई समेत 8 हवाई अड्डों पर अब फुल बॉडी स्कैनर से होगी जांच

Airport Full Body Scanner India: देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर सुरक्षा जांच की प्रक्रिया अब और भी आधुनिक होने जा रही है। ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) ने दिल्ली और मुंबई सहित देश के आठ बड़े एयरपोर्ट्स पर ‘फुल बॉडी स्कैनर’ (FBS) लगाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है।

लंबे समय से चल रहे विभिन्न परीक्षणों और तकनीकी मूल्यांकन के बाद अब एयरपोर्ट ऑपरेटर्स इन स्कैनर्स का इस्तेमाल फुल स्केल पर कर सकेंगे। इस मंजूरी के बाद यात्रियों की सुरक्षा जांच न केवल अधिक सटीक होगी, बल्कि इसमें लगने वाले समय में भी कमी आने की संभावना है।

नागरिक उड्डयन विभाग के सूत्रों के अनुसार, पहले चरण में यह सुविधा दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद, कोच्चि और अहमदाबाद एयरपोर्ट पर शुरू की जाएगी। शुरुआत में केवल दो-तीन हवाई अड्डों पर इसे लगाने की योजना थी, जिसे अब विस्तारित कर दिया गया है।

हवाई अड्डों पर इन स्कैनर्स को सामान्य कतारों में नहीं लगाया जाएगा। इसके बजाय, प्रत्येक एयरपोर्ट पर विशेष ‘एफबीएस कॉरिडोर’ तैयार किए जाएंगे। इन गलियारों का उपयोग सुरक्षा कर्मियों द्वारा आवश्यकतानुसार संदिग्ध यात्रियों की गहन जांच के लिए किया जाएगा।

सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ कस्टम अधिकारी भी आवश्यकता पड़ने पर इन फुल बॉडी स्कैनर्स की सेवाएं ले सकेंगे। इससे अवैध वस्तुओं की तस्करी रोकने और सुरक्षा प्रोटोकॉल को और अधिक मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

गौरतलब है कि दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहरों में इन स्कैनर्स का कई बार ट्रायल किया गया था। ट्रायल के दौरान सबसे बड़ी चुनौती रेडिएशन के खतरों को लेकर थी। अब ऐसे उन्नत स्कैनर्स को मंजूरी दी गई है जिनका मानव शरीर पर दुष्प्रभाव नगण्य है।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नई तकनीक विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से ग्रसित यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। परीक्षणों के सफल समापन के बाद अब इसे आधिकारिक रूप से लागू करने का रास्ता साफ हो गया है।

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