India LPG Crisis Alert: खाड़ी देशों में चल रहे तनाव का सीधा असर अब भारत की रसोई तक पहुँचने लगा है। कच्चे तेल और गैस की सप्लाई रुकने की वजह से देश में एलपीजी का स्टॉक तेजी से कम हो रहा है। इस संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार एक नई योजना पर विचार कर रही है। दरअसल, आने वाले समय में अब आपको मिलने वाले 14.2 किलो के भारी गैस सिलेंडर की जगह 10 किलो का हल्का सिलेंडर दिया जा सकता है।
सरकार और ऑयल मार्केटिंग कंपनियां इसका वजन 10 किलो ग्राम करने पर विचार कर रही हैं। सरकार का मानना है कि सिलेंडर में गैस की मात्रा थोड़ी कम करने से मौजूदा स्टॉक को ज्यादा से ज्यादा परिवारों तक पहुँचाया जा सकेगा। इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, माना जा रहा है कि 14.2 किलो ग्राम वाले सिलेंडर में अब करीब 10 किलो गैस दी जाने की योजना पर काम हो रहा है। इससे कम सप्लाई होने के बावजूद भी सरकार अधिक से अधिक घरों तक एलपीजी की सप्लाई करने में मदद मिलेगी।
खबर के मुताबिक विशेषज्ञों का कहना है कि आमतौर पर एक बड़ा सिलेंडर 40 दिन तक चलता है, जबकि 10 किलो वाला सिलेंडर भी आराम से एक महीना निकाल देगा। इससे गैस की बर्बादी कम होगी और सप्लाई की किल्लत से जूझ रहे घरों को भी समय पर सिलेंडर मिल पाएगा। राहत की बात यह है कि सिलेंडर का वजन कम होने पर उसकी कीमत भी उसी हिसाब से कम कर दी जाएगी। नए सिलेंडरों पर इसकी जानकारी के लिए खास स्टिकर भी लगाए जाएंगे।
फिलहाल भारत अपनी जरूरत की 60% एलपीजी विदेशों से मंगाता है, जिसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। युद्ध जैसे हालात की वजह से कई भारतीय जहाज समुद्र में फंसे हुए हैं और सप्लाई चेन पूरी तरह बिगड़ गई है। स्थिति इतनी गंभीर है कि पिछले हफ्ते आया गैस का स्टॉक देश की सिर्फ एक दिन की खपत के बराबर था। इसी दबाव को देखते हुए सरकार ने बुकिंग के नियमों में भी बदलाव किया है; अब दो सिलेंडरों के बीच 25 दिनों का अंतर होना जरूरी है और कीमतों में भी कुछ बढ़ोतरी की गई है ताकि सप्लाई को मैनेज किया जा सके।
उल्लेखनीय है कि अभी देश में एलपीजी (LPG) की सप्लाई को लेकर थोड़ी चिंता बनी हुई है क्योंकि खाड़ी देशों से गैस की नई खेप आने में देरी हो रही है। पिछले हफ्ते दो जहाजों से लगभग 92,700 टन गैस आई तो थी, लेकिन यह मात्रा इतनी कम है कि इससे पूरे देश की सिर्फ एक दिन की जरूरत ही पूरी हो सकती है। ऊपर से अब कमर्शियल इस्तेमाल के लिए भी सप्लाई दोबारा शुरू कर दी गई है, जिसकी वजह से जो थोड़ा-बहुत स्टॉक बचा है, उस पर बोझ और ज्यादा बढ़ गया है।
















