Semiconductor Chips Production in India: बीते साल भारत ने अपनी पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप बनाने में भी सफलता हासिल कर ली थी, और इस साल देश में सेमीकंडक्टर चिप्स का उत्पादन शुरू हो जाएगा। वैश्विक कंपनियां भारत को अपना प्रमुख हब बनाने की ओर आकर्षित हो रही हैं। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने कहा है कि भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है।
वैष्णव का मानना है कि साल 2032 तक भारत दुनिया के टॉप 4 सेमीकंडक्टर विनिर्माण देशों में शामिल हो जाएगा। इतना ही नहीं, 2035 तक भारत दुनिया का सबसे बेहतरीन चिप उत्पादक देश बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने भरोसा जताया कि देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि देश में इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और टेक एक्सपर्ट्स की कोई कमी नहीं है, यही वजह है कि सेमीकंडक्टर जैसे हाई-टेक क्षेत्र में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है।
2026 में शुरू होगा बड़े पैमाने पर चिप उत्पादनमंत्री ने खुशखबरी दी कि इस साल चार प्रमुख सेमीकंडक्टर यूनिट्स कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर देंगी। इनमें माइक्रॉन, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, सीजी पावर और केन्स टेक्नोलॉजी शामिल हैं। देश की बड़ी ऑटोमोबाइल और टेलीकॉम कंपनियां इन भारतीय प्लांट्स से ही चिप्स खरीदेंगी, जिससे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मजबूत कदम पड़ेगा।केन्स और सीजी पावर ने पिछले साल पायलट प्रोडक्शन शुरू किया था, इसलिए वे सबसे पहले कमर्शियल स्तर पर आएंगे। माइक्रॉन ने हाल ही में टेस्ट प्रोडक्शन शुरू किया है और जल्द ही फुल स्केल पर पहुंच जाएगी।
ईसीएमएस योजना को मिली बड़ी मंजूरीइलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के एक कार्यक्रम में मंत्री ने 41,863 करोड़ रुपये की 22 परियोजनाओं को हरी झंडी दिखाई। इनसे इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट मिलेगा और लाखों रोजगार सृजन होंगे।
सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम की रफ्तारसेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम के तहत अब तक 10 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को मंजूरी मिल चुकी है। इनमें दो फैब्रिकेशन प्लांट्स और आठ असेंबली, टेस्टिंग व पैकेजिंग यूनिट्स शामिल हैं। कुल निवेश करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये का है।
चिप डिजाइन में भी भारत आगेसरकार सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग नहीं, चिप डिजाइन पर भी फोकस कर रही है। डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) स्कीम के तहत 24 स्टार्टअप प्रोजेक्ट्स को सपोर्ट दिया जा रहा है, जिनकी कुल वैल्यू 920 करोड़ रुपये है। इससे नई टेक्नोलॉजी डेवलप होगी और भारत पूरी तरह आत्मनिर्भर बनेगा।
असम में टाटा का मेगा प्लांटअसम के जागीरोड में टाटा ग्रुप का सेमीकंडक्टर प्लांट इस साल मध्य तक पायलट प्रोडक्शन शुरू करेगा और साल के अंत तक कमर्शियल उत्पादन में आ जाएगा। इससे पूर्वोत्तर भारत में इंडस्ट्रियल ग्रोथ को नई रफ्तार मिलेगी।
वैष्णव ने विश्वास जताया कि 2032 तक भारत सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में टॉप-4 देशों में शामिल हो जाएगा और 2035 तक नंबर-1 बनेगा। भारत का टैलेंट और सरकार की नीतियां इस सपने को हकीकत बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।













