Raghav Chadha resigns from AAP: आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़ने और भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के बाद से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा लगातार सुर्खियों में हैं। सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी कर उन्होंने अपने इस बड़े राजनीतिक फैसले के पीछे की विस्तृत वजहों को सार्वजनिक किया है। चड्ढा के अनुसार, इस घोषणा के बाद से उन्हें बड़ी संख्या में संदेश मिल रहे थे, जिनमें से अधिकांश लोग उनसे पार्टी छोड़ने का कारण जानना चाह रहे थे।
चड्ढा ने अपने संदेश में कहा कि उन्होंने अपने यौवन के 15 बहुमूल्य वर्ष आम आदमी पार्टी को दिए हैं। उन्होंने खुद को पार्टी का संस्थापक सदस्य बताते हुए कहा, “मैंने राजनीति में अपना करियर बनाने के लिए प्रवेश नहीं किया था। मैंने एक राजनीतिक पार्टी के संस्थापक सदस्य के रूप में अपने खून, पसीने और कड़ी मेहनत से इस संगठन को सींचा है।” उन्होंने साफ किया कि यह निर्णय उनके लिए कतई आसान नहीं था।
अपनी पूर्व पार्टी पर निशाना साधते हुए उन्होंने पार्टी के भीतर काम करने के मौजूदा तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल उठाए। चड्ढा ने आरोप लगाया कि समय के साथ आम आदमी पार्टी पूरी तरह से बदल चुकी है। उन्होंने कहा, “आज की पार्टी वह संगठन नहीं रही जो पहले थी। पार्टी के भीतर अब एक बहुत ही नकारात्मक (toxic) कार्य वातावरण बन गया है। यहाँ आपको काम करने से रोका जाता है और संसद में अपनी बात रखने से भी प्रतिबंधित किया जाता है।”
बीजेपी में शामिल होने के अपने फैसले को सही ठहराते हुए उन्होंने खुद को ‘गलत पार्टी में सही व्यक्ति’ (the right man in the wrong party) करार दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी छोड़ने का विकल्प चुनने से पहले उन्होंने कई अन्य संभावनाओं पर भी विचार किया था, जिनमें राजनीति से पूरी तरह संन्यास लेना या पार्टी में रहकर आंतरिक सुधार की कोशिश करना शामिल था, लेकिन अंततः उन्होंने पाला बदलने का फैसला लिया।
इस राजनीतिक उठापटक को केवल अपनी व्यक्तिगत नाराजगी तक सीमित न रखते हुए उन्होंने दावा किया कि यह एक संगठित कदम है। उन्होंने कहा, “यह कोई अकेली घटना नहीं है। एक, दो, तीन, चार, पांच, छह नहीं, बल्कि कुल सात सांसदों ने इस पार्टी के साथ अपना रिश्ता खत्म करने का फैसला किया है।” उन्होंने तर्क दिया कि एक व्यक्ति गलत हो सकता है, दो लोग गलत हो सकते हैं, लेकिन सात सांसदों का एक साथ फैसला गलत नहीं हो सकता।
जब उनसे यह पूछा गया कि क्या यह निर्णय किसी बाहरी दबाव या डर के कारण लिया गया है, तो चड्ढा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हमने डर में आकर पार्टी नहीं छोड़ी है, बल्कि निराशा, मोहभंग और घृणा के कारण यह कदम उठाया है।” उन्होंने भरोसा दिलाया कि पार्टी बदलने के बावजूद वे जनहित के मुद्दों को उठाना जारी रखेंगे।
उल्लेखनीय है कि पार्टी छोड़ने और बीजेपी में शामिल होने के 24 घंटों के भीतर ही राघव चड्ढा को सोशल मीडिया पर बड़े नुकसान का सामना करना पड़ा है। इंस्टाग्राम पर उनके फॉलोअर्स की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने 20 लाख से अधिक फॉलोअर्स खो दिए हैं। इसके अलावा, उनके पुराने वीडियो और संसद में दिए गए भाषण फिर से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें वे बीजेपी की आलोचना करते नजर आए थे। यह स्थिति उनके राजनीतिक बदलाव को लेकर चल रही बहस को और अधिक तेज कर रही है।
















