Banke Bihari Temple Case Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने वृंदावन के ऐतिहासिक बांके बिहारी मंदिर की सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं और रीति-रिवाजों में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से स्पष्ट मना कर दिया है। अदालत ने कहा कि वह मंदिर की वर्तमान व्यवस्था में कोई बदलाव करने की इच्छुक नहीं है। बता दें कि सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस संवेदनशील मामले की सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान और तन्वी दुबे ने पक्ष रखा। अदालत ने साफ किया कि मंदिर के अनुष्ठान और परंपराएं यथावत बनी रहेंगी। दरअसल यह विवाद मंदिर की प्रबंधन समिति और सेवकों (पुजारियों) द्वारा दायर याचिकाओं के बाद गरमाया था। याचिकाकर्ताओं ने मंदिर के कामकाज की देखरेख के लिए गठित 12 सदस्यीय उच्चाधिकार समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे।

रिटायर्ड हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता वाली इस समिति पर आरोप लगाया गया है कि उसने मंदिर की प्राचीन धार्मिक मर्यादाओं में हस्तक्षेप किया है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, समिति की भूमिका केवल प्रबंधन तक सीमित होनी चाहिए थी, न कि परंपराओं को बदलने की। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मंदिर में मौसम के मुताबिक ही दर्शन के समय का निर्धारण किया जाता है। इसके अलावा देहरी पूजा को समाप्त किए जाने को लेकर भी विवाद है। याचिका में कहा गया है कि यह धार्मिक व्यवस्था गुरु-शिष्य परंपरा का हिस्सा है।
उल्लेखनीय है कि वृंदावन के ऐतिहासिक बांके बिहारी मंदिर में इस पूरे विवाद का मुख्य कारण दर्शन के समय में बदलाव, पारंपरिक ‘देहरी पूजा’ को रोकना और ‘फूल बंगला’ जैसी विशेष धार्मिक रस्मों पर शुल्क लगाया जाना है। पुजारियों का तर्क है कि ये प्रथाएं सामान्य कार्य नहीं, बल्कि मंदिर की गुरु-शिष्य परंपरा और पहचान का अभिन्न अंग हैं। अदालत में दलील दी गई कि बांके बिहारी मंदिर में दर्शन का समय हमेशा मौसम के अनुरूप निर्धारित होता आया है।
याचिकाकर्ताओं ने देहरी पूजा को समाप्त किए जाने के प्रयासों को धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध बताया है। वहीं, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज ने समिति का बचाव करते हुए कहा कि सभी कदम न्यायिक दिशा-निर्देशों के तहत उठाए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति का उद्देश्य केवल व्यवस्थाओं को सुचारू बनाना है, किसी की भावनाएं आहत करना नहीं।
यह पूरा मामला ‘उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश, 2025’ से भी जुड़ा है। इस अध्यादेश के माध्यम से सरकार मंदिर का संचालन एक सरकारी ट्रस्ट को सौंपने की तैयारी में थी, जिसके बाद धार्मिक स्वतंत्रता और सरकारी दखल पर देशव्यापी बहस छिड़ गई थी। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने इस अध्यादेश के कुछ हिस्सों पर रोक बरकरार रखी है। अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट को इसकी कानूनी वैधता पर अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया है, हालांकि प्रबंधन समिति को दैनिक प्रशासनिक कार्य जारी रखने की अनुमति दी गई है।



















