Prajasatta Side Scroll Menu
Bahra University - Shimla Hills

नौकरियों का संकट? बाजार के अनुमान से भी तेजी से बढ़ी बेरोजगारी, सरकारी आंकड़ों ने बढ़ाई देश की चिंता

India unemployment rate May 2026: देश में मई 2026 के दौरान बेरोजगारी दर बढ़कर 5.5 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई है, जिससे लेबर मार्केट और आर्थिक मोर्चे पर दबाव के साफ संकेत मिल रहे हैं।
India Unemployment Rate: नौकरियों का संकट? बाजार के अनुमान से भी तेजी से बढ़ी बेरोजगारी, सरकारी आंकड़ों ने बढ़ाई देश की चिंता

India Unemployment Rate : देश के रोजगार बाजार से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। मई 2026 में भारत की बेरोजगारी दर बढ़कर 11 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। सोमवार को जारी किए गए आधिकारिक सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में बेरोजगारी दर बढ़कर 5.5 फीसदी दर्ज की गई। इससे पिछले महीने, यानी अप्रैल 2026 में यह आंकड़ा 5.2 फीसदी के स्तर पर था।

इस प्रकार महज एक महीने के भीतर देश की बेरोजगारी दर में 30 बेसिस प्वाइंट की महत्वपूर्ण बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह नया सरकारी आंकड़ा बाजार के विश्लेषकों द्वारा लगाए गए अनुमानों से भी कहीं अधिक रहा है। बाजार ने मई महीने के लिए बेरोजगारी दर 5.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया था, लेकिन वास्तविक आंकड़े इस उम्मीद से ऊपर निकल गए।

अप्रैल के मुकाबले बढ़ी यह बेरोजगारी सीधे तौर पर इस बात का संकेत देती है कि वर्तमान समय में देश के रोजगार बाजार में गंभीर दबाव बना हुआ है। बेरोजगारी दर में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में दर्ज की गई है जब देश के भीतर रोजगार सृजन की रफ्तार को लेकर लगातार बहस और चर्चाएं हो रही हैं।

इसे भी पढ़ें:  Chandigarh: कारगिल विजय दिवस पर नशा मुक्त भारत और नारी शक्ति की प्रेरणा स्रोत बनीं CRPF कमांडेंट कमल सिसोदिया,

सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, केवल बेरोजगारी दर में ही बढ़ोतरी नहीं हुई है, बल्कि लेबर मार्केट से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण संकेतकों में भी गिरावट आई है। मई के दौरान लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) और वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (WPR) में भी कमी दर्ज की गई। आर्थिक शब्दावली में LFPR यह प्रदर्शित करता है कि काम करने की उम्र वाली कुल आबादी का कितना हिस्सा सक्रिय रूप से रोजगार की तलाश कर रहा है या फिर वर्तमान में काम कर रहा है। दूसरी ओर, WPR कुल आबादी में वास्तव में कार्यरत लोगों के अनुपात को दर्शाता है।

इसे भी पढ़ें:  रेप केस के आरोपी पूर्व सांसद Prajwal Revanna दोषी करार, एमपी-एमएलए कोर्ट ने सुनाया फैसला

आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण करने पर पता चलता है कि मई महीने में लेबर फोर्स में आम जनता की भागीदारी में मामूली कमी जरूर आई, लेकिन उसकी तुलना में रोजगार के वास्तविक अवसर कहीं अधिक तेजी से घट गए। रोजगार के अवसरों में आई इस तीव्र गिरावट के चलते ही लेबर फोर्स में बेरोजगार लोगों का अनुपात अचानक बढ़ गया। यही मुख्य वजह रही कि मई के महीने में समग्र बेरोजगारी दर में यह उछाल दर्ज किया गया। इन दोनों प्रमुख संकेतकों का नीचे जाना रोजगार बाजार की कमजोर स्थिति की ओर साफ इशारा कर रहा है।

आर्थिक मोर्चे पर इसके दूरगामी संकेत मिल रहे हैं। LFPR और WPR में गिरावट के साथ-साथ बेरोजगारी दर का इस तरह बढ़ना सीधे तौर पर लेबर मार्केट में नरमी और सुस्ती का संकेत है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आने वाले समय में रोजगार सृजन की रफ्तार में तेजी नहीं लाई जाती है, तो भविष्य के महीनों में भी देश के रोजगार बाजार पर यह दबाव इसी तरह बना रह सकता है। इसके अलावा, मई के महीने में थोक महंगाई दर (WPI) भी बढ़कर 9.68 फीसदी पर पहुंच गई है, जिसमें खाद्य वस्तुएं महंगी हुई हैं, जिसने आर्थिक चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

इसे भी पढ़ें:  Ajit Pawar Net Worth: बारामती विमान दुर्घटना में अजित पवार का निधन, जानिए दिवंगत नेता की संपत्ति, नेट वर्थ और पीछे छोड़े करोड़ों के एसेट्स
Economic Growth Employment News Govt Data Indian Economy Labor Market Unemployment Rate

Join WhatsApp

Join Now