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Success Story: स्लम में रहीं उमल खैर कैसे बनीं IRS ऑफिसर, पढ़ें संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक कहानी

Motivational Story IRS Officer Umal Khair: शारीरिक चुनौतियों और गरीबी को मात देकर उमल ने पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की। स्लम एरिया में रहने से लेकर एक सफल अधिकारी बनने तक का उनका सफर हर युवा के लिए एक मिसाल है।
Published on: 27 April 2026
Success Story: स्लम में रहीं उमल खैर कैसे बनीं IRS ऑफिसर, पढ़ें संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक कहानी

UPSC Success Story In Hindi: जीवन में चुनौतियों का आना स्वाभाविक है, लेकिन उन चुनौतियों को पार करके एक विजेता बनने के लिए मानसिक दृढ़ता का होना अनिवार्य है। यह विचार आईआरएस अधिकारी उम्मल खैर के। उम्मल खैर का जीवन उन लोगों के लिए एक मिसाल है, जिन्होंने शारीरिक, आर्थिक और सामाजिक अभावों के बावजूद यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा को पहली ही कोशिश में उत्तीर्ण किया।

बता दें कि 2017 बैच की आईआरएस ऑफिसर उमल खैर की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। उन्हें बचपन से ही ‘ऑस्टियोजेनेसिस इमपरफेक्टा’ नामक बीमारी थी, जिसे आम भाषा में ‘फ्रैजाइल बोन डिसऑर्डर’ कहा जाता है। इस बीमारी के कारण उनकी हड्डियां बेहद कमजोर थीं और बार-बार फ्रैक्चर होने के कारण उनका आधा बचपन प्लास्टर में ही बीता।

आर्थिक तंगी का आलम यह था कि उनके परिवार को हजरत निजामुद्दीन के पास एक स्लम एरिया में रहना पड़ा। उमल ने बहुत छोटी उम्र से ही घर की जिम्मेदारी संभाली और ट्यूशन पढ़ाकर अपना खर्च चलाया। उन्होंने बताया कि किस तरह विपरीत परिस्थितियों में भी खुद को प्रेरित रखा जा सकता है। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने असफलता से न घबराने की सीख दी।

असफलता से घबराना नहीं है सबसे बड़ी सीख
उमल खैर बताती हैं कि स्कूल के दिनों में उन्हें भारी भेदभाव और बुलिंग का सामना करना पड़ा। टीचर्स और प्रिंसिपल उन्हें पसंद नहीं करते थे, जिसके कारण उनका आत्मविश्वास डगमगा गया था। एक समय ऐसा आया कि पांचवीं कक्षा के बाद कोई भी स्कूल उन्हें दाखिला देने को तैयार नहीं था, क्योंकि उन्हें डर था कि उमल का खराब रिजल्ट उनके स्कूल का नाम खराब कर देगा।

हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और कड़ी मेहनत की। छठी कक्षा में उनका प्रदर्शन इतना शानदार रहा कि टीचर्स हैरान रह गए। उमल कहती हैं, “गलत जगह और गलत समय पर आपकी काबिलियत को न पहचाने जाने का मतलब यह नहीं है कि आप खुद पर शक करना शुरू कर दें।”

दूर की सोच और सही निर्णय का महत्व
अपने करियर के फैसलों के बारे में बात करते हुए उमल ने बताया कि उन्होंने हमेशा दूर की सोच रखी। दिल्ली विश्वविद्यालय से साइकोलॉजी में पढ़ाई के दौरान उन्होंने एमए के लिए क्लिनिकल साइकोलॉजी के बजाय इंटरनेशनल स्टडीज चुना ताकि वे ट्यूशन पढ़ाकर अपना खर्च उठा सकें।

उनके इस निर्णय ने उन्हें जेएनयू में प्रवेश दिलाया, जहां फीस कम होने के कारण उन्हें आर्थिक चिंता से मुक्ति मिली। इसी का परिणाम था कि उन्होंने पहले ही प्रयास में यूजीसी नेट (JRF) क्लियर किया। इस फेलोशिप से मिले पैसों से उन्होंने यूपीएससी की तैयारी की और पहले ही अटेंप्ट में सफलता हासिल की।

अनुशासन और कभी हार न मानने का जज्बा
अनुशासन का महत्व समझाते हुए उमल ने बताया कि कैसे उन्होंने 10 साल तक बेहद तकलीफदेह ब्रेसेस पहने ताकि वे चल-फिर सकें। उन्होंने कहा कि एक जगह अनुशासन बरतने से जीवन के हर पहलू में लाभ मिलता है। उन्होंने 2011 में साउथ कोरिया में होने वाले एक इंटरनेशनल लीडरशिप प्रोग्राम का किस्सा साझा किया।

वीजा न मिलने के कारण उनकी फ्लाइट छूट गई थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने रात के समय अधिकारियों को ईमेल लिखा, जिसके बाद एंबेसी ने तुरंत वीजा जारी किया और उनके सम्मान में इनॉग्रेशन सेरेमनी तक स्थगित कर दी गई। उमल का संदेश साफ है, संघर्ष में कभी पीछे न हटें, क्योंकि हो सकता है कि आपका आखिरी प्रयास ही सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो।

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