Barsana Mandir: “राम तेरी गंगा मैली हो गई, पापियों के पाप धोते-धोते…” ये पंक्तियाँ आज केवल गीत नहीं रहीं, बल्कि राधा रानी के बरसाना की सच्चाई बनकर सामने खड़ी हैं। राधा रानी की नगरी, जहाँ कण-कण में भक्ति बसती है, आज गंदगी और लापरवाही की मार झेल रही है।
अगर देश में कहीं स्वच्छता अभियानों की पोल खुलती देखनी हो, तो बरसाना उसका जीता-जागता उदाहरण है। जिस पवित्र भूमि को लोग साक्षात राधा रानी का निवास मानते हैं, उसी मंदिर परिसर के 200 से 300 मीटर के दायरे में हालात ऐसे हैं कि आंखें झुक जाती हैं और मन व्यथित हो उठता है।
राधा रानी मंदिर के आसपास कचरे के ढेर, मंदिर तक जाने वाली सीढ़ियों के दोनों ओर फैली गंदगी, कहीं कुल्हड़ों का अंबार तो कहीं प्लास्टिक, कागज़ और अन्य अपशिष्ट ये सब मिलकर मंदिर की अलौकिक सुंदरता पर काला धब्बा लगा रहे हैं।
सबसे पीड़ादायक दृश्य तब सामने आता है जब मंदिर के आसपास की खाली ज़मीन को कुछ लोगों ने खुले में शौच स्थल बना दिया है। उसी रास्ते से श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश करते हैं, यानी गंदगी सीधे मंदिर परिसर तक पहुँच रही है। यह दृश्य किसी भी संवेदनशील मन को झकझोर देने के लिए काफी है।
इस वर्ष पहली बार बरसाना जाकर दर्शन का सौभाग्य मिला। मन में अपार खुशी थी, सोचा था कि जिस राधा रानी पर स्वयं श्रीकृष्ण मोहित थे, उनका धाम भले स्वर्ग जैसा न हो, पर कम से कम स्वच्छ और पवित्र तो होगा।
लेकिन सच्चाई देख मन विचलित हो गया। ऐसा प्रतीत हुआ मानो हम किसी मंदिर के रास्ते से नहीं, बल्कि खुले में शौच और कचरे से भरे रास्ते से गुजर रहे हों।
श्रद्धालुओं की भीड़ में आस्था की कमी नहीं है, लेकिन जिम्मेदारी की भारी कमी साफ दिखाई देती है। प्रसाद, छाछ और कुल्हड़ बेचने वाले दुकानदार अपना कचरा मंदिर के किनारे फेंककर पल्ला झाड़ लेते हैं। रही-सही कसर श्रद्धालुओं की असावधानी पूरी कर देती है।
दिल्ली के कचरे के पहाड़ तो देश देख ही चुका है, लेकिन जिस रफ्तार से बरसाना में कचरा जमा हो रहा है, उसे देखकर डर लगता है कि *कहीं आने वाले वर्षों में राधा रानी मंदिर के आसपास भी कचरे का पहाड़ न खड़ा हो जाए।
ऐसे में सवाल उठता है कि इस हालात में राधा रानी कैसे विराजमान रह पाती होंगी?, यदि यह संदेश उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुँचे, तो विनम्र अपील है कि राधा रानी मंदिर के 300 से 500 मीटर के दायरे को पूरी तरह स्वच्छ और कचरा-मुक्त घोषित कर सख्ती से लागू किया जाए।
साथ ही, राधा रानी के भक्तों से भी अनुरोध है कि अगर हम सच्चे अर्थों में उनकी भक्ति करते हैं, तो उनके निवास स्थान को पवित्र, स्वच्छ और सुंदर बनाए रखना भी हमारा धर्म है। आस्था केवल दर्शन में नहीं, जिम्मेदारी निभाने में भी झलकनी चाहिए। क्योंकि राधा रानी का धाम केवल एक मंदिर नहीं, हमारी संस्कृति, श्रद्धा और संवेदनशीलता की पहचान है।
यदि आप भी राधा रानी में आस्था रखते हैं, तो इस खबर को अधिक से अधिक साझा करें, ताकि यह संदेश प्रशासन तक पहुँचे।
राधे राधे।














