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Richest Temples in India: भारत के मंदिर आस्था ही नहीं, अर्थव्यवस्था का भी है विशाल आधार, जाने कौन से है भारत के 10 सबसे अमीर मंदिर

Indian Temple Assets: भारत के मंदिर केवल आस्था ही नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था का भी बड़ा आधार हैं। तिरुपति बालाजी के 11 टन सोने से लेकर पद्मनाभस्वामी मंदिर के 2 लाख करोड़ के प्राचीन खजाने तक, जानें देश के टॉप-10 सबसे अमीर मंदिरों की कुल संपत्ति और उनके विशाल साम्राज्य का
Published on: 24 March 2026
Richest Temples in India: भारत के मंदिर आस्था ही नहीं, अर्थव्यवस्था का भी विशाल आधार, जाने कौन से है भारत के 10 सबसे अमीर मंदिर

Richest Temples in India: भारत के मंदिर केवल पूजा-पाठ और श्रद्धा की जगह नहीं हैं, बल्कि वे देश की आर्थिक मजबूती में भी बड़ा योगदान देते हैं। अगर हम देश के सबसे अमीर 10 मंदिरों की कुल संपत्ति (जैसे सोना, नकद और जमीन) का अंदाजा लगाएं, तो यह आंकड़ा करीब 7.5 से 9 लाख करोड़ रुपये के आसपास बैठता है। इन मंदिरों में हर साल करोड़ों का दान आता है और इनके पास सदियों पुराना खजाना भी है।

आंध्र प्रदेश का तिरुपति बालाजी मंदिर इस लिस्ट में सबसे ऊपर आता है। बैंक बैलेंस और हर साल मिलने वाले नकद चढ़ावे के मामले में यह दुनिया के सबसे अमीर मंदिरों में गिना जाता है। यहाँ आम दिनों में भी करोड़ों का दान आता है, जैसे हाल ही में 17 मार्च को सिर्फ एक दिन में करीब 4.88 करोड़ रुपये चढ़ावा आया था। इस मंदिर की कमाई का एक बड़ा जरिया वह 11 टन सोना है, जो बैंकों में जमा है और जिस पर मंदिर को भारी ब्याज मिलता है।

वहीं, अगर पुराने खजाने और इतिहास की बात करें, तो केरल का पद्मनाभस्वामी मंदिर सबसे अमीर है। इसकी 99% संपत्ति प्राचीन सोने की मूर्तियों, सिक्कों और बेशकीमती हीरों के रूप में है, जिसकी आज की कीमत 2 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा है। इसी तरह, ओडिशा का जगन्नाथ पुरी मंदिर अपनी विशाल जमीन के लिए जाना जाता है। इस मंदिर के पास 60 हजार एकड़ से ज्यादा जमीन है, जो ओडिशा के साथ-साथ देश के 6 अन्य राज्यों में भी फैली हुई है। अगर इस मंदिर की जमीन और खजाने की कुल कीमत आंकी जाए, तो यह लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचती है।

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की स्थिति पिछले दो सालों में काफी बदल गई है। मंदिर को मिलने वाली आय का सबसे बड़ा जरिया श्रद्धालुओं द्वारा दिया जाने वाला दान और बैंक में जमा पैसों पर मिलने वाला ब्याज है। मंदिर के पास अपनी काफी जमीन और संपत्ति भी है। इसमें मुख्य रूप से 70 एकड़ का परिसर और उसके आसपास की जमीन शामिल है। इसके अलावा, वहां बन रहा भव्य मंदिर अपने आप में एक बड़ी विरासत है, जिसे बनाने में ही 1,800 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च आ रहा है। दान की बात करें तो मंदिर में हर दिन औसतन एक करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि चढ़ावे के रूप में आ रही है।

बता दें कि भारत में मंदिरों की संपत्ति और उनकी अमीरी हमेशा चर्चा का विषय रहती है। हाल ही में आई ‘ग्लोबल वेल्थ इंडेक्स-2026’ की रिपोर्ट के अनुसार, आंध्र प्रदेश का तिरुपति बालाजी मंदिर दुनिया का तीसरा सबसे अमीर धार्मिक स्थल बन गया है। इस मंदिर के पास करीब 3.38 लाख करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति है। अगर इसकी तुलना दुनिया के बाकी देशों से करें, तो यह आंकड़ा हैरान करने वाला है। तिरुपति मंदिर की कुल दौलत साइप्रस, आइसलैंड और एस्टोनिया जैसे करीब 100 छोटे देशों की कुल अर्थव्यवस्था (जीडीपी) से भी कहीं ज्यादा है।

देश के टॉप-10 मंदिरों की कुल संपत्ति का आकलन करें तो यह लगभग 9 लाख करोड़ रुपये बैठती है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा सोने का है, जिसकी कीमत मौजूदा बाजार भाव के हिसाब से करीब 4.50 लाख करोड़ रुपये है। इसके अलावा, इन मंदिरों के पास 1.41 लाख करोड़ रुपये कैश और एफडी के रूप में जमा हैं, जबकि 3.76 लाख करोड़ रुपये की जमीन और व्यावसायिक इमारतें हैं।

पिछले दो सालों में इन मंदिरों की संपत्ति में जबरदस्त उछाल आया है, जिसका मुख्य कारण सोने की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी है। मार्च 2024 में सोना करीब 65 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो अब बढ़कर 1.50 लाख रुपये तक पहुंच गया है। इसी वजह से तिरुपति मंदिर की कुल वेल्थ में 35%, जगन्नाथ पुरी मंदिर में 50% और पद्मनाभस्वामी मंदिर की संपत्ति में तो 100% तक का इजाफा देखा गया है। गौर करने वाली बात यह है कि मंदिरों को मिलने वाले नकद दान में सिर्फ 10 से 12% की ही वृद्धि हुई है, यानी उनकी अमीरी बढ़ने के पीछे असली ताकत सोने की बढ़ती कीमतें हैं।

भारत के टॉप-10 समृद्ध धर्मस्थल: संपत्ति और आय का विवरण (2025-26) (Richest Temples in India)

क्रमधर्मस्थल का नामकुल अनुमानित संपत्ति (चल-अचल)सालाना कुल आयरोज औसत आय
1पद्मनाभस्वामी मंदिर (केरल)₹2,50,000 करोड़ तक₹15 – 25 करोड़₹5 – 6 लाख
2तिरुपति बालाजी (आंध्र प्रदेश)₹3,00,000 – 3,38,000 करोड़₹5,258 करोड़₹14 – 15 करोड़
3स्वर्ण मंदिर (अमृतसर)अमूल्य (ऐतिहासिक और स्वर्ण)₹1,260 करोड़₹4 – 6 करोड़
4जगन्नाथ मंदिर (पुरी)₹1,20,000 करोड़₹500 – 600 करोड़₹1.5 – 2 करोड़
5साई बाबा मंदिर (शिर्डी)₹6,000 – 9,000 करोड़₹1,000 – 1,200 करोड़₹1 – 1.5 करोड़
6श्रीराम मंदिर (अयोध्या)₹3,000 करोड़₹327 करोड़₹1 – 1.5 करोड़
7वैष्णो देवी मंदिर (जम्मू)₹2,500 करोड़₹250 – 300 करोड़₹50 – 60 लाख
8सिद्धिविनायक मंदिर (मुंबई)₹800 करोड़₹100 – 125 करोड़₹25 – 35 लाख
9काशी विश्वनाथ (वाराणसी)₹133 करोड़₹40 – 55 करोड़₹15 – 20 लाख
10सोमनाथ मंदिर (गुजरात)₹1,100 करोड़₹35 – 40 लाख (मासिक अनुमान)₹5 – 8 लाख

नोट: यह आंकड़े 2025-26 के अनुमानित डेटा पर आधारित हैं, जिसका स्रोत ग्लोबल वेल्थ इंडेक्स, वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल और विभिन्न मंदिर ट्रस्टों की ऑडिट रिपोर्ट्स हैं।

भारत के ये प्रमुख मंदिरों है स्वर्ण भंडार
भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में भक्तों की अटूट श्रद्धा न केवल दान में, बल्कि वहां मौजूद स्वर्ण भंडार में भी झलकती है। अगर हम आंकड़ों पर नजर डालें, तो केरल का पद्मनाभस्वामी मंदिर इस सूची में सबसे ऊपर है, जहाँ लगभग 1.5 हजार टन सोना होने का अनुमान है। इसके बाद आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर का नाम आता है, जिसके पास 11.3 टन सोना सुरक्षित है। माता वैष्णो देवी के दरबार में भी 1.2 टन सोना है, जबकि अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में करीब 900 किलो और काशी विश्वनाथ मंदिर में 940 किलो सोना मौजूद है।

इसी तरह, महाराष्ट्र के प्रसिद्ध शिरडी साईं बाबा मंदिर के पास 400 किलो और मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर के पास लगभग 160 किलो सोना है। गुजरात के ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर में भी 160 किलो सोने का भंडार है। वहीं, ओडिशा के जगन्नाथ पुरी मंदिर के पास 130 किलो और अयोध्या के नवनिर्मित राम मंदिर में फिलहाल लगभग 50 से 60 किलो सोना होने का अनुमान लगाया गया है।

नोट: यह जानकारी एक राष्ट्रीय समाचार पत्र में छपी खबर के मुताबिक है।

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