Wheat MSP Punjab News: पंजाब में बेमौसम हुई बारिश के कारण गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचा था, जिससे किसानों में चिंता का माहौल था। राज्य की मंडियों में फसल की गुणवत्ता मानकों पर खरी न उतरने के कारण खरीद प्रक्रिया में बाधा आ रही थी। अब लंबे इंतजार के बाद केंद्र सरकार ने 2026-27 के रबी विपणन सीजन के लिए नियमों में आवश्यक बदलाव किए हैं, जिससे खरीद प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
इकॉनमिक टाइम्स कि रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र से जारी नवीनतम आदेशों के अनुसार, भारतीय खाद्य निगम (FCI) अब उन गेहूं की फसलों को भी स्वीकार करेगा जिनकी चमक (luster loss) 70 प्रतिशत तक प्रभावित हुई है। इसके अतिरिक्त, जो मानक पहले सिकुड़े हुए दानों (shriveled grains) के लिए निर्धारित थे, उन्हें 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। इस छूट का मुख्य उद्देश्य किसानों को फसल अस्वीकृति की समस्या से बचाना और उन्हें मंडियों में उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना है।
किसानों के लिए सबसे बड़ा आश्वासन यह है कि गेहूं की गुणवत्ता में इस कमी के बावजूद उनके भुगतान में किसी भी प्रकार की कटौती नहीं की जाएगी। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन ढील वाले मानकों के तहत खरीदी गई उपज के लिए भी किसानों को 2,585 रुपये प्रति क्विंटल का पूर्ण न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) प्रदान किया जाएगा। यह निर्णय राज्य के हजारों किसानों को होने वाले संभावित बड़े आर्थिक नुकसान से बचाने में कारगर साबित होगा।
केंद्र सरकार ने इस रियायत के साथ कुछ प्रशासनिक शर्तें भी जोड़ी हैं। इन नियमों के तहत खरीदी गई गेहूं की विशेष खेप को अलग गोदामों में संग्रहित किया जाएगा ताकि उनकी पहचान स्पष्ट बनी रहे। केंद्र ने यह भी साफ किया है कि भंडारण के दौरान यदि गेहूं की गुणवत्ता और अधिक खराब होती है, तो इसकी पूर्ण जिम्मेदारी पंजाब सरकार की होगी।
इसके साथ ही, इन विशेष मानकों वाली गेहूं की स्टॉक को प्राथमिकता के आधार पर जल्दी इस्तेमाल में लाने का निर्देश दिया गया है। इससे जुड़ी किसी भी प्रकार की अतिरिक्त परिचालन लागत (additional cost) का वहन भी राज्य सरकार को ही करना होगा। अधिकारियों का मानना है कि इन उपायों से जहां किसानों को राहत मिलेगी, वहीं खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को भी सुचारू बनाए रखने में मदद मिलेगी।
















