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वीरेंद्र सात दिन ज़िन्दगी मौत से जंग लड़ता रहा प्रशासन और सरकार ने नहीं ली सुध

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प्रजासत्ता ब्यूरो शिमला।
हिमाचल प्रदेश सरकार और प्रदेश पुलिस महानिदेशक मुख्यालय के लिए बडे ही शर्म की बात है कि वीरेंद्र कुमार पुलिस जवान 7 दिन तक आईजीएमसी मे जिंदगी मौत से जुझता रहा लेकिन किसी बड़े अस्पताल में हिमाचल से बहार रैफर नहीं किया।

शिमला पुलिस प्रशासन जो कर सकता था उसने किया लेकिन राजधानी शिमला मे होने के बावजुद मुख्यमंत्री जयराम प्रदेश पुलिस महिनिदेशक संजय कुंडू, विधायक, मंत्री और कोई बडा अफसर देखने हालचाल पुछने तक नहीं आया। जबकि सीएम जयराम दावा करते हैं कि मैं गरीब परिवार से हूं गरीबी नजदीक से देखी है।

मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री हिमाचल से बाहर अपना ईलाज करवाने बड़े नामीं हस्पतालों में करवाने जा सकते हैं लेकिन एक पुलिस जवान जो 8 साल के अनुबंध पर पुलिस मे 2016 वैच का कांगडा के कोठी कोहड गांव का गरीब भर्ती हुआ था उसका इलाज हिमाचल से बाहर जिंदगी बचाने के लिए सरकार नहीं करवा सकी ,मुख्यमंत्री गरीब परिवार से थे आये दिन हर जगह ढ़िढोरा पीटते हैं।ऐसी सरकार और‌ पुलिस प्रशासन को शायद ही मलाल हो कि उन्होने एक जवान और परिवार ने बेटा खोया है।

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अब सवाल यह है कि सीएम हिमाचल प्रदेश और पुलिस महानिदेशक का दिल अपने इस पुलिस गरीब युवा जवान के लिए क्यों नहीं पीघला ?? क्या यह नेताओं को देखने ही आईजीएमसी आते हैं???

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मुझे महिलाओं से जुड़े विषयों पर लिखना बेहद पसंद है। महिलाओं की ताकत, उनकी चुनौतियों और उनकी उपलब्धियों को उजागर करने में विश्वास करती हूँ। मेरे लेखन का उद्देश्य महिलाओं की आवाज़ को मजबूती से पेश करना और समाज में उनकी भूमिका को पहचान दिलाना है।

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