Shimla News: शिमला जिला के रामपुर-खनेरी स्थित महात्मा गांधी मेमोरियल नर्सिंग कॉलेज में प्रशिक्षण ले रही 19 छात्राओं के टीबी संक्रमित पाए जाने से हड़कंप मच गया है। यह मामला अब केवल स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि संस्थान की बदहाल व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही की गंभीर कहानी बनकर सामने आया है।
बता दें कि नर्सिंग कॉलेज की करीब 20 प्रतिशत छात्राओं के टीबी से संक्रमित होने ने हिमाचल प्रदेश में टीबी उन्मूलन अभियान की पोल खोल कर रख दी है। इस मामले में 31 मार्च और 17 अप्रैल को दो बार निरीक्षण हुआ। दूसरी बार निरीक्षण एसडीएम के आदेश के बाद किया गया। इन निरीक्षणों में कॉलेज परिसर में कई गंभीर खामियां सामने आईं, लेकिन सुधार समय पर न होने का खामियाजा 19 छात्राओं को टीबी की चपेट में आकर भुगतना पड़ा।
निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार कॉलेज हॉस्टल में छात्राओं को सीलन भरे कमरों में रहना पड़ रहा है। भोजन की गुणवत्ता इतनी खराब बताई जा रही है कि दूध तक दुर्गंधयुक्त मिलता है। प्रोटीन युक्त आहार जैसे अंडा, दाल और फल लगभग नदारद हैं। चौंकाने वाली बात यह भी है कि वर्ष 2009 से मेस संचालक बिना टेंडर के काम कर रहा है, जबकि जिम्मेदार विभाग मौन है।
छात्राओं का आरोप है कि बीमार होने पर भी उन्हें आराम नहीं दिया जाता। मासिक धर्म के दौरान भी अनिवार्य गतिविधियों में शामिल होना पड़ता है और गुनगुना पानी तक उपलब्ध नहीं करवाया जाता। परिवार से संपर्क की सुविधा भी सीमित है। यह स्थिति एक शिक्षण संस्थान की जगह जबरन श्रम जैसी व्यवस्था को दर्शाती है।
कॉलेज की लाइब्रेरी अक्सर बंद रहती है, जिससे छात्राओं को सीढ़ियों पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। एक कमरे में जरूरत से ज्यादा छात्राएं ठहराई गई हैं। 25 से 30 छात्राओं पर एक शौचालय है और सफाई कर्मचारी तक नहीं है, जिससे छात्राएं खुद सफाई करने को मजबूर हैं।
छात्राओं से अस्पताल में स्टाफ की तरह काम करवाया जा रहा है। छुट्टियों में भी ड्यूटी लगाई जाती है। इसके अलावा खाना बनाना, पानी भरना, पूजा-पाठ और अन्य कार्यों के साथ बंदरों को भगाने के लिए ‘फॉरेस्ट ड्यूटी’ भी लगाई जाती है। यह सब शिक्षा के नाम पर करवाया जा रहा है, जो स्पष्ट रूप से शोषण की श्रेणी में आता है।
छात्राओं ने आरोप लगाया कि संस्थान में अंधविश्वास को बढ़ावा दिया जा रहा है। सामान गायब होने पर मंदिर में अनुष्ठान, स्थानीय देवता के नाम पर डराना, शिकायत करने पर फीस बढ़ाने और फोन छीनने की धमकी दी जाती है। लगातार तनाव के चलते छात्राएं मानसिक तनाव के कगार पर हैं और पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
उधर, नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने इस मामले पर सुक्खू सरकार की उदासीनता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जहां केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जरिए भरपूर सहयोग दे रही है, वहीं प्रदेश स्तर पर भारी लापरवाही सामने आ रही है। नर्सिंग छात्राओं के परिजनों ने चिकित्सा अधीक्षक खनेरी और एसडीएम रामपुर से लिखित शिकायतें भी की हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि निरीक्षण रिपोर्ट के बावजूद सुधार क्यों नहीं हुआ? प्रशासन ने जानबूझकर आंखें क्यों मूंदी? 19 छात्राओं का टीबी संक्रमित होना सिस्टम की बड़ी विफलता नहीं तो और क्या है? क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?














