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Shimla News: शिमला में रातों-रात इमारतों में बड़ी दरारें, 15 परिवार सड़क पर – फोरलेन निर्माण पर सवाल!

Shimla News: शिमला में रातों-रात इमारतों में बड़ी दरारें, 10 परिवार सड़क पर – फोरलेन निर्माण पर सवाल!
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Shimla News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में साफ मौसम और बिना किसी बारिश के अचानक एक इमारत में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गईं, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। चलौंठी इलाके में देर रात यह घटना हुई, जहां छह मंजिला मकान में दरारें देखते ही लोग डर से बाहर भागे।

स्थिति बिगड़ते देख प्रशासन ने फौरन कदम उठाया और रात में ही मकान को खाली करा लिया। बता दें कि इस भवन में रहने वाले लगभग 15 परिवारों को कड़कड़ाती ठंड में घर छोड़ना पड़ा और वे बेघर हो गए। बता दें कि कड़ाके की ठंड के बीच लोग बच्चों और बुजुर्गों के साथ सड़क पर खड़े रहने को मजबूर हुए।

पास की इमारतें भी खतरे में
मामला यहीं नहीं रुका है साथ लगते एक होटल और दूसरे मकान में भी दरारें दिखने लगीं। सुरक्षा के लिए प्रशासन ने इन्हें भी खाली करवाया। पुलिस ने कुछ देर के लिए सड़क पर ट्रैफिक रोक दिया और वहां रहने वालों को आसपास की सुरक्षित जगहों पर भेजा।

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फोरलेन निर्माण का काम जिम्मेदार?
दरअसल, यह इलाका भट्टाकुफर से चलौंठी तक चल रहे फोरलेन सड़क प्रोजेक्ट का हिस्सा है। यहां टनल बनाने का काम जोरों पर है, जिसकी वजह से पहले भी कई मकान प्रभावित हो चुके हैं और उन्हें खाली कराना पड़ा था।

लोगों का कहना है कि दो-तीन दिन पहले ही घरों में छोटी-छोटी दरारें नजर आने लगी थीं। उन्होंने निर्माण कंपनी और जिला अधिकारियों को इसकी सूचना दी थी, लेकिन कंपनी के लोगों ने तब इमारतों को सुरक्षित बता दिया। लेकिन रात को अचानक हालात बिगड़ गए और लोगों को घर छोड़कर बाहर आना पड़ा।

लोगों का आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा किया जा रहा फोरलेन और टनल निर्माण कार्य है। उनका कहना है कि पहाड़ी की अत्यधिक कटिंग, गहरी खुदाई और निर्माण के दौरान होने वाले कंपन से जमीन कमजोर हो गई है, जिससे मकानों और सड़क की स्थिरता प्रभावित हुई। स्थानीय निवासियों ने बताया कि चलौंठी और आसपास के क्षेत्रों में पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य में जरूरी एहतियात नहीं बरती जा रही।
घटना के बाद इलाके में भय का माहौल है। लोगों को आशंका है कि यदि समय रहते भू-वैज्ञानिक जांच और सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो आसपास के अन्य मकान भी खतरे की जद में आ सकते हैं। प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से सुरक्षित स्थान पर रहने की व्यवस्था, नुकसान का आकलन और मुआवजे की मांग की है।
प्रशासन की ओर से कहा गया है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और विशेषज्ञों की टीम से जांच करवाई जाएगी। हलांकि अब सभी प्रभावित परिवारों को सुरक्षित जगह पर पहुंचा दिया गया है और आगे की जांच चल रही है। यह घटना फोरलेन जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में सुरक्षा मानकों पर सवाल उठाती है।

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