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निधि समर्पण अभियान में देश के 12,47,21,000 परिवारों से जुडे़ स्वयंसेवक : डाॅ. मनमोहन वैद्य

निधि समर्पण अभियान में देश के 12,47,21,000 परिवारों से जुडे़ स्वयंसेवक : डाॅ. मनमोहन वैद्य

-बंगलुरू में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वार्षिक प्रतिनिधि सभा की बैठक शुरू
कई देशों को कोरोना वैक्सीन उपलब्ध करवाने पर भारत सरकार के अभिनंदन और राममंदिर से संबंधित प्रस्तावों पर भी होगी चर्चा

पूजा| शिमला। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा कोरोना काम में लोगों की मदद के लिए स्वयंसेवकों द्वारा किए कार्य और श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण निधि समर्पण अभियान को संगठनात्मक दृष्टि से काफी फलदायी बताया है। शुक्रवार को बंगलुरू में दो दिवसीय वार्षिक प्रतिनिधि सभा की बैठक शुरू होने पर पत्रकार को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य ने ये जानकारी दी। उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर केवल एक मंदिर नहीं है, श्रीराम भारत की संस्कृति का परिचय है, चरित्र है। सारे भारत को एक सूत्र में जोड़ने की भावनात्मक शक्ति श्रीराम हैं। भगवान मानें या ना मानें, लेकिन सांस्कृतिक मूल्यों का प्रतीक अवश्य मानते हैं। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण निधि समर्पण अभियान में स्वयंसेवकों का उद्देश्य अधिक निधि एकत्र करना नहीं था। देशभर में अधिक से अधिक गांवों, परिवारों तक पहुंचने का लक्ष्य था। इससे पहले इतना व्यापक जनसंपर्क अभियान नहीं हुआ था। अभियान के तहत स्वयंसेवक 5,45,737 स्थानों पर पहुंचे और लगभग 20 लाख कार्यकत्र्ता सम्पर्क अभियान में लगे। अभियान के तहत देश में 12,47,21,000 परिवारों से स्वयंसेवकों ने सम्पर्क किया। अभियान में संपूर्ण देश में भावनात्मक एकात्मा का अनुभव हुआ है।

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डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक वार्षिक होती है, और इसमें हम वर्ष भर के संघ कार्य का विस्तारपूर्वक अवलोकन करते हैं, तथा अगले साल की तैयारी करते हैं। इस बार सरकार्यवाह का चुनाव भी होने वाला है, तो अगले तीन वर्ष की संघ कार्य की योजना पर भी बैठक में चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण मार्च से जून 2020 तक संघ का कार्य पूर्ण बंद था, शाखाएं बंद थीं। तब भी संघ के स्वयंसेवक सक्रिय थे। कोरोना के कारण निर्मित आपदा में समाज की सहायता के लिए पहले दिन से ही देशभर में स्वयंसेवक सक्रिय थे। अन्य देशों में जहां वेलफेयर स्टेट प्रभावी है, वहां स्टेट मशीनरी ही सक्रिय होती है। लेकिन यह भारत की विशेषता है कि यहां सरकारी, प्रशासन की सेवाओं के साथ-साथ समाज भी सहयोगी था। कोरोना काल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने देशभर में सेवा भारती के माध्यम से 92,656 स्थानों पर सेवा कार्य किए, इसमें 5,60,000 कार्यकर्ता सक्रिय रहे, जिन्होंने 73 लाख राशन किट वितरित किए, साढे़ 4 करोड़ लोगों को भोजन पैकेट वितरित किए गए, 90 लाख मास्क का वितरण किया, 20 लाख प्रवासी लोगों की सहायता की गई। अढ़ाई लाख घुमंतू लोगों की सहायता की, 60 हजार यूनिट रक्तदान भी किया। केवल संघ ही नहीं, समाज के अनेक संगठनों, मठ, मंदिर, गुरुद्वारों ने भी समाज की सेवा की। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष मार्च की तुलना में 89 प्रतिशत शाखाएं पुनः प्रारंभ हो गई हैं। संघ का कार्य देश के सभी जिलों में है। देश में 6495 खंडों (तालुका) में से 85 प्रतिशत में संघ का कार्य है, 58,500 मंडलों में से 40 प्रतिशत में प्रत्यक्ष शाखा है और 20 प्रतिशत में संपर्क है। आने वाले तीन वर्षों में सभी मंडलों तक संघ का कार्य पहुंचे, ऐसा हमारा प्रयास रहेगा।
कोरोना काल में समाज का सहभाग, भारत ने जो दुनिया के समक्ष उदाहरण प्रस्तुत किया, वैक्सीन उपलब्ध करवाई, समाज अभिनंदन करने वाला प्रतिनिधि सभा की बैठक में प्रस्ताव रहेगा। श्रीराम मंदिर को लेकर भी प्रस्ताव रहेगा। समाज परिवर्तन के कार्य में संघ के साथ मिलकर काम करने को उत्सुक अनेक लोग मिले हैं, उन सबको साथ लेकर समाज परिवर्तन की दिशा में कैसे अधिक से अधिक हम काम कर सकते हैं, इसके साथ ही अगले तीन वर्षों में संघ कार्य का विस्तार, कार्यकर्ताओं के विकास पर भी चर्चा होगी।

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