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Shimla Garbage Crisis: शिमला में सैहब कर्मियों की हड़ताल से मचा हाहाकार, हजारों घरों से नहीं उठा कूड़ा,

Shimla SEHB Employees Strike: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सैहब सोसायटी के कर्मचारियों की हड़ताल के कारण लगातार तीसरे दिन सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे हजारों घरों में कचरे के ढेर लग गए हैं।
Shimla Garbage Crisis: शिमला में सैहब कर्मियों की हड़ताल से मचा हाहाकार, हजारों घरों से नहीं उठा कूड़ा,

Shimla Garbage Crisis News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सैहब सोसायटी के 800 से अधिक कर्मचारियों की हड़ताल के कारण सोमवार को लगातार तीसरे दिन भी पूरे शहर में सफाई व्यवस्था ठप रही। सोमवार सुबह कर्मचारियो ने सीटीओ (CTO) चौक पर एकत्रित होकर उग्र प्रदर्शन किया और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

इस हड़ताल के चलते शहर के हजारों घरों से पिछले तीन दिनों से कूड़ा नहीं उठ पाया है, जिसके कारण जगह-जगह कचरे के ढेर लग गए हैं और स्थिति बिगड़ती जा रही है। सैहब सोसायटी कर्मचारी यूनियन ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक उग्र रूप अख्तियार कर लेगा।

नगर निगम प्रशासन की ओर से एजीएम (AGM) बुलाने और मांग पूरी करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारी हड़ताल वापस लेने को तैयार नहीं हैं। सैहब सोसायटी कर्मचारी यूनियन ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी वेतन बढ़ोतरी से जुड़ी मुख्य मांग को धरातल पर पूरा नहीं किया जाता, तब तक कोई भी कर्मचारी काम पर वापस नहीं लौटेगा।

यूनियन के अध्यक्ष जसवंत सिंह का कहना है कि नगर निगम को सबसे पहले उनकी मांग पूरी करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि एजीएम बुलाने की सूचना नगर निगम ने केवल फोन पर दी है और इस संबंध में कोई लिखित पत्राचार नहीं किया गया है। प्रशासन चाहता तो कर्मचारियों की बैठक बुलाकर भी यह जानकारी दे सकता था। उन्होंने दावा किया कि सभी कर्मचारी पूरी तरह एकजुट हैं।

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दूसरी तरफ, नगर निगम प्रशासन ने इस संकट से निपटने के लिए शहर की सफाई व्यवस्था को आउटसोर्स करने का एक बड़ा फैसला ले लिया है। इसके लिए बकायदा टेंडर भी आमंत्रित कर लिए गए हैं। नई योजना के तहत अब ठेकेदारों के जरिये पूरे शहर की सफाई व्यवस्था का संचालन किया जाएगा।

ठेकेदार हर वार्ड में कूड़ा उठाने के लिए अपने अलग कर्मचारी तैनात करेगा, जिनका मुख्य काम सिर्फ घरों से कलेक्शन सेंटरों तक कूड़ा पहुंचाने का रहेगा। कलेक्शन सेंटरों से नगर निगम खुद अपने वाहनों के माध्यम से कूड़ा उठाकर भरयाल संयंत्र तक पहुंचाएगा। प्रशासन का कहना है कि यदि कर्मचारियों की यह हड़ताल इसी तरह जारी रहती है, तो 20 मई के बाद शहर में इस नई व्यवस्था को पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा।

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उधर,  नगर निगम शिमला के आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की है। उन्होंने कहा कि नगर निगम ने कर्मचारियों की मांगों को बेहद गंभीरता से लिया है, इसीलिए आचार संहिता के तुरंत बाद एजीएम भी बुला ली गई है।

आयुक्त ने कहा कि कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और तुरंत काम पर लौटना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि जो कर्मचारी हड़ताल पर बने हुए हैं, उनकी सूची रोजाना प्रशासन को भेजी जा रही है। जिला दंडाधिकारी द्वारा आवश्यक सेवाओं को बनाए रखने के लिए पहले ही एस्मा (ESMA) लागू किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारी हड़ताल पर डटे हुए हैं, जिसे जिला प्रशासन ने आदेशों का सीधा उल्लंघन माना है।

एस्मा के नियमों का उल्लंघन करने के कारण अब हड़ताली कर्मचारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। नगर निगम ने उपायुक्त को उन सभी कर्मचारियों की सूची सौंप दी है जो काम पर नहीं लौटे हैं। इस सूची में हड़ताल के लिए कर्मचारियों को उकसाने वाले कर्मचारी नेताओं के नाम भी विशेष रूप से शामिल किए गए हैं। प्रशासन की ओर से अब इन पर सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

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हड़ताल के दौरान की अवधि की कर्मचारियों की तनख्वाह काटी जाएगी, जिसके तहत अभी शुरुआती दो दिन का वेतन काटा जा रहा है। इसके अतिरिक्त, एस्मा के प्रावधानों का पालन न करने पर कर्मचारी नेताओं की नौकरी भी जा सकती है।

इस बीच, नगर निगम के नोटिस और एस्मा लागू होने के बाद कई साधारण कर्मचारी काम पर वापस आने के लिए तैयार दिख रहे हैं। नगर निगम का दावा है कि इन कर्मचारियों ने खुद प्रशासन से संपर्क साधा है और सोमवार से उनके काम पर लौटने की पूरी उम्मीद है। हालांकि, इस बीच आयुक्त भूपेंद्र अत्री के पास ऐसी शिकायतें भी पहुंची हैं जिनमें आरोप लगाया गया है कि कर्मचारी नेताओं और सुपरवाइजरों द्वारा काम पर लौटने के इच्छुक कर्मचारियों पर मानसिक दबाव बनाया जा रहा है ताकि वे काम पर न जा सकें।

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