Kerala New CM: केरलम के राजनीतिक इतिहास में सोमवार को एक नया अध्याय जुड़ गया है। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) विधायक दल के नेता चुने जाने के बाद कांग्रेस के कद्दावर नेता वदस्सेरी दामोदरन सतीशन (वीडी सतीशन) ने केरलम के नए मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में सुबह 10 बजे आयोजित हुए भव्य समारोह में राज्यपाल ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। विधायक दल का नेता चुने जाने के ठीक दस दिन बाद कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें आधिकारिक तौर पर यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।
दरअसल यह शपथ ग्रहण समारोह राज्य के इतिहास में एक बड़े रिकॉर्ड का गवाह बना। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के साथ उनकी पूरी 20 सदस्यीय कैबिनेट ने भी एक साथ मंच पर शपथ ग्रहण की। केरल के संसदीय इतिहास में लगभग छह दशक (60 साल) बाद यह पहला ऐसा मौका है, जब किसी मुख्यमंत्री ने अपने पूरे मंत्रिमंडल के साथ एक ही समय पर शपथ ली हो। इस ऐतिहासिक पल को देखने के लिए सेंट्रल स्टेडियम में जनसैलाब उमड़ पड़ा।
इस हाई-प्रोफाइल शपथ ग्रहण समारोह में देश के प्रमुख विपक्षी नेताओं का जमावड़ा देखा गया। नई सरकार के गठन और यूडीएफ की सत्ता में वापसी के इस उत्सव में शामिल होने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा सांसद राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी विशेष रूप से तिरुवनंतपुरम पहुंचे। इनके अलावा देश के अन्य तीन कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने के लिए समारोह में मौजूद रहे।
उल्लेखनीय है कि वकील से राजनेता बने 61 वर्षीय वीडी सतीशन की जमीनी पकड़, आक्रामक वक्तृत्व शैली और बेजोड़ संगठन कौशल ने उन्हें केरल की सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाया है। सतीशन का जन्म 31 मई 1964 को कोच्चि के नेट्टूर में एक नायर परिवार में हुआ था। उनके पिता के. दामोदरा मेनन और मां वी. विलासिनी अम्मा थे। उन्होंने पनांगड हाईस्कूल से अपनी शुरुआती शिक्षा पूरी की, जिसके बाद सैक्रेड कॉलेज थेवारा से स्नातक और राजगिरी कॉलेज से सोशल वर्क में मास्टर डिग्री हासिल की। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने केरल लॉ एकेडमी और गवर्नमेंट लॉ कॉलेज तिरुवनंतपुरम से एलएलबी और एलएलएम की डिग्रियां प्राप्त कीं।
छात्र जीवन से ही राजनीति में कदम रखने वाले सतीशन ने केरल स्टूडेंट्स यूनियन (केएसयू) के माध्यम से अपनी पहचान बनाई। वे महात्मा गांधी विश्वविद्यालय संघ के अध्यक्ष रहे और बाद में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के राष्ट्रीय सचिव भी नियुक्त हुए। राजनीति के समानांतर उन्होंने लगभग दस वर्षों तक केरल हाई कोर्ट में वकालत भी की, जहां उन्होंने कई सामाजिक मुद्दों पर काम किया। 1996 में उन्होंने परवूर विधानसभा सीट से अपना पहला चुनाव लड़ा, लेकिन तब उन्हें भाकपा (CPI) उम्मीदवार से हार का सामना करना पड़ा था।
पहली हार के बावजूद सतीशन ने क्षेत्र में काम करना बंद नहीं किया, जिसका परिणाम यह हुआ कि 2001 के चुनाव में उन्होंने परवूर सीट से पहली जीत दर्ज की। तब से लेकर अब तक वे इस सीट से लगातार छह बार विधायक चुने जा चुके हैं और परवूर को कांग्रेस का सबसे अभेद्य गढ़ बना दिया है। साल 2011 से 2016 के बीच यूडीएफ सरकार के दौरान उन्होंने मुख्य सचेतक (व्हिप) की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद साल 2021 में रमेश चेन्निथला की जगह उन्हें विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाया गया, जहां उन्होंने तत्कालीन पिनरई विजयन सरकार के खिलाफ सदन में आक्रामक आवाज उठाई।
साल 2026 के विधानसभा चुनाव में आलाकमान ने पूरे अभियान की कमान वीडी सतीशन के हाथों में सौंपी थी। उन्होंने बेहतरीन चुनावी रणनीति के दम पर यूडीएफ गठबंधन को शानदार 102 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दिलाई। वे खुद अपनी पारंपरिक सीट परवूर से 20,600 वोटों के भारी अंतर से विजयी रहे। इस बंपर जीत के पुरस्कार के रूप में उन्हें केरल का नया मुख्यमंत्री बनाया गया है। चुनावी हलफनामे की रिपोर्ट के अनुसार, नए मुख्यमंत्री वीडी सतीशन की कुल संपत्ति 6.65 करोड़ रुपये है।

















