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गुड़िया केस में आरोपी अनिल कुमार को अन्य केस में कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सज़ा

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प्रजासत्ता ब्यूरो|
शिमला के बहुचर्चित गुड़िया दुष्कर्म और हत्याकांड का आरोपी अनिल कुमार उर्फ नीलू नाहन में हत्या के प्रयास के दूसरे अन्य मामले में दोषी साबित हुआ है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जसवंत सिंह की अदालत ने दोषी नीलू को धारा 307 में उम्रकैद के अलावा 20 हजार रुपये जुर्माना और धारा 354 के तहत दोषी को दो साल का कारावास व 5 हजार रुपये जुर्माना भरने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने पर दोषी को अतिरिक्त कारावास होगी। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। उप जिला न्यायवादी एकलव्य ने मामले की पैरवी की।

मामला वर्ष 2015 का था जब एक महिला जो नेपाली मूल की जंगल लकड़ियां लाने गयी थी। मुजरिम ने महिला के साथ छेड़छाड़ की और विरोध करने पर महिला के हाथ से दराट छीनकर कर पहले किया सर पर लकड़ी के डंडे से प्रहार फिर दायिने हाथ का अंगूठा और बीच वाली उंगली काट दी थी। थाना पछाद के अंतर्गत दायर हुई थी प्रथमिकता में अदालत ने आरोपों को सही मानते हुए सज़ा सुनाई
मुजरिम पर थे|यह आरोप मुजरिम पर धारा 323, 324,326,354 और 307 के तहत था मामला दर्ज किया था।

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आपको बता दें अदालत ने आरोपी को मुजरिम मानते हुए धारा 354 में छेड़छाड़ के जुर्म में दो साल की कठोर कारावास और पाँच हज़ार रुपये जुर्माना और धारा 307 में उम्रकैद दी गयी और बीस हज़ार रुपये जुर्माना। हत्या की कोशिश करने वाले आरोपी को आईपीसी की धारा 307 में दोषी पाए जाने पर कठोर सजा का प्रावधान है आम तौर पर ऐसे मामलों में दोषी को 10 साल तक की सजा और जुर्माना दोनों हो सकते हैं जिस आदमी की हत्या की कोशिश की गई है अगर उसे गंभीर चोट लगती है, तो दोषी को उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। उक्त मामले में महिला को गम्भीर रूप से घायल व अपंग करने के अपराध में दी गयी उम्रकैद की सज़ा। बता दें कि शिमला में हुए गुड़िया दुष्कर्म एवं हत्याकांड मामले में भी अनिल कुमार आरोपी है। 

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तृप्ता भाटिया

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मुझे महिलाओं से जुड़े विषयों पर लिखना बेहद पसंद है। महिलाओं की ताकत, उनकी चुनौतियों और उनकी उपलब्धियों को उजागर करने में विश्वास करती हूँ। मेरे लेखन का उद्देश्य महिलाओं की आवाज़ को मजबूती से पेश करना और समाज में उनकी भूमिका को पहचान दिलाना है।

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