Solan News: हिमाचल प्रदेश की जिला पुलिस सोलन ने नशा तस्करों के आर्थिक नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में एक बड़ी और ठोस कार्रवाई को अंजाम दिया है। एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में व्यापक वित्तीय जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने आरोपियों की 47.76 लाख रुपए से अधिक की संदिग्ध बैंकिंग परिसंपत्तियों, वित्तीय निवेशों और अचल संपत्ति को फ्रीज कर दिया है।
यह पूरी कार्रवाई एनडीपीएस एक्ट के अध्याय वी-ए के तहत अमल में लाई गई है। इसका मुख्य उद्देश्य मादक पदार्थों की तस्करी के जरिए जुटाई गई अवैध संपत्ति पर कड़ा प्रहार कर तस्करों की आर्थिक कमर तोड़ना है।सोलन के पुलिस अधीक्षक (एसपी) साई दत्तातरे वार्मा ने इस वित्तीय कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक जानकारी साझा की है।

उन्होंने बताया कि यह पूरा मामला 13 मार्च 2026 को थाना दाड़लाघाट में दर्ज हुई एक एफआईआर से जुड़ा हुआ है। उस दौरान जिला पुलिस की एसआईयू टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर कराड़ाघाट के समीप नाकाबंदी की थी। चेकिंग के दौरान एक संदिग्ध ट्रक और आल्टो कार को रोककर तलाशी ली गई। तलाशी अभियान में पुलिस टीम ने ट्रक के भीतर से 1.980 किलोग्राम चरस और 935 ग्राम अफीम बरामद करने में सफलता हासिल की थी।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से ही ट्रक चालक कमलेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि आल्टो कार का चालक मनोज कुमार चकमा देकर फरार होने में कामयाब रहा था। इसके बाद पुलिस ने मामले की गहराई से जांच शुरू की। तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी रही। अंततः 23 मार्च 2026 को पुलिस ने मुख्य आरोपी मनोज कुमार को सोलन से गिरफ्तार कर लिया।
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी मादक पदार्थों की तस्करी में सक्रिय भूमिका निभा रहा था और घटना वाले दिन अपनी कार से ट्रक को पायलट कर रहा था। मामले की गहन वित्तीय जांच के दौरान पुलिस के सामने कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। जांच में पाया गया कि मुख्य आरोपी मनोज कुमार के बैंक खाते में 1 जनवरी 2023 से 10 मार्च 2026 के बीच लगभग 2.05 करोड़ रुपए का संदिग्ध लेन-देन हुआ था।
यह भारी-भरकम राशि उसकी कमाई के ज्ञात वैध साधनों से बिल्कुल मेल नहीं खा रही थी। इसके अतिरिक्त, आरोपी की पत्नी के बैंक खाते में भी 58 लाख रुपए का संदिग्ध लेन-देन, विभिन्न फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और अन्य वित्तीय निवेश दर्ज पाए गए। पुलिस जांच में यह बात भी उजागर हुई कि आरोपी के फरार रहने के दौरान कुछ फिक्स्ड डिपॉजिट्स को समय से पहले ही तुड़वा लिया गया था।
वित्तीय जालसाजी की परतें खोलने के लिए पुलिस ने आरोपी की बहन, पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के बैंक खातों की भी गहन पड़ताल की। इस जांच में बड़े पैमाने पर नकद जमा, आवर्ती जमा, डाक जीवन बीमा, सुकन्या समृद्धि योजना, आईपीपीबी (IPPB) खातों सहित कई अन्य निवेश सामने आए। इसके अलावा बिलासपुर जिले के घुमारवीं क्षेत्र में खरीदी गई करीब 5 बिस्वा भूमि भी पुलिस की जांच के दायरे में आई। विक्रेता के अनुसार इस अचल संपत्ति की कुल कीमत लगभग 28 लाख रुपए बताई गई है।
जांच का दायरा बढ़ाते हुए सोलन पुलिस मामले के मुख्य सप्लायर दत्त राम (निवासी जिला कुल्लू) और उसके परिवार के बैंक खातों तक पहुंची। मुख्य सप्लायर फिलहाल फरार चल रहा है और उसके खिलाफ अदालत से उद्घोषणा आदेश जारी हो चुके हैं। जांच में मनोज कुमार और उसकी पत्नी के खातों से सप्लायर के परिवार के बीच कई संदिग्ध वित्तीय लेन-देन पाए गए, जो दोनों परिवारों के बीच गहरे आर्थिक संबंधों को दर्शाते हैं।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दत्त राम और उसके परिवार से संबंधित 2.44 लाख रुपए की संदिग्ध संपत्ति और निवेश को भी चिन्हित कर फ्रीज कर दिया। समग्र वित्तीय जांच के पश्चात सोलन पुलिस ने आरोपी मनोज कुमार और उसके परिवार की 45.32 लाख रुपए तथा मुख्य सप्लायर दत्त राम और उसके परिवार की 2.44 लाख रुपए की संपत्ति चिन्हित की। इस तरह कुल मिलाकर 47.76 लाख रुपए से अधिक की बैंकिंग परिसंपत्तियों, वित्तीय निवेशों और अचल संपत्ति को पूरी तरह फ्रीज कर दिया गया है। पुलिस प्रशासन ने आगे की आवश्यक कानूनी प्रक्रिया और जब्ती के आदेशों के लिए इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट संबंधित सक्षम प्राधिकरण को सौंप दी है।


















