Mythos AI News: अमेरिकी फाइनेंशियल मार्केट में इस समय ‘प्रोजेक्ट ग्लासविंग’ (Project Glasswing) को लेकर भारी चर्चा है। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि तकनीकी दुनिया की एक गंभीर घटना है। Anthropic द्वारा विकसित ‘माइथोस’ (Mythos) नामक एक नए सुपर AI ने अमेरिकी फाइनेंशियल इकोसिस्टम को सुरक्षा के लिहाज से एक बड़े संकट के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।
इसी के चलते अमेरिका के वाइस प्रेसिडेंट, ट्रेजरी सेक्रेटरी और फेड चेयरमैन ने पहली बार टेक कंपनियों के CEOs और शीर्ष बैंकों के प्रमुखों के साथ आपातकालीन बैठकें की हैं। माइथोस की क्षमता ने विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। यह एक ऐसा शक्तिशाली AI मॉडल है जिसने ओपनBSD (OpenBSD) ऑपरेटिंग सिस्टम के अंदर 27 साल पुराने एक ऐसे बग को खोज निकाला, जो अब तक लाखों परीक्षणों के बावजूद छिपा हुआ था।
शोधकर्ताओं ने पाया कि यह AI केवल बग ढूंढने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बेहद चतुर (Deceptive) भी है। परीक्षण के दौरान, 10 में से 7 बार इसे पता था कि इसकी निगरानी की जा रही है, लेकिन इसने सामान्य व्यवहार का ढोंग जारी रखा। डिजिटल सुरक्षा के लिए यह खतरा और भी बड़ा है क्योंकि माइथोस केवल बग ढूंढता नहीं है, बल्कि उन्हें एक्सप्लॉइट करने में भी सक्षम है।
शोधकर्ताओं ने जब इसे एक ‘डिजिटल केज’ (Digital Cage) में बंद कर बाहर निकलने की चुनौती दी, तो माइथोस ने न केवल उस केज को तोड़ा, बल्कि बाहर निकलकर शोधकर्ता को ईमेल भी भेजा और पूरी प्रक्रिया को इंटरनेट पर प्रकाशित कर दिया। यही वह क्षमता है जिसने बैंकिंग सिस्टम, स्टॉक एक्सचेंज और क्रिप्टो मार्केट के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।
वर्तमान में भारतीय स्टॉक मार्केट का 70 प्रतिशत हिस्सा एल्गोरिदम पर आधारित है, जो 2010 के फ्लैश क्रैश जैसे ग्लिच के प्रति संवेदनशील रहा है। यदि माइथोस जैसा कोई AI ऐसे सिस्टम में सेंध लगाने में सफल होता है, तो इसके परिणाम भयावह हो सकते हैं। इसी डर को देखते हुए Anthropic ने अभी तक माइथोस को सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किया है।
इस खतरे से निपटने के लिए Anthropic ने 100 मिलियन डॉलर के फंड के साथ ‘प्रोजेक्ट ग्लासविंग’ की शुरुआत की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य माइथोस के सार्वजनिक लॉन्च से पहले अमेरिका के महत्वपूर्ण वित्तीय संस्थानों के सॉफ्टवेयर में मौजूद खामियों को ठीक करना है। इस पहल में Amazon, Google, Microsoft और JPMorganChase जैसे बड़े संस्थान भी शामिल हैं।
इतिहास में यह पहली बार है जब अमेरिकी प्रशासन, टेक दिग्गज और बैंकिंग सेक्टर के शीर्ष अधिकारी AI सुरक्षा को लेकर एक साथ एक ही टेबल पर बैठे हैं। प्रोजेक्ट ग्लासविंग का लक्ष्य इन संस्थानों को ‘माइथोस-प्रूफ’ बनाना है। यह घटना न केवल अमेरिका के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के फाइनेंशियल सिस्टम के लिए एक चेतावनी (Wake-up call) है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल एक सहायक नहीं, बल्कि एक अत्यधिक शक्तिशाली शक्ति बन चुका है जिसे नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती है।
















