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देह के प्रति आसक्ति का होना ही मानव के दुख और कष्टों का मूल कारण होता है – आचार्य नागेश कपिल

देह के प्रति आसक्ति का होना ही मानव के दुख और कष्टों का मूल कारण होता है - आचार्य नागेश कपिल

कुनिहार।
प्राचीन शिव तांडव गुफा कुनिहार में 11 दिवसीय महाशिवपुराण कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। कथा के अंतिम के दिन कथावाचक आचार्य नागेश कपिल ने अपने मुखारविंद से अमृत मई ओजस्वी वाणी से पावनमई शिव प्रवचन रूपी ज्ञान गंगा कथा का रसास्वादन कराते हुए पंडाल में उपस्थित भक्तजनों को शिव की महिमा के गुणगान के साथ-साथ कथा अंतिम प्रसंगों में सभी को भक्तजनों को बोध कराया की भगवान आशुतोष इस संसार के सभी जीवो पर अपनी दया दृष्टि रखते हैं।

भगवान शंकर पर जो भी भक्त अटूट विश्वास एवं श्रद्धा रखता है। वह जीवन में कभी भी पथभ्रष्ट नहीं होता और उसे भोलेनाथ मोक्ष मुक्ति का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने अपनी कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि आज का मनुष्य भौतिकता वादी चकाचौंध में इतना खोया है कि वह आत्मिक सुख को खोता जा रहा है । वह शांति एवं संतोष की खोज में बाह्य जगत में निरर्थक इधर उधर भटक रहा है जबकि वास्तव में स्थाई शांति एवं संतोष उसके अंदर निहित है।

आज के संदर्भ में मानवीय मूल्यों की शिक्षा सभी को प्रदान करने की नितांत आवश्यकता है। जिससे एक सभ्य एवं सुशिक्षित नागरिक हम इस देश में तैयार कर सकें। आज का मानव हृदय के भाव के बिना जपमाला कर रहा है, जो बनावटी होते हैं। मानव जप माला हाथ में उठाए हुए हैं, परंतु उसका चित संसार के विषय वासना में इधर उधर भटक रहा है। यह कैसा जाप है? इस प्रकार के मंत्रों का जाप करने पर किसी प्रकार का कोई लाभ नहीं प्राप्त होता।

मंत्रोच्चारण हृदय से उठना चाहिए परंतु मानव के आज के कार्य बनावटी हो गए हैं, इसी कारण से उसको मन की शांति नहीं मिलती और जिस समय मन की शांति की आवश्यकता हो उस समय अधिकतर शांति का पाठ करने से कोई लाभ नहीं मिलता।सच शांति केवल तभी प्राप्त हो सकती है ,जब शरीर मन और हृदय तीनों में सामंजस्य हो, एकता हो। इस 11 दिवसीय महा शिव पुराण कथा के अंतिम दिवस के अवसर पर यज्ञ में भक्तजनों द्वारा पूर्णाहुति देख कर के कथा को विराम दिया गया। इस कथा के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए शिव तांडव गुफा विकास समिति कुनिहार के प्रधान राम रतन तंवर ने बताया कि महाशिवरात्रि का त्यौहार हर वर्ष की भांति बहुत हर्ष उल्लास और उमंग के साथ 1 मार्च मंगलवार को मनाया जाएगा । उसके उपरांत 2 बुधवार मार्च को मंदिर प्रांगण में विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। अतः उन्होंने इस विशाल भंडारे में अधिक से अधिक भक्तों को सम्मिलित होकर के पुण्य के भागीदार बनने का आह्वान किया।

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