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कर्ज में डूबे हिमाचल के लिए औषधि बनेगी भांग की खेती?

Published on: 1 February 2023
Himachal Cannabis Cultivation: कर्ज में डूबे हिमाचल के लिए औषधि बनेगी भांग की खेती?

प्रजासत्ता ब्यूरो|
भांग की खेती: भांग का नाम सुनते ही आपके दिमाग में पहली चीज़ क्या आती है? यकीनन तौर पर नशे वाला कोई पदार्थ, लेकिन ऐसा नहीं है। वैश्विक स्तर पर इसका इस्तेमाल कई प्रॉडक्ट्स बनाने में होता है। भारत में आमतौर पर,ज़्यादातर राज्यों में भांग की खेती करना प्रतिबंधित है। वर्ष 1985 में भारत सरकार ने नार्कोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत भांग की खेती करना प्रतिबंधित कर दिया था।

लेकिन इस अधिनियम के तहत राज्य सरकारों को औद्योगिक अथवा बागवानी उद्देश्यों के लिए भांग की अनियंत्रित और विनियमित खेती करने की अनुमति है। उत्तराखंड में भांग की खेती वैध है। वर्ष 2018 में राज्य सरकार ने भांग की खेती करने की अनुमति प्रदान कर दी थी। तब से यहां पर नियंत्रित और विनियमित तरीके से भांग की खेती की जाती है।

वहीँ अब हिमाचल में भांग की खेती को कानूनी जामा पहनाने की कवायद फिर से शुरू हो गई है। हिमाचल प्रदेश में सुक्खू सरकार राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार भांग की खेती को वैध करने जा रही है। जिससे राज्य को वार्षिक 18 हजार करोड़ रुपये आय होगी। इसके लिए सरकार पॉलिसी बनाने का खाका तैयार कर रही है।

पहाड़ी राज्य हिमाचल में भांग की खेती को वैध करने की मांग लंबे अरसे से उठती रही है। विपक्ष में रहते कांग्रेस के कुछ विधायकों ने यह मसला हिमाचल विधानसभा में भी उठाया था। इसे लेकर प्रदेश हाईकोर्ट में पीआईएल भी दाखिल की गई थी। अब सत्ता परिवर्तन के बाद कांग्रेस सरकार ने भांग की खेती को वैध बनाने का दावा किया है।

भांग का प्रयोग कई तरह की दवाइयों, कपड़ों, जैकेट, रेशा इत्यादि को बनाने के लिए किया जा सकता है। कैंसर, ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी की दवाइयां भाग से बनती है। भांग के पौधे से नशे का एलिमेंट निकाल कर इससे औषधीय, हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट के उत्पादों को बनाया जा सकता है। भांग की खेती से लोगों की आय के साधन भी बनेंगे वहीं औषधीय प्रयोग में भी लाया जा सकेगा। इजराइल ने भांग की औषधीय गुणों को साबित करते हुए कोविड की दवाइयां भी भांग से बनाई है

Himachal News: हिमाचल सरकार के लिए अब कमाई का जरिया बनेगी भांग की खेती, सरकारी संकल्प सर्वसम्मति से प
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भांग का पौधा 14 से 20 फ़ीट की ऊंचाई तक जाता है। इसे बांस के पौधे की तरह ही देखें। जैसे बांस से कई प्रॉडक्ट्स तैयार किये जाते हैं, वैसे ही भांग से भी करीब 25 हज़ार से भी ज़्यादा प्रॉडक्ट्स बनाए जा सकते हैं। भांग के पौधे से निकलने वाला रेशा काफ़ी मजबूत होता है। इसकी खेती में पानी की कम खपत होती है। इसको जानवर भी नुकसान नहीं पहुंचाते। भांग से पर्सनल एंड हेल्थ केयर में हेम्प का शैम्पू बार, क्रीम, बॉडी लोशन और सीबीडी ऑयल बनाते हैं।

शोध में पाया कि भांग के पौधे का विदेशों में फ़ूड इंडस्ट्री से लेकर फैब्रिक इंडस्ट्री में भांग का इस्तेमाल हो रहा है। गाड़ी बनाने के लिए प्लास्टिक की जगह भांग के रेशे का इस्तेमाल होता है। इसके बीज से ईंधन भी बनाया जा रहा है। भांग में ओमेगा प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। वो जो प्रोटीन पाउडर तैयार करते हैं, उसके एक चम्मच में 10 ग्राम प्रोटीन होता है। इससे बनने वाला तेल शुगर को कंट्रोल करने में सहायक है। पाचन शक्ति को दुरुस्त करता है। इसके तेल को खाने में भी इस्तेमाल किया जाता।

हालाँकि अब देखने वाली बात यह रहेगी की हिमाचल सरकार कैसे इसे उपयोगी बना पाती है। क्या कर्ज में डूबे हिमाचल के लिए भांग की खेती औषधि बन पाएगी। क्योंकि हिमाचल करीब 73 हजार करोड़ से अधिक के कर्ज के बोझ तले दबा है। प्रदेश में पूर्व जयराम सरकार के वक्त भी भांग की खेती को कानूनी जामा पहनाने की नीति पर चर्चा हुई।

पूर्व सरकार के वक्त किए गए आकलन के मुताबिक भांग की खेती को वैध बनाए जाने की स्थिति में हिमाचल को हर साल 18 हजार करोड़ का राजस्व आ सकता है। इससे प्रदेश को आर्थिक तौर पर संबल मिलेगा। हिमाचल प्रदेश में अनुमानित 2,400 एकड़ में भांग की अवैध खेती हो रही है। इसके जरिए हर साल 960 करोड़ रुपये मूल्य की चरस की तस्करी की जाती है और इसे पश्चिमी यूरोपीय और स्कैंडिनेवियाई देशों में भेजा जाता है।

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