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आखिर बिलासपुर में हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज में सत्र की शुरुआत कब…..संदीप सांख्यान

आखिर बिलासपुर में हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज में सत्र की शुरुआत कब.....संदीप सांख्यान

सुभाष कुमार गौतम/घुमारवीं
बिलासपुर में बन रहे हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज का प्रथम बैच इस शैक्षणिक सत्र में पासआउट हो जाएगा, लेकिन इसके प्रथम बैच के छात्रों को बंदला में बन रहे इस कॉलेज में बैठने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हो पायेगा। जिला कांग्रेस महासचिव ने कहा कि इस कॉलेज का प्रथम बैच तो पास आउट हो रहा है लेकिन इन छात्रों के साथ त्रासदी यह कि इनको एफिलेशन तो हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्विद्यालय से मिल तो जाएगी लेकिन इंजीनियरिंग के अंतराष्ट्रीय स्तर की प्रमाणिकता से अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद यानी ए.आई.सी.टी.ई की सर्टिफिकेशन से वंचित रहना पड़ सकता है।

बिलासपुर के बंदला में बन रहे इस हाईड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज की कक्षाएं शैक्षणिक सत्र 2020-21 बिठाई जानी थी लेकिन अब तो शैक्षणिक सत्र 2021-22 भी चल पड़ा है लेकिन अभी तक भी इस कॉलेज में कक्षाओं की शुरुआत नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है यह प्रदेश सरकार का इस कॉलेज के बारे उदासीन रवैया लग रहा है और इसके छात्रों और लोकल जनभावनाओं के साथ खिलवाड़ हो रहा है। यहां के जनप्रतिनिधि भी इस बारे में चिंतित नहीं है। उन्होंने कहा कि यहां के छात्र जो नगरोटा बगवां के कैंपस में पढ़ रहे उनको सिर्फ कैप्म ऐट कॉलेज की डिग्री पर ही संतोष करना पड़ेगा जो कि वर्तमान में ये कक्षाएं नगरोटा बगवां में चल रही हैं।

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बंदला हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज में 4 ट्रेड में इंजीनियरिंग होनी तय है और हर ट्रेड में 60-60 सीटें तय की गई हैं यानी कुल 240 हाईड्रो इंजीनियर हर वर्ष यह कॉलेज देश को देगा, लेकिन वर्तमान में कांगड़ा जिला के नगरोटा में हाईड्रो इंजीनियरिंग के 2 ट्रेड इलैक्ट्रीकल व सिविल की कक्षाएं चल रही हैं, जिसमें 120 प्रशिक्षु अध्ययनरत हैं और वह इस सत्र में पास आउट भी हो जाएंगे। इस समय 7वां सैमेस्टर और 3 वां बैच चल रहा है। सातवां सैमेस्टर और चौथा बैच बिलासपुर की बंदलाधार में ही शुरू होना तय था लेकिन अभी वर्तमान सरकार से इस बारे में कोई उम्मीद नहीं कि जा सकती है। साथ ही इसमें मैकेनिकल और कम्प्यूटर साइंस ट्रेड भी आरंभ किए जाने थे, जिनके ऊपर संशय बरकार है।

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बिलासपुर की बंदला धार पर 62.08 बीघा जमीन पर बनाये जा रहे इस कॉलेज को पूर्ण रूप से तैयार करने का लक्ष्य 2020 रखा गया था पर इसमें प्रदेश सरकार की बड़ी असफलता सामने आ रही है। जबकि इसको बनाने में 105 करोड़ की राशि खर्च होनी थी। इस कॉलेज को नैशनल प्रोजैक्ट कंस्ट्रक्शन कंपनी यानि एन.पी.सी.सी. बना रही है। अनुबंध के तहत निर्माता कंपनी को 27 माह के भीतर काम पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है।

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तथ्यों के अनुसार 24 जून 2020 को एक बैठक शिमला में अतिरिक्त मुख्य सचिव मनोज कुमार की अध्यक्षता में आयोजित भी की गई थी जिसमे सभी बोर्ड ऑफ गवर्नर्ज (बी.ओ.जी.) के सदस्य मौजूद थे और इस बैठक भवन एवं अन्य आधारभूत ढांचे की प्रोग्रैस जांचने का फैसला भी लिया गया था लेकिन अभी तक कुछ हो नहीं पाया और सिविल और इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग का प्रथम बैच जुलाई 2021 तक निकल भी जाएगा। प्रदेश सरकार को इस कॉलेज में पढ़ रहे छात्रों और बिलासपुर और बंदला वासियों की जनभावनाओं का ख्याल रखना चाहिए और इसी सत्र में इसकी कक्षाएं शुरू करवानी चाहि

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