Prajasatta Side Scroll Menu
Bahra University - Shimla Hills

Bilaspur News: बिलासपुर वाहन पंजीकरण फर्जीवाडे में 500 गाड़ियां ब्लैकलिस्ट, मचा हड़कंप

Bilaspur Vehicle Registration Scam: हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में वाहन पंजीकरण में हुए बड़े फर्जीवाड़े के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। पिछले छह साल में पंजीकृत 500 वाहनों को ब्लैकलिस्ट कर मालिकों को नोटिस जारी किए गए हैं।
Published on: 22 April 2026
Bilaspur News: बिलासपुर वाहन पंजीकरण फर्जीवाडे में 500 गाड़ियां ब्लैकलिस्ट, मचा हड़कंप

Bilaspur News Today : बिलासपुर में आरएलए कार्यालय में सामने आए वाहन पंजीकरण फर्जीवाड़े मामले में प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। एसडीएम सदर डा. राजदीप सिंह के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने बीते छह वर्षों के दौरान पंजीकृत वाहनों के रिकॉर्ड की गहन जांच की है। इस जांच प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी और दस्तावेजों में खामियां पाए जाने पर 500 वाहनों को तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।

प्रशासन द्वारा ब्लैकलिस्ट किए गए इन 500 वाहन मालिकों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। इन सभी वाहन मालिकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने वाहन और उनसे संबंधित समस्त मूल दस्तावेज लेकर आरएलए कार्यालय में उपस्थित हों। वहां इन वाहनों का दोबारा भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सत्यापन प्रक्रिया के बिना किसी भी वाहन को ब्लैकलिस्ट सूची से नहीं हटाया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि इस पूरे फर्जीवाड़े की परतें तब खुलीं जब जनवरी महीने में नई दिल्ली के चाणक्यपुरी थाना क्षेत्र में एक गाड़ी चोरी का मामला दर्ज हुआ। इस मामले की जांच के सिलसिले में दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम बिलासपुर पहुंची थी। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि बिलासपुर में तैनात रहे उपायुक्त कार्यालय के सीनियर असिस्टेंट सुभाष चंद ने इस रैकेट को संचालित करने में अहम भूमिका निभाई थी। दिल्ली पुलिस ने सुभाष चंद को गिरफ्तार कर लिया है।

प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह फर्जीवाड़ा पिछले कई वर्षों से सुनियोजित तरीके से चल रहा था। आरोपितों में सुभाष चंद के साथ ही गौरव शर्मा का नाम भी मुख्य रूप से शामिल है। ये लोग अन्य राज्यों से पुरानी गाड़ियों की व्यवस्था करते थे और फिर उनके नकली दस्तावेज तैयार करवाते थे। इन वाहनों के चैसी नंबर बदलकर इन्हें बिलासपुर आरएलए में नई गाड़ियों के रूप में पंजीकृत कर दिया जाता था।

यह खेल पूरी तरह से कमीशन और रिश्वत के आधार पर चलता था। आरोपितों द्वारा गाड़ी की कीमत के अनुसार रिश्वत की रकम तय की जाती थी। पूछताछ और साक्ष्यों से यह भी पता चला है कि इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए ये लोग देश के अलग-अलग हिस्सों में भ्रमण भी करते थे। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच जारी है और प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

जांच टीम ने मुख्य रूप से एक जनवरी 2020 से दिसंबर 2025 तक के छह साल के रिकॉर्ड को खंगाला है। समस्या तब और गंभीर हो गई जब आरोपित गौरव शर्मा और सुभाष चंद ने अपने कार्यकाल का पूर्ण रिकॉर्ड आरएलए को सौंपने में आनाकानी की। प्रशासन ने उन्हें रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के लिए कई बार नोटिस जारी किए, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसी कारण रिकॉर्ड में कमियां पाई गईं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस संबंध में एसडीएम सदर बिलासपुर, डा. राजदीप सिंह ने कहा कि मामले की जांच निरंतर चल रही है। उन्होंने बताया कि पांच सौ वाहन मालिकों को नोटिस जारी होने के बाद वे अपने वाहनों का सत्यापन करवाने के लिए कार्यालय पहुंच रहे हैं। डा. सिंह के अनुसार, जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसकी विस्तृत रिपोर्ट राज्य परिवहन प्राधिकरण को सौंप दी जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की धांधली को रोका जा सके।

Aaj Ki KhabrenBilaspur HP newsbilaspur latest newsbilaspur news todayBilaspur samachar

Join WhatsApp

Join Now