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सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन: 21 बांध प्रबंधनों के खिलाफ कार्रवाई करेगी हिमाचल प्रदेश सरकार

सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन: 21 बांध प्रबंधनों के खिलाफ कार्रवाई करेगी हिमाचल प्रदेश सरकार

प्रजासत्ता ब्यूरो|
हिमाचल प्रदेश सरकार, प्रदेश के 21 बांध प्रबंधनों द्वारा सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी।प्रदेश सरकार को जानकारी मिली है कि प्रदेश के 23 बांधों में से 21 बांध प्रबंधनों द्वारा सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन किया गया है, और इसी के कारण उनके खिलाफ अब कार्रवाई होगी। इस दौरान अधिकारियों का कहना है कि सरकारी एजेंसियों द्वारा निगरानी बरतने को भी उल्लंघन के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने रविवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ”कम से कम 21 बांधों में सुरक्षा मानदंडों का पालन नहीं किया गया और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

उन्होंने कहा कि अधिकारियों को बांध प्राधिकारियों की लापरवाही से हुए नुकसान पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड द्वारा संचालित मंडी में लारजी जलविद्युत परियोजना और सिरमौर के जटेओन तथा शिमला में हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन द्वारा संचालित सावरा कुड्डू परियोजना और कुल्लू में सैंज उल्लंघनकर्ताओं में हैं।

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हिमाचल प्रदेश में नेशनल हाइड्रो पावर कॉरपोरेशन (एनएचपीसी), नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी), भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी), सतलुज जलविद्युत निगम निमिटेड (एसजेवीएनएल) और इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स (आईपीपी) जैसी एजेंसियों द्वारा संचालित 9,203 मेगावाट की कुल क्षमता वाली 23 जलविद्युत परियोजनाएं हैं। करीब 1,916 मेगावाट क्षमता की छह और परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।

अधिकारियों ने कहा कि केवल बिलासपुर में कोल बांध और किन्नौर में करछम वांगटू परियोजना ने पानी छोड़ने के दिशानिर्देशों का पालन किया है। सक्सेना ने कहा कि 2014 में बिना पूर्व चेतावनी के लारजी बांध से पानी छोड़े जाने के कारण आंध्र प्रदेश के 24 छात्रों के बह जाने के बाद प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने पर जोर दिया गया था।

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अधिकारियों ने बताया कि पंजाब और हिमाचल प्रदेश के निचले इलाकों में बाढ़ का कारण पोंग, पंडोह और मलाणा बांधों से पानी छोड़ा जाना है।

सक्सेना ने पानी छोड़ने के संबंध में सुरक्षा मुद्दों पर शुक्रवार को एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि बांध सुरक्षा अधिनियम (डीएसए) और केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) 2015 के दिशानिर्देश के प्रासंगिक प्रावधानों के अनुपालन में बांध अधिकारियों की विफलता के लिए भी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

उन्होंने तब एक बयान में कहा, ‘‘अनुनय और बातचीत का समय खत्म हो गया है और हमें उल्लंनकर्ताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटना चाहिए।’’

मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य के जलाशयों के आगे के क्षेत्र में हालिया संकट के लिए बांध सुरक्षा जांच की विफलता को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जिसे या तो उपेक्षित किया गया या डीएसए के मानक दिशानिर्देशों के अनुसार नहीं किया गया।

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उन्होंने कहा कि डीएसए के तहत प्रासंगिक प्रावधान हैं, जैसे प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली स्थापित करना, पानी छोड़ने के दिशानिर्देश, नियंत्रण कक्ष स्थापित करना, जलाशय रखरखाव, आपातकालीन कार्य योजना और बांध स्थलों और बिजलीघर के बीच बेहतर संचार, जिन्हें जमीन पर लागू किया जाना चाहिए।

नियमित आधार पर बांधों के जोखिम मूल्यांकन की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए और यह सुनिश्चित करते हुए कि बांध सुरक्षा इकाइयां चौबीस घंटे कार्यात्मक हैं, मुख्य सचिव ने बांध सुरक्षा पर राज्य समिति और राज्य बांध सुरक्षा संगठन के प्रभावी कामकाज की वकालत की।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, 24 जून को मॉनसून की शुरुआत के बाद से बारिश से संबंधित घटनाओं में अब तक 221 लोगों की मौत हो गई है और लगभग 11,900 घर आंशिक या पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
-खबर इनपुट भाषा-

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