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Parshuram Jayanti 2024: परशुराम जयंती का महत्व क्यों है, जानें तिथि और शुभ मुहूर्त..!

Parshuram Jayanti 2024

Parshuram Jayanti 2024: भगवान परशुराम ने ब्राह्मण ऋषि के घर में जन्म लिया था। सनातन धर्म में भगवान परशुराम को श्रृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। भगवान परशुराम, जिन्हें ‘भृगुवंशी ब्राह्मण’ के रूप में भी जाना जाता है, एक योद्धा संत थे जिन्होंने अधर्म के खिलाफ लड़ाई लड़ी और धर्म की स्थापना की। उन्होंने अपने फरसे से 21 बार पृथ्वी को क्षत्रिय विहीन कर दिया । परशुराम ज्ञान और शक्ति के प्रतीक हैं और उन्हें अन्याय के खिलाफ लड़ने वाले एक निर्भीक योद्धा के रूप में देखा जाता है।

कब है Parshuram Jayanti 2024:

हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष बैसाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर भगवान विष्णु के अवतार प्रभु परशुराम का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस बार भगवान परशुराम का जन्मोत्सव (Parshuram Jayanti 2024), 10 मई को मनाया जा रहा है। भगवान परशुराम का जन्म अक्षय तृतीया के दिन हुआ था जिसके कारण अक्षय तृतीया (Akshay Tritiya 2024) का महत्व काफी बढ़ जाता है।

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Parshuram Jayanti 2024
भगवान विष्णु के छठे अवतार, भगवान परशुराम

परशुराम की पूजा सूर्योदय और सूर्यास्त से पहले करना शुभ

Parshuram Jayanti 2024 के शुभ अवसर पर भगवान परशुराम की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि प्रभु की आराधना करने से जातक को जीवन में शुभ फल की प्राप्ति होती है। भगवान परशुराम की पूजा सूर्योदय और सूर्यास्त से पहले करना शुभ माना गया है, इसलिए उनकी पूजा इस अवधि में कभी भी कर सकते हैं। माना जाता है कि इस दिन किया गया दान-पुण्य कभी क्षय नहीं होता । अक्षय तृतीया के दिन जन्म लेने के कारण ही भगवान परशुराम की शक्ति भी अक्षय थी।

Parshuram Jayanti 2024 का शुभ मुहूर्त :

परशुराम जयंती 10 मई, 2024 को वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि, ब्रह्म मुहूर्त में 4 बजकर 17 मिनट पर शुरू होगी और यह 11 मई की आधी रात के बाद 2 बजकर 50 मिनट पर समाप्त होगी।

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मान्यता के अनुसार आज भी जीवित हैं भगवान परशुराम

सनातन धर्म में परशुराम जयंती (Parshuram Jayanti 2024) बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि मान्यता है कि भगवान परशुराम आज भी जीवित हैं। वे एकमात्र विष्णु अवतार हैं, जिसके बारे में ऐसा कहा जाता है कि उनकी मृत्यु नहीं हुई है।  इतना ही नहीं धार्मिक ग्रथों के अनुसार इनकी गिनती तो महर्षि वेदव्यास, अश्वत्थामा, राजा बलि, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, ऋषि मार्कंडेय सहित उन आठ अमर किरदारों में होती है जिन्हें कालांतर तक अमर माना जाता है। अक्षय तृतीया के दिन जन्म लेने के कारण ही भगवान परशुराम की शक्ति भी अक्षय थी।

Parshuram Jayanti 2024 विशेष “क्रोधी स्वभाव के हैं भगवान परशुराम”

कई पौराणिक कथाओं में भगवान परशुराम का वर्णन मिलता है, जिससे ज्ञात होता है कि परशुराम जी बेहद क्रोधी स्वभाव के थे। एक प्रचलित कथा के अनुसार भगवान विष्णु के अवतार परशुराम जी ने गणेश जी का एक दांत गुस्‍से में तोड़ दिया था। कथा के अनुसार परशुराम शिव जी से मिलने कैलाश पर्वत आए थे, मगर उस वक्‍त भगवान शिव विश्राम कर रहे थे और बेटे गणेश को पहरा देने के लिए कहा था।

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भगवान गणेश ने पिता की आज्ञा का पालन किया और परशुराम को शिव जी से मिलने से रोक दिया, इससे क्रोधित होकर परशुराम ने अपने फरसे से गणेश जी का दांत काट दिया था। तब से गणपति को एकदंत कहा जाने लगा।

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