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यादें: जब माल ढुलाई वाले हेलीकाप्टर में पांगी-किलाड़ पहुंचे थे मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह

जब माल ढुलाई वाले हेलीकाप्टर में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह

कुछ घटनाएं कई कारणों से ऐतिहासिक हो जाती हैं, जैसे कि एक मुख्यमंत्री का लग्जरी हेलीकॉप्टर की जगह माल ढुलाई वाले हेलीकॉप्टर में सफर करना। यह कुछ कुछ वैसा ही था जैसे कि कोई वीआईपी मर्सडीज बेंज की बजाए महिंद्रा पिकअप की सवारी करे। बात 1995 की है। हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को चंबा जिले के जनजातीय क्षेत्र पांगी-किलाड़ जाना था।

शायद किलाड़ के पॉवर प्रोजेक्ट का उद्घाटन करना था। पत्रकार के तौर पर उन्होंने मुझे और वेपाराव को साथ चलने को कहा। तत्कालीन कैबिनेट मंत्री रंगीलाराम राव और ठाकुर सिंह भरमौरी के अलावा मुख्य सचिव एके गोस्वामी को भी जाना था। हम सब सुबह सुबह शिमला के अनाडेल हेलीपैड पर पहुंच गए। सरकारी हेलीकॉप्टर का इंतजार था। कुछ देर बाद पता चला कि उस हेलीकॉप्टर में खराबी आने के कारण नहीं आ पाएगा। कोई दूसरा मुख्यमंत्री होता तो अपना दौरा स्थगित कर देता। लेकिन वीरभद्र सिंह ने ऐसा नहीं किया।

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उन्होंने मुख्य सचिव को किसी दूसरे हेलीकॉप्टर का प्रबंध करने के आदेश दिए। हिमाचल जैसे छोटे राज्य के लिए आज से 26 साल पहले यह मुश्किल काम था। मोबाइल भी नहीं होते थे। मुख्य सचिव एके गोस्वामी ने पुलिस के वायरलेस सेट के जरिए कहीं बात की। कुछ देर बाद संदेश आया की माल ढुलाई करने वाला हेलीकॉप्टर ही मिल पाएगा। उन्होंने डरते डरते यह मुख्यमंत्री को बताया। वीरभद्र सिंह ने हंसते हुए कहा कि उस में बैठने के लिए कुछ जगह तो होगी या फर्श पर ही बैठना पड़ेगा।

मुख्य सचिव ने कहा कि सीटें नहीं, बेंच होती है। इस पर मुख्यमंत्री बोले कि प्रोग्राम रद्द नहीं हो सकता। माल ढुलाई वाला हेलीकॉप्टर ही बुला लो, जाना हर हालत में है। बस फिर क्या था आधे-एक घंटे में मालवाहक हेलीकॉप्टर हाजिर हो गया और हम सब उसमें सवार होकर जनजातीय क्षेत्र पांगी के लिए उड़ चले।

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जनता के लिए अपनी प्रतिबद्धता के कारण उन्होंने सामान ढोने वाले हेलीकॉप्टर की बेंच पर बैठकर सफर करने में कोई संकोच नहीं किया। यह उनकी सादगी और कर्तव्यनिष्ठा का जीवंत उदाहरण था। मेरे लिए यह कई मायनों में अनूठा अनुभव था। बेहद खूबसूरत पांगी पहली बार देखा। अद्भुत, अकल्पनीय प्राकृतिक सौंदर्य।
-ख़बर इनपुट अजय श्रीवास्तव –

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