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“गाय-भैंसें छुट्टी नहीं लेतीं…” चक्कर मिल्क प्लांट के गेट पर पशुपालकों ने बहाया सैकड़ों लीटर दूध

Mandi News: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में दुग्ध उत्पादकों ने चक्कर मिल्क प्लांट के बाहर वीरवार को जोरदार प्रदर्शन किया, जहां दूध की खरीद सीमा तय करने और समय पर भुगतान न होने को लेकर आक्रोश फूटा।
Mandi Milk Plant Protest: "गाय-भैंसें छुट्टी नहीं लेतीं..." चक्कर मिल्क प्लांट के गेट पर पशुपालकों ने बहाया सैकड़ों लीटर दूध

Mandi Milk Plant Protest: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के बल्ह स्थित चक्कर मिल्क प्लांट के बाहर वीरवार को दुग्ध उत्पादकों ने इकट्ठा होकर एक जोरदार प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान क्षेत्र के पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों का गुस्सा प्रबंधन के खिलाफ खुलकर सामने आया। प्रदर्शनकारियों ने प्लांट प्रबंधन द्वारा लागू किए गए नए नियमों, जैसे कि 20 लीटर से अधिक दूध न लेने, महीने में चार हॉली-डे रखने और दूध का भुगतान समय पर न किए जाने के फैसलों का कड़ा विरोध किया।

प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए दुग्ध उत्पादक संघ के अध्यक्ष अनिल जामवाल ने इस पूरी स्थिति पर विस्तार से बात करते हुए बताया कि मिल्क प्लांट द्वारा प्रति उत्पादक 20 लीटर की सीमा तय करने से दुग्ध उत्पादकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्रदर्शन के दौरान अध्यक्ष ने प्लांट के बाहर बचा हुआ दूध दिखाते हुए कहा कि जिन उत्पादकों के पास अधिक मात्रा में दूध का उत्पादन होता है, उनका शेष दूध अब पूरी तरह बर्बाद हो रहा है, क्योंकि प्लांट उसे स्वीकार नहीं कर रहा है।

जामवाल ने आगे जानकारी देते हुए कहा कि प्रबंधन द्वारा महीने में चार हॉली-डे रखने का निर्णय भी पशुपालकों की आय पर सीधा और विपरीत असर डाल रहा है। उनका तर्क है कि पशु प्रतिदिन दूध देते हैं और ऐसी स्थिति में यदि महीने में चार दिन दूध की बिक्री रुकती है, तो उत्पादकों को सीधा नुकसान उठाना पड़ता है। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि दूध के भुगतान में भी कई बार महीनों की देरी की जाती है, जिससे पशुपालकों को गंभीर आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

इस संकट के समाधान के लिए पशुपालकों ने प्लांट प्रशासन के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखी हैं। उनकी मुख्य मांग है कि दूध खरीद पर लगाई गई 20 लीटर की सीमा को तुरंत समाप्त किया जाए, महीने में चार दिन छुट्टी रखने का निर्णय वापस लिया जाए और दूध का नियमित भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए। इस विरोध प्रदर्शन में विभिन्न पंचायतों से आई महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी आवाज बुलंद की।

प्रदर्शन में शामिल महिलाओं का कहना था कि उनके परिवारों की पूरी आजीविका केवल दूध उत्पादन और उसकी बिक्री पर ही निर्भर है। ऐसे में प्लांट के कड़े नियमों के कारण उनके सामने भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है। इस दौरान चक्कर मिल्क प्लांट के मुख्य गेट के बाहर सैकड़ों लीटर दूध के साथ उत्पादक धरने पर बैठे रहे। कुछ पशुपालक विरोध जताने के लिए मिल्क प्लांट के गेट पर भी चढ़ गए और वहां से अपना बचा हुआ दूध दिखाकर नारेबाजी करने लगे।

बढ़ते तनाव और प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। बल्ह की एसडीएम स्मृतिका नेगी ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारी पशुपालकों की सभी समस्याओं और मांगों को ध्यानपूर्वक सुना। दूसरी ओर, चक्कर मिल्क प्लांट के प्लांट इंजीनियर विश्वकांत शर्मा ने इस पूरे घटनाक्रम के संबंध में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पशुपालकों की कुछ मांगें निश्चित रूप से उचित हैं और प्रबंधन उन पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

प्लांट इंजीनियर विश्वकांत शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि अभी तक पशुपालकों की ओर से प्रबंधन को कोई लिखित ज्ञापन नहीं सौंपा गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि पशुपालकों की इन सभी समस्याओं को जल्द ही संबंधित उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा। हालांकि, इस आश्वासन के बावजूद दुग्ध उत्पादकों का रुख स्पष्ट है। उन्होंने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो इस आंदोलन को आने वाले दिनों में और अधिक तेज किया जाएगा।

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