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Bijli Mahadev Ropeway: जानिए नितिन गडकरी द्वारा शुरू इस प्रोजेक्ट का अब कंगना रनौत ने क्यों शुरू कर दि

Published on: 27 September 2024
Bijli Mahadev Ropeway: कंगना रनौत ने हिमाचल में इस विवादास्पद रोपवे परियोजना का किया विरोध
Bijli Mahadev Ropeway: बीजेपी सांसद कंगना रनौत, जो मंडी निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं, ने केंद्रीय सरकार की एक महत्वपूर्ण परियोजना के खिलाफ आवाज उठाई है। छह महीने पहले, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कुल्लू में स्थित बिजली महादेव मंदिर के लिए 272 करोड़ रुपये की लागत से रोपवे के निर्माण की घोषणा की थी। लेकिन अब कंगना रनौत ने इस परियोजना का विरोध शुरू कर दिया है।

दरअसल, बिजली महादेव मंदिर के लिए बनाए जा रहे रोपवे (Bijli Mahadev Ropeway) के खिलाफ कशावरी और खराहल घाटी के निवासी पिछले लम्बे समय से इस का जोरदार विरोध कर रहे है। ग्रामीणों का कहना है कि रोपवे के बनने से देवताओं का आक्रोश बढ़ सकता है और उनके रोजगार पर बुरा असर पड़ेगा। इसके अलावा, पर्यावरण को भी नुकसान होने का खतरा है, क्योंकि रोपवे के निर्माण में कई पेड़ों को काटना होगा।

वहीँ इस मामले (Bijli Mahadev Ropeway) पर कंगना रनौत ने ने बयान देते हुए कहा, “मैंने नितिन गडकरी से इस परियोजना के बारे में चर्चा की है। अगर हमारे देवता नहीं चाहते, तो यह परियोजना बंद होनी चाहिए। मैं फिर से गडकरी से मिलूंगी, हमारे देवताओं की इच्छा आधुनिकीकरण से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है।”

उल्लेखनीय है कि यह रोपवे परियोजना(Bijli Mahadev Ropeway) नितिन गडकरी द्वारा कुल्लू के मोहल नेचर पार्क में वर्चुअली शुरू की गई थी। इसे 18 महीने में पूरा करने की योजना है, जिससे 36,000 पर्यटक प्रतिदिन बिजली महादेव पहुंच सकेंगे, और इससे स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। वर्तमान में, सैलानियों को सड़क के रास्ते 2 से 3 घंटे का सफर करना पड़ता है, लेकिन रोपवे के माध्यम से यह सफर केवल सात मिनट में पूरा होगा।

नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड द्वारा विकसित यह मोनो-केबल रोपवे 55 बक्सों के साथ बनाया जाएगा। इसकी क्षमता एक घंटे में 1,200 यात्रियों को ले जाने की होगी, जिसे बाद में 1,800 तक बढ़ाया जा सकता है।

बिजली महादेव से जुडा रहस्य 

आपको बता दें कि बिजली महादेव मंदिर काशवरी गांव में 2,460 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और यह भारत के प्राचीन मंदिरों में से एक है। इसके नाम के पीछे एक अनोखी कहानी है, मान्यता के अनुसार हर 12 साल में इस मंदिर के शिवलिंग पर बिजली गिरती है, जिससे यह टूट जाता है। पुजारी फिर इन टुकड़ों को इकट्ठा करके दाल के आटे, अनाज और मक्खन से बने मिश्रण से जोड़ देते हैं। इस मंदिर की महिमा और ऐतिहासिकता के कारण देश-विदेश से लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं।

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