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कई नौकरीयां त्याग कर IAS बनी कृतिका कुल्हरी, अब सोलन की कलेक्टर बनकर करेगी जनता व देश की सेवा

IAS कृतिका कुलहरी
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प्रजासत्ता|
देश का हर युवा आईएएस बनकर कलेक्टर बनना चाहता है। आईएएस की कठिन परीक्षा पास करने के बाद उसका सपना होता है की वो किसी जिले का कलेक्टर बनकर जनता और देश की सेवा कर सके। इसी सपने को पूरा करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा की वर्ष 2013 बैच की अधिकारी ने उपायुक्त सोलन के रूप में अपनी जिम्मेदारी सम्भाल ली है|

बता दें कि राजस्थान के झुंझुनू जिले के सागासी गांव हाल निवासी इन्दिरा नगर की रहने वाली कृतिका कुल्हरी को बीते दिनों ही डीसी पद पर प्रोमोट किया गया था उसके बाद उन्होंने कार्यभार भी समभा लिया है । उनके प्रमोशन की खबर सुनते ही गांव में खुशियों की लहर दौड़ चुकी है। बता दें कि डीसी पद पर प्रोमोट से पहले कृतिका कुल्हारी प्रदेश के अन्य जिलों में भी विभिन्न पदों पर अपनी सेवाएं दे चुकी है|

कृतिका कुल्हारी उपायुक्त सोलन
कृतिका कुल्हरी के आईएएस बनने की कहानी बड़ी शानदार रही हैं। कृतिका कुल्हारी केवल 25 साल की उम्र में यूपीएससी की परीक्षा को पास करके बनी थी। साल 2013 में उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में 132वी रैंक हासिल की थी। झुंझुनू जिले की इस बेटी ने पूरे जिले का नाम रोशन कर दिया था।

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कृतिका कुल्हारी की शिक्षा की बात करें तो उन्होंने मशहूर संस्थान बिट्स पिलानी से बीटेक की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने अपने पिता से प्रेरित होकर सिविल पर क्षेत्र में जाकर देश की सेवा करने का निर्णय किया।

पिता भी थे आरएसएस अधिकारी
कृति कुल्हरी के पिता नरेंद्र कुल्हरी की बात करें तो वह बीकानेर में एडिशनल डिप्टी डायरेक्टर पद पर कार्यरत थे। लगभग 3 साल पहले उनके पिता जयपुर के अंबर होटल में डैड पाए गए थे। जब उन्हें अस्पताल ले जाया गया था, डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। बताया जा रहा था नरेंद्र कुल्हरी का हार्टअटेक्ट की वजह से निधन हो गया है।

कई नौकरी त्याग कर बनी आईएएस :
वही कृतिका कुलहरि की बात करे तो उन्होंने इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद कई नौकरी के ऑफर मिले थे। लेकिन उन्होंने उन सभी नौकरियों को त्याग कर यूपीएससी परीक्षा देने का फैसला किया था। कृतिका अपने पिता की तरह सिविल क्षेत्र में जाना चाहती थी। इसी को लेकर उन्होंने कई बड़ी कंपनियों की नौकरी को छोड़कर आईएएस बनने का निर्णय किया था। कृतिका हिमाचल प्रदेश में पहले चंबा जिले में एडीसी पद पर कार्यरत थी। लेकिन अब वह हिमाचल प्रदेश में डीसी पर प्रमोट हो गई है।

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