India Inflation Rate Increased: भारत की अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर है। दिसंबर महीने में खुदरा महंगाई दर थोड़ी बढ़कर 1.33 प्रतिशत हो गई, जो नवंबर के 0.7 प्रतिशत से ज्यादा है। यह आंकड़ा पिछले तीन महीनों में सबसे ऊंचा है, लेकिन फिर भी रिजर्व बैंक की 2 प्रतिशत की निचली सीमा से काफी नीचे बना रहा। इससे यह संकेत मिलता है कि साल के मध्य के बाद से कीमतों पर दबाव काफी हद तक काबू में रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक लगातार चौथे महीने महंगाई इस सीमा से नीचे रहना दिखाता है कि कीमतों पर अच्छा नियंत्रण है। पूरे 2025 साल की बात करें तो औसत महंगाई सिर्फ 2.2 प्रतिशत रही, जो पिछले 12 सालों का सबसे निचला स्तर है। इससे आम आदमी की जेब पर बोझ कम पड़ा।
दिसंबर का यह आंकड़ा और भी खास है क्योंकि यह पुराने 2012 आधार वर्ष पर आधारित आखिरी महंगाई डेटा है। अब जनवरी से महंगाई की गणना का तरीका बदल जाएगा। 12 फरवरी को आने वाला जनवरी का डेटा नए 2024 आधार वर्ष पर होगा, और पूरी सीरीज इसी नए ढांचे में शिफ्ट हो जाएगी।
नए बदलाव में क्या होगा? खपत की टोकरी को ताजा बनाया गया है, जिसमें ज्यादा सामान जोड़े गए हैं और गैर-खाद्य चीजों को अधिक महत्व दिया गया है। इसका मतलब है कि अब महंगाई के आंकड़े लोगों के रोजमर्रा खर्च को बेहतर तरीके से दर्शाएंगे, जहां सिर्फ खाना-पान ही नहीं, बल्कि सेवाएं और अन्य जरूरतें भी शामिल होंगी।
अभी की व्यवस्था में खाद्य सामग्री का हिस्सा आधे से ज्यादा है, इसलिए सब्जी, अनाज या दालों की कीमतों में छोटी सी हलचल भी पूरी महंगाई को हिला देती है। लेकिन नई व्यवस्था में गैर-खाद्य चीजों का वजन बढ़ने से महंगाई के आंकड़े कम उतार-चढ़ाव वाले होंगे। कुल मिलाकर, यह नया सिस्टम अर्थव्यवस्था की सच्ची तस्वीर को ज्यादा साफ और संतुलित तरीके से दिखाएगा, जिससे नीति बनाने में आसानी होगी। क्या यह बदलाव महंगाई को और स्थिर रखेगा? आने वाले महीनों में देखना बाकी है!

















